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ईसाई से ज्यादा हिंदू धर्म में हुआ है आदिवासियों का धर्मांतरण

गृह विभाग और जनसंख्या निदेशालय से प्राप्त आरटीआई से प्राप्त जानकारी से खुलासा

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Adv. Dipti Horo (RTI Activist)

Ranchi: राज्य में आदिवासियों के धर्मांतरण मामले में आरटीआई से बड़ा खुलासा हुआ है. राज्य में अल्पसंख्यक ईसाई समुदाय को टारगेट कर आये दिन धर्मांतरण का झूठा आरोप भाजपा और अन्य अतिवादी हिंदू संगठन और सरकार पोषित सरना संगठनों के द्वारा लगाया जाता है. राज्य में आदिवासियों की 86 लाख से ज्यादा आबादी निवास करती है. इनमें अधिकतर आदिवासी सरना धर्म कोड की वकालत करते हैं. इसके बाद सबसे ज्यादा आदिवासियों का धर्मांतरण हुआ है, तो हिंदू धर्म में हुआ है. जबकि ईसाई बने आदिवासियों की जनसंख्या बहुत ही कम रूप में वृद्धि हुई है. इन आकड़ों व सूचना से धर्म के नाम पर राजनीति करने वालों को शायद ही आगामी चुनाव में ईसाई बनाम सरना करने का मौका नहीं मिल पायेगा और धर्मांतरण कार्ड का मुद्दा धरासायी हो जाएगी.

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झारखंड सरकार के गृह विभाग के पास मांगी गयी सूचना के अधिकार कानून के तहत मिली जानकारी के अनुसार यदि आवेदक के रीति-रिवाज, विवाह और उत्तराधिकारी प्रथा-धर्म आधारित जाति निर्धारण हुई तो झारखंड के आदिवासी आधे से कम हो जाएंगे, क्योंकि पूरे राज्य में आदिवासियों की कुल आबादी 86 लाख से ज्यादा है. इसमें सिर्फ 40,12,622 लोग ही प्रकृति धर्म-सरना धर्म मानते हैं. जबकि 25,971 लोग किसी भी धर्म को मानने की किसी भी श्रेणी के पक्षधर नहीं हैं. इन लोगों को छोड़ 46,06,449 अन्य कोड मिले धर्म को मानते हैं या धर्मांतरित की श्रेणी में आते हैं. ऐसे लोग आदिवासी के आरक्षण की सूची से बाहर आ जाएंगे. यदि सरकार द्वारा नए प्रावधानों-नियमों के अनुसार जाति का निर्धारण करती है तो आदिवासी की बड़ी आबादी आदिवासी की श्रेणी में नहीं आएंगे, चाहे वह ईसाई धर्मांतरित आदिवासी हो या हिंदू, मुस्लिम, सिख, बौद्ध व अन्य हो.

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सरकार ने बनाया है धर्म को ले नया नियम, बढ़ेगी परेशानी

झारखंड में अब सरकार नये सिरे से जाति निर्धारण पर विचार कर रही है. इसमें धर्मांतरण करने वाले आदिवासियों को जाति प्रमाण पत्र नहीं मिलेगा. क्योंकि, अब जाति का निर्धारण खतियान के आधार पर न होकर तीन बिंदुओं की जांच के बाद ही कार्मिक विभाग द्वारा संबंधित सर्कुलर करने के बाद ही अनुसूचित जनजाति का प्रमाण पत्र और लाभ मिल पाएगा. इसमें आवेदक के रि‍ति, रिवाज, विवाह और उत्तराधिकारी की प्रथा की जांच की जाएगी. दूसरी समस्या वैसे आदिवासियों को आएंगी. जो कारण वश, रोजगार, शिक्षा व अन्य कारण से अपने सामाजिक, सांस्कृतिक और पारंपरिक परिवेश से दूर हो गए है. साथ ही अन्य प्रतिष्ठ धर्म-संस्कृति के संपर्क में आकर अपनी रुढ़िवादी परंपरा, रहन-सहन से दूर हो गये हैं. यदि सरकार ईसाई बने आदिवासियों पर धर्म को लेकर जाति प्रमाण पत्र देने का शिकंजा कसते है तो बाद में हिंदू व अन्य धर्म अपनाये आदिवासियों पर सवाल उठाना शुरू हो जाएगा और कभी न कभी कोर्ट का भी दरवाजा खटखटाया जाएगा.

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सरकार से प्राप्त सूचना के अनुसार शहरी क्षेत्रों की अपेक्षा ग्रामीण क्षेत्रों में ज्यादा लोग अन्य धर्मों के अनुयायी है. ग्रामीण क्षेत्रों में 78, 68, 150 आदिवासी हैं. जहां 36, 77, 722 लोग अन्य धर्म (सरना) धर्म और 23, 895 लोग कोई धर्म को मानने वाले नहीं हैं. इसके विपरित 29, 91, 688 हिंदू धर्म, 11,55,881 लोग ईसाई धर्म और 15, 195 आदिवासी मुस्लिम धर्म मानने वाले हैं. दूसरी ओर शहरी क्षेत्र में रहने वाले आदिवासियों की जनसंख्या 7,76,892 हैं. इसमें सरना या अन्य धर्म मानने वालों की संख्या 3,34,900 है. इसके विपरित हिंदू धर्म मानने वालों की संख्या 2,54,170, ईसाई धर्म मानने वालों की जनसंख्या 1,82,294 है. जबकि 2,912 आदिवासी मुस्लिम धर्म दर्ज करवाया है.

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झारखंड में आदिवासियों की जनसंख्या

– कुल जनसंख्या : 86,45,042

– पुरुषों की संख्या : 43,15,407

– महिलाओं की संख्या : 43,29,635

(सरना कोड) मानने वाले आदिवासी: 40,12,622

हिंदू धर्म मानने वाले आदिवासी: 32,45,856

ईसाई धर्म मानने वाले आदिवासी: 13,38,175

किसी धर्म को नहीं मानने वाले आदिवासी: 25,971

मुस्लिम धर्म मानने वाले आदिवासी: 18,107

बौद्ध धर्म वाले आदिवासी: 2,946

सिख धर्म मानने वाले आदिवासी: 984

जैन धर्म मानने वाले आदिवासी: 381

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