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अनुंबध महासंघ की मांग: नये मंत्रिमंडल में बादल पत्रलेख को करें शामिल

  • 2016 में बादल पत्रलेख ने बनाया दबाव तो कई पारा मेडिकलकर्मी हुए नियमित
  • दो साल बाद 2016 में पत्रलेख ने एमपीडब्लयू को फिर से सेवा बहाल करने में सफल रहे

Ranchi : राज्य के लगभग तीन लाख अनुबंध कर्मचारियों की मांग है कि जरमुंडी विधायक बादल पत्रलेख को मंत्रिमंडल में शामिल किया जाये. झारखंड अनुबंध कर्मचारी महासंघ झारखंड प्रदेश की ओर से भी यह मांग की जा रही है कि बादल पत्रलेख को मंत्रिमंडल में शामिल किया जाये.

इस संबध में राज्य के कई अनुबंध कर्मचारी ट्वीटर और फेसबुक के जरिये मांग कर रहे हैं. महासंघ के संयोजक श्रीकांत श्रीवास्तव ने कहा कि बादल पत्रलेख ने पिछले कार्यकाल में कई बार अनुबंध कर्मचारियों की मांगों का समर्थन दिया.

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इतना ही नहीं कई बार उन्होंने अनुबंध कर्मचारियों की सेवा समाप्त करने का भी विरोध करते हुए इन्हें वापस काम में रखने का दबाव बनाया. श्रीकांत ने कहा कि बादल पत्रलेख की ही देन है कि साल 2016 में कुछ पारा मेडिकल कर्मियों को सरकार ने नियमित किया.

क्योंकि वे लगातार अनुबंध कर्मचारियों की मांगों के हित में खड़े रहे. श्रीकांत ने कहा कि राज्य में अनुबंध कर्मचारियों की संख्या लगभग तीन लाख है, जिनके लिए बादल पत्रलेख हमेशा आवाज उठाते हैं. ऐसे में अनुबंध कर्मचारियों की मांग है कि नयी सरकार उन्हें मंत्रीमंडल में शामिल करें.

दो साल बाद एमपीडब्लयू को फिर से बहाल किया गया

श्रीकांत ने बताया कि साल 2014 में स्वास्थ्य विभाग के अंतर्गत काम करने वाले एमपीडब्लयू को तत्कालीन सरकार ने सेवा मुक्त कर दिया था. इसके बाद राज्य में नयी सरकार बनी, बादल पत्रलेख भी तब जरमुंडी से विधानसभा में आयें. विधानसभा में बार-बार इन्होंने एमपीडब्ल्यू को सेवा बहाल करने की मांग की. जिसके बाद साल 2016 में इन्हें वापस काम पर रखा गया.

श्रीकांत ने बताया कि पत्रलेख ऐसे विधायक रहे, जो 1800 एमपीडब्लयू के आंदोलन के दौरान रात-रात भर उनके साथ आंदोलन स्थल पर रहे. ऐसे में उनका मंत्रिमंडल में शामिल होना जरूरी है.

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राज्य में नहीं समायोजन नीति, बादल बना रहे थे दबाव

वहीं महासंघ के अध्यक्ष विक्रांत ज्योति ने कहा कि साल 2016 से बादल पत्रलेख अनुबंध कर्मचारियों के लिए समायोजन की नीति की मांग कर रहे हैं. दूसरी बार विधायक बनने से संभव है कि पत्रलेख समायोजन नीति बना दें.

क्योंकि अभी तक राज्य में अनुबंध कर्मचारियों के नियमितकरण के लिए कोई नियम नहीं है. जिससे अनुबंध कर्मचारियों का स्थायीकरण नहीं हो पाता. साथ ही विक्रांत ने कहा कि मंत्रीमंडल में आने के बाद बादल पत्रलेख समायोजन नीति बना सकते हैं.

राज्य में अनुबंध कर्मचारियों की संख्या अधिक है. ऐसे में स्थायीकरण के लिए नियमित नीति का होना जरूरी है. उन्होंने कहा कि पिछले सरकार के कार्यकाल में पत्रलेख इसके लिए दबाव बनाया था.

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