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कोरोना चैलेंज: मेडिकल स्टाफ और मैनपावर दूर करने में लगी सरकार, गांवों में संक्रमण रोकने को जनप्रतिनिधियों का भी लेगी साथ

केंद्रीय मंत्री, सांसदों, विधायकों से सरकार ने लिये महत्वपूर्ण सुझाव

Ranchi: झारखंड में अब तीसरी लहर के संभावित खतरे को देखते हुए राज्य सरकार ने अपनी तैयारी शुरू कर दी है. इसके लिए कोरोना पर सांसदों और विधायकों के सुझावों पर वह आगे की रणनीति बनाएगी.

सीएम हेमन्त सोरेन ने दक्षिणी छोटानागपुर तथा कोल्हान प्रमंडल के सांसदों और विधायकों के साथ कोविड-19 को लेकर वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से मंगलवार को विचार-विमर्श किया. मिले सुझावों पर अमल करने का भरोसा दिलाया.

कहा कि ग्रामीण इलाके में संक्रमण के प्रसार को रोकने के लिए सरकार लगातार प्रयास कर रही है. लोगों को कोरोना से बचाव औऱ टीकाकरण को लेकर जागरूक करने में जन प्रतिनिधियों को अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी.

सीएम ने कहा कि कोरोना की पहली लहर से हम सकारात्मक तरीके से निपटने में कामयाब रहे. दूसरी लहर से हम मुकाबला कर रहे हैं और अब तीसरी लहर के आने का भी खतरा मंडरा रहा है. ऐसे में अब इतना समय नहीं है कि कोरोना से जुड़े मुद्दों को नजरअंदाज करें.

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कोरोना को कैसे नियंत्रित किया जाए और संक्रमितों को समुचित व बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं दी जाए, इसे लेकर राज्य सरकार पूरी ताकत के साथ काम कर रही है.

मौके पर केंद्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा, सांसद विद्युत वरण महतो, सुदर्शन भगत, गीता कोड़ा, संजय सेठ, राज्यसभा सदस्य महेश पोद्दार, दीपक प्रकाश, धीरज साहू, समीर उरांव के अलावा मंत्री चंपई सोरेन और मंत्री श्रीमती जोबा मांझी, विधायक रामदास सोरेन, संजीव सरदार, मंगल कालिंदी, दीपक बिरुआ, नीरल पूर्ति, सुखराम उरांव, दशरथ गागराई, सोनाराम सिंकू, सरयू राय, सविता महतो, विकास कुमार मुंडा, राजेश कच्छप, भूषण बाड़ा, नमन विक्सल कोनगाड़ी, कोचे मुंडा, नीलकंठ सिंह मुंडा, सीपी सिंह, समरी लाल, सुदेश महतो और बंधु तिर्की ने कोरोना संक्रमण की रोकथाम और बचाव को लेकर अपने अहम सुझाव दिए.

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अन्य राज्यों की जरूरतों को भी पूरा कर रहा झारखंड

सीएम ने कहा कि कोरोना महामारी के इस दौर में देश और मानव हित में झारखंड अपनी जरूरतों के साथ अन्य राज्यों की जरूरतों को भी पूरा करने का प्रयास कर रहा है. झारखंड देश को बड़े पैमाने पर लगभग 600 मीट्रिक टन ऑक्सीजन की आपूर्ति कर रहा है.

कोरोना से जंग में जरूरी संसाधनों की किसी राज्य को कमी नहीं हो, यह हमारी सरकार की विशेष प्राथमिकता रही है. हमारे पास जो भी संसाधन उपलब्ध होंगे, दूसरों को उनकी जरूरत के हिसाब से उपलब्ध कराएंगे.

ग्रामीण इलाके में कोरोना को लेकर दवाईयों की कोई किल्लत नहीं होने दी जाएगी. सरकार आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से कोरोना मेडिकल किट को लोगों तक पहुंचाने का निर्देश दे चुकी है. अबतक 45 हजार से ज्यादा कोरोना मेडिकल किट का वितरण किया जा चुका है.

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300 एक्स आर्मी मैन कोरोना वॉरियर्स के रूप में देंगे सेवा

सीएम के मुताबिक सैनिक कल्याण बोर्ड के द्वारा उन्हें बताया गया है कि कोविड-19 से निपटने की दिशा में वे सरकार को हरसंभव मदद को तैयार हैं. इस सिलसिले में 300 एक्स आर्मी मैन कोरोना वॉरियर्स के रूप में अपनी सेवा देंगे.

इस महामारी ने पूरे देश में स्वास्थ्य से जुड़े इंफ्रास्ट्रक्चर की जरूरतों को अवगत करा दिया है. अस्पतालों में चिकित्सकों, नर्सों, पारा मेडिकल कर्मी और अन्य मैन पावर की कमी से सरकार अवगत है.

इस दिशा में अगर कोई अवकाश प्राप्त चिकित्सक या अन्य कर्मी अपनी सेवा देने को इच्छुक हैं, तो वे इसकी जानकारी दें. सरकार इस दिशा में उनकी सेवा लेने के लिए जरूरी पहल करेगी. उन्होंने सांसदों और विधायकों से भी कहा कि अगर उनके संपर्क में ऐसे मैन पावर हैं, तो इसकी जानकारी स्वास्थ्य विभाग को उपलब्ध कराएं.

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बेड, आईसीयू और वेंटिलेटर्स समेत अन्य चिकित्सीय संसाधन बढ़ाने का प्रयास लगातार जारी

कोरोना के शुरुआती दिनों में राज्य में मात्र सौ ऑक्सीजनयुक्त बेड थे, लेकिन आज इसकी संख्या बढ़कर 10 हजार से ज्यादा हो चुकी है. बेडों की संख्या निरंतर बढ़ रही है. इसके अलावा आईसीयू बेड तथा वेंटिलेटर्स की संख्या में भी इजाफा हुआ है.

वेंटिलेटर्स इंस्ट़ॉल करने के लिए दक्ष तकनीशियन की जरूरत है, लेकिन इनकी संख्या कम है. इस वजह से कई अस्पतालों में वेंटिलेटर्स को इंस्टॉल नहीं किया जा सकता है. सरकार इस दिशा में भी गंभीरता से विचार कर रही है.

लोग वेंटिलेटर तक नहीं पहुंचें, इससे पहले ही वे स्वस्थ होकर अपने घर चले जाएं, यह सरकार की विशेष प्राथमिकता है. राज्य के सभी सदर अस्पतालों में पीएसए लगाने के निर्देश दिए जा चुके हैं. यहां जेनरेटर की भी व्यवस्था होगी. इस दिशा में स्वास्थ्य विभाग द्वारा पहल शुरू कर दी गई है.

सीएम ने यह भी बताया कि ऑक्सीजन सिलेंडर की भी पर्याप्त व्यवस्था कर ली गई है. कोविड सर्किट के माध्यम से ऑक्सीजनयुक्त बेड और संजीवनी वाहन के जरिए ऑक्सीजन सिलेंडर अस्पतालों को इमरजेंसी में उपलब्ध कराया जा रहा है.

ऑक्सीजन फ्लोमीटर की किल्लत से निपटने की दिशा में सरकार को सार्थक सफलता मिली है. इंडो डेनिश टूल रूम ने फ्लोमीटर का डिजाइन तैयार कर लिया है. जल्द ही इसका उत्पादन भी शुरू हो जाएगा. इसके बाद फ्लोमीटर की उपलब्धता को लेकर किसी को परेशानी नहीं होगी.

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