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कोरोना संकटः लगातार दूसरे साल सरहुल शोभायात्रा नहीं निकालेगी केन्द्रीय सरना समिति

Ranchi: कोरोना संकट को देखते हुए इस साल भी सरहुल शोभायात्रा नहीं निकाली जायेगी. गुरुवार को इस संबंध में सरना समितियों की बैठक में यह फैसला लिया गया. केन्द्रीय सरना समिति के तत्वाधान में विभिन्न सरना संगठनों और समाज के प्रमुख लोगों की बैठक केन्द्रीय सरना स्थल हातमा में हुई थी.

बैठक की अध्यक्षता केन्द्रीय अध्यक्ष बबलू मुण्डा ने की. इसमें सबों ने कोरोना संकट के बढ़ते खतरे को लेकर चिंता जतायी. सबों ने एक स्वर में फैसला लिया कि इस बार भी प्रकृति महापर्व सरहुल की शोभायात्रा नहीं निकाली जायेगी. इस वर्ष शोभायात्रा का यह 54वां वर्ष होता. वैश्विक महामारी कोरोना का सभी सरकार के साथ मिलकर डट कर सामना करेंगे. अनावश्यक भीड़ भाड़ से बचने का प्रयास होगा. मास्क और सेनेटाइजर का प्रयोग आवश्यक रूप से किया जाये. इन उपायों के साथ ही सुरक्षित तरीके से त्योहार मनाया जाये.

14 को खखड़ा और मछली पकड़ाई की होगी रस्म

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प्रधान पाहन जगलाल ने कहा कि 14 अप्रैल को चैत शुक्ल पक्ष द्वितीया को खखड़ा एवं मछली पकडाई की रस्म होगी. शाम 7 बजे परम्परागत रीति रिवाज से जल रखाई पूजा तथा 15 अप्रैल (चैत शुक्ल पक्ष तृतीय) को उपवास एवं पूजा पूर्वाह्न 10:00 से शुरू होगी. साथ ही 16 अप्रैल को फुलखोंसी (पुष्प अर्पण) सम्पन्न होगा. जगलाल ने सभी गांवों के पहानों से अपील की कि वे अपने सरना स्थलों में परम्परागत रीति रिवाज, विधि विधान एवं धार्मिक कर्मकाण्ड के अनुसार पूजा अर्चना करना सुनिश्चित करें.

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जे बाची से नाची को करें फॉलो

बबलू मुंडा ने कहा कि पद्श्री रामदयाल मुण्डा का चर्चित वक्तव्य है- ”जे नाची से बाची”. आज वैश्विक महामारी में स्थिति ठीक उलट हो गयी है. ”जे बाची से नाची’ ‘वाली स्थिति हो गई है. महापर्व सरहुल की विधि व्यवस्था सभी सरना स्थलों में जो सरकार की ओर से दी जाती है. हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी सरना स्थलो की साफ सफाई, पंडाल व लाईट की व्यवस्था वगैरह के लिए एक प्रतिनिधिमण्डल रांची डीसी को ज्ञापन सौंपेगा. मौके पर जनजाति सुरक्षा मंच के प्रदेश संयोजक संदीप उरांव, करम टोली सरना समिति के अध्यक्ष सुरज टोप्पो सहित कई अन्य भी मौजूद थे.

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