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Corona : 80% लोगों ने टाल दी शादियां, गांव से शहर तक रोजगार पर पड़ा असर

Asansol : पश्चिम बर्दवान जिले में डाक्टर श्री शाही की लड़की की शादी जून माह में होनी थी. कोरोना महामारी के दौर में शादी टाल दी गयी. यह एक बानगी मात्र है, इस तरह से अस्सी प्रतिशत से अधिक शादियां टाल दी गयीं, जो हुईं भी, उसमें खर्च न के बराबर. इसका परिणाम रहा कि अनुमानत: आसनसोल में गेस्ट हाउस, टेंट, कैटरर्स, बैंड बाजा, पुरोहित आदि इससे जुड़े ढाई लाख से अधिक लोगों की रोजी-रोटी छिन गयी.

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गांवों में बैंड-बाजावालों ने शुरू कर दी मजदूरी, शहर में ज्यादा परेशानी

जिले में ही आठ से अधिक बैंड बाजा पार्टियां थीं लेकिन पूरा का पूरा कार्य बंद पड़ा है. बैंड मास्टर खलील का कहना है कि सिर्फ अप्रैल, मई और जून में ही तीस बुकिंग थी लेकिन अब सब कैंसिल हो गयी. अब तो सभी कलाकार गेहूं कटाई आदि के काम में जुटे हुए हैं. सरकार का मनरेगा भी सहारा बना हुआ है. किसी तरह साल गुजर जाये, बस यही कामना है.

बैंड बाजा संचालक रामपति का कहना है कि इससे 70 हजार से अधिक लोगों के पास कोई काम नहीं रह गया है. एक बैंड बाजा से औसतन 30 लोगों को काम मिलता है. वहीं शहर के रमापति का कहना है कि यहां तो अब यह भी समझ में नहीं आ रहा है कि आगे करें क्या.

कैंटरर्स से जुड़े लोग लगा रहे सब्जी की फेरी

कैटरर्स व्यापारी एसोसिएशन के अनुसार पश्चिम बर्दवान में ही 2100 से अधिक टेंट कारोबारी दो माह से बेकार बैठे हैं. वर्तमान में इससे जुड़े लगभग 62,000 कामगार बेरोजगार हो गये हैं. जो कल तक कारीगर थे, वे आज सब्जी बेच रहे हैं. फेरी लगा कर रोजी-रोटी का जुगाड़ कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि लगन में कम से कम घरातियों व बरातियों की संख्या 50 से बढ़ा कर दो सौ कर दी जाती है तो सब ठीक हो जायेगा. अभी तो जो शादियां भी हो रही हैं, उसमें वर-वधु पक्ष के रिश्तेदार ही शामिल नहीं हो पा रहे हैं. कैटरर्स व्यापारी राम बदन बताते हैं कि शादी समारोहों में 50 लोगों के ही शामिल होने की शर्त से कैटरिंग से जुड़े लगभग सवा लाख लोगों पर असर पड़ा है. इनमें मालिक, कारीगर, मजदूर सब शामिल हैं. मुदित के अनुसार 500 बरातियों के खाने की एक बुकिंग पर कम से कम 50 लोगों को रोजगार मिलता था, जो अब बंद है.

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मैरिज लॉन के मालिक कहां से दें कर्मियों का वेतन

एक गेस्ट हाउस से जुड़े शिव कुमार के अनुसार सिर्फ पश्चिम बर्दवान में 2500 से अधिक गेस्ट हाउस, मैरिज लॉन हैं. इनसे हजारों परिवारों की रोटी चलती है. एक गेस्ट हाउस में एक मैनेजर, 2 गार्ड, दो स्वीपर, एक केयरटेकर और एक इलेक्ट्रिशियन तो रहता ही रहता है. इस समय कोई वैवाहिक कार्यक्रम नहीं होने से सबसे बड़ा संकट कर्मचारियों को वेतन देने का है. आखिर हम उन्हें वेतन कहां से देंगे.

सबसे ज्यादा परेशानी पुरोहित की, उसे सरकारी सहायता भी नहीं

उधर शादी में पुरोहित का काम करने वाले मुनेन्द्र उपाध्याय का कहना है कि एक शादी का मतलब होता है 10 पुरोहित सहित कम से कम 20 शिष्य (सामान वगैरह ढोने वाले नौकर) और यह सब कुछ बेकार चला गया. अधिकांश लोगों ने तो शादियां ही कुछ दिन के लिए टाल दीं. जिनकी हो भी रही है, उनके यहां कुल 50 की संख्या की लिमिट ने सबको बेरोजगार कर दिया है. दूसरे लोग तो अन्य धंधा भी कर सकते हैं, आखिर पुरोहित कहां जायेंगे. अपनी शान के कारण दूसरी जगह मांग भी नहीं सकते. सरकार का जोर सिर्फ मजदूरों पर है. वे तो मनरेगा की मजदूरी भी कर लेंगे लेकिन पुरोहितों के पास तो अकाल जैसी स्थिति हो गयी है.

अनुमति लेना भी है कठिन काम

शादी समारोह के आयोजन की अनुमति के लिए कलेक्ट्रेट तक की दौड़ ने भी लोगों को परेशान किया है. इस कोरोना काल में सर्वाधिक परेशानी अस्पताल या उच्च अधिकारियों के यहां जाने में है और एक शादी के लिए पांच बार चक्कर लगाने पर ही अनुमति मिल पाती है. वह भी कई प्रतिबंधों के साथ. इस कारण अधिकांश लोगों ने शादियों की तिथि टाल दी.

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