JharkhandNEWS

CORONA EFFECT: सूबे के कॉलेजों और विवि में नैक मूल्यांकन रूका, फंड मिलने में संशय

Ranchi : कोरोना का शैक्षणिक गतिविधियों पर व्यापक असर पड़ा है. विवि और कॉलेजों के कामकाज ऑनलाइन क्लासेज तक सिमटा हुआ है. इतना ही नहीं इस कोरोना की दूसरी लहर ने कॉलेजों और विवि के मूल्यांकन कार्य को भी रोक दिया है. नये शैक्षणिक सत्र की शुरुआत के साथ सूबे के विवि और कॉलेजों में नैक मूल्यांकन का काम चल रहा था. कई कॉलेजों में यह प्रक्रिया लगभग पूरी हो चुकी थी जिसपर अब रोक लग चुकी है. हांलाकि शैक्षणिक संस्थानों को संभावित तिथि नैक मूल्यांकन के लिए मिला है पर उन तारीखों में मूल्यांकन संभव हो पायेगा इसपर भी संशय है. बताते चलें कि यूजीसी ने उच्च शिक्षण संस्थानों को 2022 तक नैक मूल्यांकन अनिवार्य रूप से करा लेने को कहा था.

शहर के दो विवि का रूका नैक मूल्यांकन:

रांची विवि और डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी विवि का भी नैक मूल्यांकन होना है. डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी विवि को इस वर्ष यूजीसी से 12बी संबद्धता प्राप्त हुई है और जल्द नैक मूल्यांकन करा लेने को कहा गया है. डीएसपीएमयू प्रशासन की ओर से विभिन्न समितियों का गठन किया जा चुका है. लेकिन, कोरोना के अचानक बढ़ते मामलों को देखते हुए फिलहाल सारी गतिविधियां रोक दी गई हैं. रांची विवि ने भी नैक मूल्यांकन की तैयारियां शुरू कर दी थीं, जो फिलहाल रोक दी गयी है.

advt

मूल्यांकन के लिए करना होगा इंतजार:

जिन कॉलेजों का नैक मूल्यांकन अप्रैल में होना था, उन्हें अब स्थिति सामान्य होने तक इंतजार करना होगा. बिरसा कॉलेज खूंटी का पहली बार नैक मूल्यांकन होना है. इसके लिए नैक की टीम 19-20 अप्रैल को कॉलेज में भौतिक सत्यापन के लिए आनेवाली थी. पूरी तैयारी हो चुकी थी, पर अब इसे टाल दिया गया. अगली तिथि 24-25 मई की दी गयी है. संत पॉल्स कॉलेज, रांची में भी नैक मूल्यांकन की तैयारी थी. कई बैठकें हो चुकी थीं. समितियों का गठन किया जा चुका था. लेकिन, कोरोना के कारण पूरा कार्यक्रम बदलना पड़ा. अब नैक मूल्यांकन दिसंबर तक टल गया है. नैक मूल्यांकन की बात करें तो मारवाड़ी कॉलेज, गोस्सनर कॉलेज, संजय गांधी मेमोरियल कॉलेज का हाल ही में नैक मूल्यांकन हुआ है.

फंड मिलने में संशय:

यूजीसी की ओर से कॉलेजों और विवि को उनके डेवलपमेंट के लिए हर साल फंड देती है. इसके अतिरिक्त राज्य सरकार की ओर से भी फंड मिलते हैं. ये सभी फंड नैक मूल्यांकन में मिले गर्द पर निर्भर करता है. समय पर कॉलेजों का मूल्यांकन नहीं हो पाया तो मिलने वाले फंड पर असर पड़ेगा. यही वजह है कि कॉलेज भी जल्द से जल्द नैक मूल्यांकन करा लेना चाहते हैं.

इसे भी पढ़ें: चुनाव के बाद पेट्रोल-डीजल की कीमतों में आग, लगातार चौथे दिन भी दर में वृद्धि

 

Advertisement

Related Articles

Back to top button
%d bloggers like this: