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38 हजार करोड़ सर्विस टैक्स पर केंद्र और 13 बैंकों में खींचतान, दिल्ली हाइकोर्ट पहुंचा मामला

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New Delhi: देश के 13 बैंकों ने केंद्र सरकार के खिलाफ दिल्ली हाइकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है. बैंकों ने केंद्र सरकार पर सर्विस टैक्स को लेकर मनमाना रवैया अपनाने का आरोप लगाया है.

और अपनी अपील में उस मांग का विरोध किया है जिसमें सरकार ने बैंकों से 38,000 करोड़ रुपये के सर्विस टैक्स देने को कहा है.

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बैंकों का दावा है कि, बैंकों से उन पर लगाये गये जुर्माने को कई गुना करके संबंधित बैंकों के पास रखे गए खातों से वसूल किया जा रहा है.

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13 बैंकों ने एकसाथ दायर की याचिका

कोर्ट जानेवाले इन बैंकों में भारतीय स्टेट बैंक, पंजाब नेशनल बैंक, यस बैंक, एचडीएफसी, हांगकांग और शंघाई जैसे बैंक शामिल हैं. 13 बैंकों ने एकसाथ मिलकर केंद्र के खिलाफ याचिका दायर की है.

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जिसपर न्यायमूर्ति एस मुरलीधर और न्यायमूर्ति तलवंत सिंह की बेंच ने सुनवाई की.  मामले की सुनवाई के बाद कोर्ट ने केंद्र सरकार, सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्सेज, गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स काउंसिल और अन्य अथॉरिटीज को नोटिस जारी कर इस पर जवाब मांगा है. मामले की अगली सुनवाई 14 नवंबर को होगी.

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क्या है सर्विस टैक्स

उल्लेखनीय है कि सर्विस टैक्स ग्राहकों के बचत और चालू खातों में न्यूनतम औसत बैलेंस (एमएबी) और न्यूनतम मासिक बैलेंस (एएमबी) और औसत त्रैमासिक बैलेंस (एक्यूबी) में निर्धारित बैलेंस न रखने के लिए वसूला जा रहा है.

याचिकाकर्ताओं ने इस फैसले को धारा 66 E(e) की संवैधानिकता का उल्लंघन करार दिया है. उन्होंने इसे “अस्पष्ट और मनमाना” फैसला करार देते हुए चुनौती दी है.

सरकार के इस फैसले से एचडीएफसी बैंक पर सबसे ज्यादा 18,000 करोड़ रुपये की पेनल्टी का बोझ बढ़ेगा.

बैंकों का मानना है कि सरकार के इस फैसले का ग्राहकों पर भी प्रभाव पड़ रहा है. गौरतलब है कि मद्रास हाइकोर्ट में भी इसी तरह की याचिका दायर की गई है. जहां तीन बैंकों ने मिलकर मदुरई बेंच के समक्ष अपील की है.

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