JharkhandLead NewsNEWSRanchiTOP SLIDER

रांची नगर निगम की 298 योजनाओं पर विवाद, जानिए मेयर आशा लकड़ा और सचिव विनय चौबे का पक्ष

Nikhil Kumar

Ranchi: रांची नगर निगम की 298 योजनाओं पर विवाद खड़ा हो गया है. मेयर आशा लकड़ा का कहना है कि उनकी जानकारी और मंजूरी के बगैर नगर निगम के अफसरों और नगर विकास विभाग के सचिव ने ये योजनाएं लाईं. इनपर कुल 5,77,64,12,145 रुपए खर्च किए गए और अब इनपर घटनोत्तर स्वीकृति के लिए उनपर दबाव बनाया जा रहा है. मेयर का यह भी आरोप है कि चूंकि वह एसटी समुदाय से आती हैं और महिला हैं, इसलिए उनपर यह दबाव बनाया जा रहा है. इसे लेकर उन्होंने राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग में शिकायत की थी. आयोग ने अब नगर विकास विभाग के सचिव से इसपर एक्शन टेकेन रिपोर्ट मांगी है. इसके पूर्व मेयर की शिकायतों पर सचिव ने अपना पक्ष रखा और उसपर मेयर ने भी प्रति उत्तर दिया. इस पूरे विवाद को समझने और मेयर एवं नगर विकास सचिव विनय कुमार चौबे, दोनों के पक्ष इस प्रकार हैं.

इसे भी पढ़ें: रांची नगर निगम की 298 योजनाओं का मामला: मेयर आशा लकड़ा की शिकायतों पर एसटी आयोग ने नगर विकास सचिव से 15 दिन में मांगी एक्शन टेकेन रिपोर्ट

 

जानिए, क्या हैं मेयर की शिकायतें, सचिव का उत्तर और मेयर का प्रतिउत्तर

 

मेयर की शिकायत : झारखंड सरकार के नगर विकास सचिव रांची के तत्कालीन नगर आयुक्त को उनके गलत कार्यों के लिए बचाने का प्रयास लगातार कर रहे हैं. उन्होंने 15 वें वित्त आयोग से आवंटित राशि के तहत कई योजनाओं पर रांची नगर निगम परिषद से स्वीकृति लिए बिना ही प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान कर दी. यह झारखंड नगरपालिका अधिनियम 2001 का उल्लंघन है. नगर विकास विभाग के सचिव ने कुल 298 योजनाओं को प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान की थी. अब इन योजनाओं पर घटनोत्तर स्वीकृति के लिए मुझ पर दवाब बनाया जा रहा है, जबकि मुझे इन योजनाओं की कोई जानकारी ही नहीं है. नियमतः योजनाओं पर नगर निगम परिषद की स्वीकृति के बाद नगर विकास विभाग विभाग द्वारा प्रशासनिक स्वीकृति प्राप्त की जाती है, परंतु ऐसा नहीं किया गया है.

 

मेयर के आरोप पर सचिव विनय चौबे का उत्तर:  वार्ड पार्षदों द्वारा लिखित, मौखिक अनुरोध के आलोक में नगर आयुक्त के निर्देशनासार अभियंत्रण शाखा द्वारा योजना तैयार की गई. सक्षम प्राधिकार से तकनीकी स्वीकृति प्राप्त करते हुए अग्रेतर कार्रवाई के लिए नगर आयुक्त के पास फाइल पुटअप की गई. नगर आयुक्त द्वारा अलग-अलग तिथियों में प्रशासनिक स्वीकृति एवं राशि आवंटन के लिए विभाग को पत्र प्रेषित किया गया था.

 

सचिव के जवाब पर मेयर का प्रति उत्तर:  झारखंड नगरपालिका अधिनियम-2011 की धारा-31 एवं विभागीय अधिसूचना-संख्या-1255 दिनांक 05 अप्रैल 2022 के द्वारा कार्य संचालन का अधिकार पीठासीन पदाधिकारी महापौर को है. वार्ड पार्षदों के लिखित, मौखिक अनुरोध से योजनाओं का क्रियान्वयन नहीं किया जा सकता है. नियमानुसार इन योजनाओं को निगम परिषद में लाकर ही निष्पादित किया जा सकता है. ध्यान देने वाली बात है कि अधोहस्ताक्षरी (मेयर) को इन योजनाओं के संबंध में कोई जानकारी नहीं दी गयी.

 

सचिव का जवाब: कोविड-19 के कारण उत्पन्न हालात में रांची नगर निगम परिषद की बैठक प्रत्येक माह संपन्न नहीं हुई. ज्यादातर कर्मी एवं  पदाधिकारी कोविड पॉजिटिव थे. 30 सितंबर 2021 के बाद निगम परिषद की बैठक नहीं हुई. इस कारण योजनाओं पर समय पर निगम परिषद की स्वीकृति प्राप्त नहीं की जा सकी. विभाग से प्रशासनिक स्वीकृति प्राप्त योजनाओं पर माह मार्च 2022 में होने वाली निगम परिषद की संभावित बैठक में घटनोत्तर स्वीकृति के लिए प्रस्ताव लाने के लिए उपस्थापित किया गया था, किंतु उक्त प्रस्ताव पर महापौर डॉ.आशा लकड़ा की आपत्ति के कारण निगम परिषद की स्वीकृति प्राप्त नहीं की जा सकी.

 

मेयर का पक्ष:  सचिव विनय कुमार चौबे की ओर से यह कहा जाना कि दिनांक 30 सितंबर 2021 के बाद निगम परिषद की बैठक नहीं होने के कारण ही योजनाओं पर समय पर निगम परिषद की स्वीकृति प्राप्त नहीं की जा सकी, जबकि वास्तविकता यह है कि कोविड काल में भी लगातार नगर परिषद की बैठक आयोजित की जाती रही. 2021 में 24 फरवरी, 25 व 27 मार्च, आठ जुलाई 2021, 27 व 30 सितंबर और 13 दिसंबर को नगर निगम परिषद की बैठकें आयोजित हुई थीं. इसी तरह  2022 में 22 जनवरी, 27 फरवरी, 29 मई व 22 जून को नगर निगम परिषद की बैठकें संपन्न हुई थीं. आपात स्थिति में वर्चुअल माध्यम से भी रांची नगर निगम परिषद की बैठक आहूत कर योजनाओं पर स्वीकृति ली जा सकती है. सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि कोविड के समय लोग अपने घरों से नहीं निकल रहे थे. उस समय तत्कालीन नगर आयुक्त् और विभागीय सचिव ने नियम ताक पर रखकर 5,77,64,12,145 रुपये की राशि की लागत से कुल 298 योजनाओं को निष्पादित भी कर दिया. मैं आदिवासी समाज से आने वाली महिला हूं. इसलिए अब संबंधित अधिकारी इन योजनाओं पर घटनोत्तर स्वीकृति प्रदान करने के लिए दबाव बना रहे हैं.

 

पुनः सचिव का जवाब:  महापौर के कार्यकाल में पहले की योजनाओं पर आवश्यकतानुसार निगम परिषद की घटनोत्तर स्वीकृति प्राप्त की जाती रही है. निगम परिषद के किसी भी सदस्य दवारा आपत्ति नहीं की गयी है.

 

पुनः मेयर का जवाबः पूर्व में जिन योजनाओं की घटनोत्तर स्वीकृति दी गयी है, वे जनप्रतिनधियों के मद राशि से संबंधित रही होगी या आपात स्थिति में कराये गये कार्यों से संबंधित योजनाएं होंगी.

 

पुनः विनय चौबे का जवाबः कोविड काल में निगम परिषद की आहूत ज्यादातर बैठक आपात बैठक, साफ-सफाई एवं पेयजल आपूर्ति को लेकर की गयी है. इन बैठकों में अभियंत्रण शाखा की योजनाओं को शामिल नहीं किया गया था.

 

पुनः मेयर का जवाबः झारखंड नगरपालिका अधिनियम की धारा-75 एवं 76 के तहत या नगर आयुक्त नगरपालिका के संचिव होने के नाते अभियंत्रण शाखा से योजनाओं की सूची तैयार कर पीठासीन पदाधिकारी महापौर को संचिका भेज कर उपस्थापित करने के लिए आग्रह कर सकते हैं, परंतु ऐसा नहीं किया गया.

 

पुनः सचिव का उत्तर: रांची नगर निगम द्वारा पूर्व में वर्चुअल माध्यम से एक ही बार बैठक आहूत की गयी थी, जिसमें ज्यादातर पार्षदों द्वारा भाग लेने से मना कर दिया गया था. इस कारण वर्चुअल माध्यम से बैठक आहूत कर योजनाओं पर स्वीकृति प्राप्त नहीं की जा सकी.

 

पुनः मेयर का जवाब:  देशभर में कोविड काल के दौरान वर्चुअल माध्यम से कार्यो का निष्पादन किया जा रहा था. कोविड काल में ऐसी कौन से आपात स्थिति उत्पन्न हुई थी, जिसके कारण नियम-कानून की अनदेखी की गयी. साथ ही मेयर को भी इसकी जानकारी देना उचित नहीं समझा गया.

 

पुनः सचिव का उत्तरः उपरोक्त परिप्रेक्ष्य में रांची नगर निगम में वार्ड पार्षदों, जनप्रतिनिधियों, जो रांची नगर निगम परिषद ,वार्ड के सदस्य भी हैं, के द्वारा कभी प्रश्नगत योजनाओं पर आपत्ति नहीं की गयी है. बल्कि उनके द्वारा महापौर से अभियंत्रण शाखा द्वारा प्रेषित योजनाओं एवं अन्य प्रस्ताव को निगम परिषद की बैठक में लाने के लिए अनुरोध किया गया है, ताकि प्रेषित योजनाओं एवं प्रस्ताव को निगम परिषद की घटनोत्तर स्वीकृति प्रदान की जा सके.

 

पुनः मेयर का उत्तर:  निगम परिषद का पीठासीन पदाधिकारी होने के नाते अधिनियम संगत कार्य करना मेयर का दायित्व है. जिन योजनाओं के संबंध में मेयर को जानकारी नहीं है, उन योजनाओं की किस आधार पर घटनोत्तर स्वीकृति प्रदान की जाए. विभागीय सचिव विनय कुमार चौबे को दिनांक 19 फरवरी  एवं 25 अगस्त 2022 को पत्र लिखकर मार्गदर्शन की मांग की गयी थी, परंतु अब तक कोई जानकारी नहीं दी गयी

Related Articles

Back to top button