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‘दो वर्षों से सहकारिता बैंक ने गरीबों व किसानों को नहीं दिया कर्ज’

Ranchi: पिछले कई वर्षों से सहकारिता (कोऑपरेटिव) बैंक लगातार किसी ना किसी अनियमता को लेकर सुर्खियों में रहा है. इस बार फिर एक नयी दास्तां बैंक के साथ जुड़ती नजर आ रही है.

सहकारिता बैंक को खासकर गरीबों व किसानों के लिए बनाया गया है, जहां जरूरतमंद कृषकों व कृषक संस्थानों को सस्ते दर पर कर्ज देकर उनकी मदद करना मुख्य लक्ष्य है. लेकिन पिछले दो वर्षों में इस बैंक से किसी भी किसानों को एक रुपये का लोन तक नहीं मिल पाया है. इस बात की पुष्टि खुद सहकारिता अध्ययन मंडल के प्रदेश अध्यक्ष बिजय कुमार सिंह ने की है.

बिजय कुमार सिंहभूम सेंट्रल कोऑपरेटिव बैंक के निदेशक भी रह चुके हैं. उन्होंने सहकारिता बैंक पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि बैंक बिना रिश्वत लिए लोन नहीं देती है और गरीब किसानों के पास इतना पैसा नहीं है कि वे रिश्वत देकर लोन ले सकें.

बैंक ने सारे आरोप गलत बताए

बैंक ने लगाए गए आरोपों का खंडन किया है. बैंक के सहायक महाप्रबंधक एच पांडेय ने बताया कि इन आरोपों में कोई सच्चाई नहीं है. लगातार किसानों को लोन दिए जा रहे हैं. अभी हाल में भी कई एजुकेशन लोन दिए गए हैं. हालांकि कितने किसानों को लोन दिया गया है इस पर बैंक की ओर से कोई सूची जारी नहीं की गई है.

एजुकेशन लोन देने के नाम पर एनजीओ से कमीशन लेने का आरोप

सहकारिता बैंक ने पिछले साल अगस्त से लेकर मार्च तक सिर्फ एजुकेशन लोन दिए गए हैं. इन आठ माह में करीब 1500 लोगों को लोन दिया गया है. पूर्व निदेशक ने सभी लोन लेने वाले लाभुकों की सूची जारी कर आरोप लगाया है कि एजुकेशन लोन के नाम पर अधिकतर बच्चों को दिये जाने वाले लोन कोलकाता की एक एनजीओ को दिया जाता है, जबकि इसके लिए बैंक अधिकारियों को मोटी कमीशन मिलती है.

अगर किसानों को लोन मिला होता तो कर्ज माफी में मिलती राहत

पिछले दो वर्षों में किसानों को अगर लोन मिला होता तो आज उन्हें कर्ज माफी में बड़ी राहत मिल सकती थी. किसानों का करीब एक लाख रुपए का कर्ज माफ हो सकता था. बिजय कुमार ने कर्ज माफी पर कहा कि सहकारिता बैंक जो किसानों के लिए ही बनी है उसके अस्तित्व पर ही अब खतरा मंडरा रहा है, जिसे समय रहते ठीक करने की जरूरत आ पड़ी हैय बैंक हमेशा ही घोटालों को लेकर बदनाम रहा है, लेकिन पुरानी गलती से कभी भी सुधरने के रास्ते पर नहीं आया.

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