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15वें वित्त की राशि मिलने के बाद भी संविदा कर्मियों को नहीं मिल पाया सेवा विस्तार

Ranchi: संविदा पर काम कर रहे हैं 14वें वित्त पंचायती राज कर्मियों का सेवा विस्तार दिसंबर में ही समाप्त हो गया, लेकिन केंद्र सरकार की ओर से 15वें वित्त की राशि पिछले वर्ष जुलाई-अगस्त में ही राज्य सरकार को दे दी गयी थी.

इस राशि का उपयोग राज्य सरकार को संविदा विस्तार के लिए किया जाना था लेकिन राज्य सरकार की ओर से इस दिशा में कोई ठोस कार्य नहीं किया गया, जिसका परिणाम यह रहा कि आज 1600 संविदा कर्मी अपने सेवा विस्तार की मांग को लेकर सड़क पर उतर आए हैं.

संविदा कर्मियों का कहना है कि अगर सरकार समय पर अपनी नीति साफ रखती तो आज यह कर्मी बेरोजगार नहीं होते.
इधर विभागीय मंत्री आलमगीर आलम ने बताया कि इन कर्मियों को हतोत्साहित होने की जरूरत नहीं है.

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इनके सेवा विस्तार को लेकर केंद्र से दिशा-निर्देश अक्टूबर में ही मांगा गया है. सूत्रों के अनुसार केंद्र ने यह स्पष्ट किया है कि राज्य सरकार इस राशि का उपयोग अपने कर्मियों की बेहतरी के लिए कर सकती है लेकिन इसकी पूरी जिम्मेदारी राज्य सरकार की होगी.

केंद्र और राज्य सरकार के बीच में सामंजस्य की कमी के कारण इन निविदा कर्मियों के सेवा विस्तार का मामला लटक चुका है.

मालूम हो कि 14वें वित्त के लगभग 1600 कर्मी 17 दिसंबर, 2020 से रांची में हड़ताल पर हैं, बल्कि 3 जनवरी से 12 कर्मी अब आमरण अनशन पर भी बैठ चुके हैं. सभी सरकार से संविदा विस्तार की गुहार लगा रहे हैं, साथ ही वे बकाया मानदेय को लेकर भी सरकार से अपील कर रहे हैं.

कर्मियों की शिकायत है कि राज्य के कई जिलों में 14वें वित्त के कर्मियों का नियत मानदेय एक-एक साल से फंसा पड़ा है. सेवा शर्तों के अनुसार हर साल कर्मियों के मानदेय में 5 प्रतिशत तक की वृद्धि की जानी थी. इसका भी पालन पिछले 3 सालों से कई जिलों में नहीं हुआ है.

14वें वित्त के कर्मियों के मुताबिक कई जिलों में कर्मियों का मानदेय 3 महीने से लेकर सालभर तक का बकाया है. संविदा कर्मियों में जेई को हर माह 17,000 और ऑपरेटरों को 10,000 तक हर महीने दिया जा रहा था.

अलग अलग जिलों में कर्मियों की संख्या अलग अलग है. राज्य में 467 कंप्यूटर आपरेटरों और 526 जेई के लिए पद तय किये गये थे. हालांकि इन पदों पर कभी पूरी तरह से कर्मी नहीं रहे.

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क्या है मांग

हड़ताल पर बैठे कर्मियों की मांग है कि 15वें वित्त के कार्यक्रमों के लिये भी उनका संविदा विस्तार हो या फिर सरकार पंचायती राज में उन्हें समायोजित करे.

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