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सेवा देने के बावजूद हो रहा है लगातार शोषण : बीआरपी-सीआरपी

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Hazaribagh : राज्य में प्राथमिक और मध्य शिक्षा के लिए पुल का काम कर रहे बीआरपी – सीआरपी शिक्षा विभाग की रीढ़ की हड्डी है. 2004-05 सर्व शिक्षा अभियान के तहत बीआरपी-सीआरपी की नियुक्ति की गई थी. खून पसीनें से सुदूरवर्ती क्षेत्रों में जाकर शिक्षा की लौ को जलाने वाले संघ के सदस्य हक की मांग कर रही हैं, तो सरकार को यह गले की फांस लग रही है. यह बातें महासंघ के जिलाध्यक्ष मधुसूदन सिंह ने त्राहिमाम संदेश वार्ता के दौरान कहीं.

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राज्‍य सरकार ने नहीं बनायी कोई नियमावली

बताया बीआरपी सीआरपी का प्रमुख कार्य राज्य में शिक्षा की गुणवत्ता की देखरेख करना व शिक्षात्मक गतिविधियों का अनुश्रवण करना है. इसके अलावा ये कर्मी समय-समय पर विभागीय कार्य व सरकारी योजनाओं को भी पूरा करते है. प्रखंड से राज्य तक इन कर्मियों पर अनादि प्रकार के कार्यों का भार कुछ इस तरह रहता है वे अपने घर के दैनिक दिनचर्या में भी शामिल नहीं हो सकते. ऐसे में 13 वर्षों से सेवा देने के बावजूद अभी तक इन कर्मियों के लिए राज्य सरकार द्वारा किसी प्रकार की नियमावली का निर्माण नहीं सरकारी शोषण को प्रदर्शित करती है.

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12 हजार का मान देय मिलता है बीआरपी-सीआरपी को

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जिला सचिव ने बताया कि राज्य सरकार व शिक्षा विभाग हमेशा बीआरपी सीआरपी की अनदेखी की जा रही है. वहीं बीआरपी सीआरपी मात्र 12 हजार 644  व 11 हजार 979 अल्प मानदेय में बिना किसी अन्य भत्ते के कार्य करना पड़ रहा है. इतना हीं नहीं सरकार शिक्षा विभाग के अंतर्गत कार्य कर रहे अन्य कर्मियों के लिए चिंतित व निरंतर क्रियाशील है, बीआरपी- सीआरपी कर्मी 13 वर्षों से शोषण के शिकार हो रहे हैं. प्रेस वार्ता में सचिव प्रवीण कुमार सिंह, कोषाध्यक्ष ओम प्रकाश कुमार, उपाध्यक्ष अभय कुमार, मीडिया प्रभारी हृदयांशु कुमार, अजय नारायण दास, अयाज अहमद, अनुपमा रानी, जलेश्वर महतो, विष्णु ठाकुर मौजूद थे.

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