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डॉक्टर हैरान- कोरोना पॉजिटिव मां के नवजातों को साथ रहने के बाद भी नहीं छू सका कोरोना

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  • कुल सात नवजात पॉजिटिव मां के साथ रहने के बाद भी नहीं हुए संक्रमित, नेगेटिव ही लौटे घर
  • गढ़वा में एक बच्चा अभी भी अपने पॉजिटिव मां के साथ अस्पताल में

Ranchi: राज्य में कोरोना महामारी से लोग परेशान हैं. झारखंड में कोरोना के मरीज मिलने की गति में कई गुणा तेजी आयी है. संक्रमण छूने से बढ़ जा रहा है. प्रशासन लोगों को सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करने को लेकर लगातार जागरुक कर रहा है. इसके बावजूद अब तक  झारखंड में आठ गर्भवती महिलाएं कोरोना पॉजिटिव मिल चुकी हैं. इनमें से कोई या तो प्रसव के पहले या कुछ प्रसव के बाद कोरोना पॉजिटिव निकलीं. जो इलाजरत थीं.

वहीं रांची और गढ़वा में गर्भवती कोरोना पॉजिटिव महिलाओं ने एक-एक बच्चे को जन्म भी दिया. लेकिन ताज्जुब की बात ये है कि मां के पॉजिटिव होते हुए भी उनके नवजात को कोरोना नहीं हुआ. जबकि कोरोना पॉजिटिव मां के साथ रहकर नवजात को संक्रमण का खतरा सबसे ज्यादा था.

जबकि सदर अस्पताल रांची में जिस महिला ने बच्चे को जन्म दिया था, उससे पांच नर्सें संक्रमित हो गयीं. पर नवजात को कुछ नहीं हुआ.

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दुधमुंहे बच्चे को कोरोना संक्रमण ना होने को लेकर डॉक्टर भी हैरान हैं. इस तथ्य से एक बार फिर यह समझ में आने लगा है कि कोरोना को लेकर वैज्ञानिकों और चिकित्साजगत पूरी तरह कुछ भी कहने में आश्वस्त नहीं हैं. हालांकि कुछ डॉक्टर इसे संक्रमित मां से शरीर में एंटी बॉडी का होना बता रहे हैं.

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डॉक्टर्स ने बतायी ये वजह 

इस बारे में डॉक्टरों ने बताया कि नवजात को संक्रमण का खतरा सबसे ज्यादा था. लेकिन बचाव की मुख्य वजह मां का दूध ही रहा. डॉक्टरों के अनुसार, मां पॉजिटिव थी और ऐसे में मां के अंदर एंटी बॉडिज खुद डेवलप हो गया था. जिसने बच्चों के लिए अमृत होने का काम किया.

कोरोना पॉजिटिव मां ठीक होने के बाद नवजात के साथ रिम्स से घर जाती हुई.

रांची में सदर अस्पताल से एक महिला प्रसव पॉजिटिव मिली थीं, जिसके बाद पांच नर्सों में संक्रमण पाया गया था. पर बच्चे को कुछ नहीं हुआ. इसके अलावा रिम्स के गाइनी वार्ड में दो बार महिला प्रसव के बाद पॉजिटिव मिली थी. इसके अलावा रिम्स में ही पॉजिटिव महिला का भी प्रसव कराया गया था. वहीं अनगढ़ा की एक महिला जुड़वां बच्चों को जन्म देने के बाद पॉजिटिव मिलीं थी.

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मां के नेगेटिव होने के बाद की गयी जांच

आईसीएमआर की गाइडलाइन के तहत नवजात बच्चों का तुरंत कोरोना जांच नहीं किया जा सकता था. मां के नेगेटिव आने के बाद ही बच्चों के सैंपल लिये गये थे. रिम्स में अबतक सात नवजात  अपनी पॉजिटिव मां के साथ रह रहे थे. आईसीएमआर की गाइडलाइन के तहत ही मां से बच्चों को अलग नहीं किया जा सकता था. मां को डॉक्टरों ने कैसे बच्चों के साथ सर्तकता बरतना है. कैसे उन्हें फीडिंग करानी है. इन सभी बातों की जानकारी दी गयी थी.

 

गर्भवती महिलाओं के लिए सरकार है सजग, ताकि न हो दिक्कत

लगातार गर्भवती महिलाओं के कोरोना पॉजिटिव मिलने के बाद सरकार सजग हुई है. राज्य सरकार ने कुल 51993 महिलाओं को चिन्हित किया है, जिनका प्रसव कराया जाना है. अंतिम समय में किसी को कोई दिक्कत ना हो इसके लिए हर एक सदर अस्पताल में ट्रूनेट मशीन लगायी जा रही है. ताकि उनमें संक्रमण का खतरा है या नहीं एक घंटे में पता चले. सरकारी आंकड़ों के हिसाब से सिर्फ अप्रैल महीने में 26800 महिलाओं की डिलिवरी करायी गयी है.

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