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बिजली नहीं होने के कारण अधर में लटका रिम्स हॉस्टल का निर्माण कार्य

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Ranchi: रिम्स में 500 बेड के हॉस्टल का निर्माण कार्य अब भी अधर में अटका हुआ है. कंस्ट्रक्शन कंपनी के प्रतिनिधि का कहना है कि हॉस्टल बनकर तैयार है, लेकिन बिजली की व्यवस्था नहीं होने के कारण हम आगे का काम नहीं कर पा रहे है. कंपनी के सदस्य ने बताया कि हॉस्टल का स्ट्रक्चर तो बनकर तैयार हो चुका है, अब बगैर बिजली के कोई भी काम हो पाना संभव नहीं है.
कंस्ट्रक्शन कंपनी के प्रतिनिधि ने बताया कि कैंपस में ट्रांसफॉर्मर लगवाने के लिए रिम्स प्रबधंन से कहा गया है, लेकिन प्रबंधन इसमें कोई दिलचस्पी नहीं ले रहा.

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कंपनी के प्रतिनिधि ने बताया कि रिम्स प्रबंधन को कई बार इस बारे में जानकारी दी जा चुकी है, लेकिन कोई सकारात्मक पहल की गयी. इससे हमारी परेशानी भी बढ़ी हुई है. कंपनी के अनुसार, बिजली विभाग द्वारा ट्रांसफॉर्मर लगाने में हो रही देरी के कारण ही हॉस्टल भवन को हैंडओवर नहीं किया जा रहा है. जबकि बिजली विभाग के सुपरिटेंडिंग इंजीनियर अजीत कुमार ने बताया कि बिजली विभाग का रिम्स में बिजली के लिए ट्रांसफर्मर लगवाने का दायित्व नहीं है.

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15 अगस्त को ही करना था हैंडओवर

मालूम हो कि पांच सौ बेड वाले इस हॉस्टल के निर्माण में 79 करोड़ 70 लाख, 24 हजार 900 रुपए की स्वीकृति दी गई थी. पूर्व स्वास्थ्य सचिव निधि खरे ने इस हॉस्टल का निर्माण कर रिम्स को सौंपने के लिए 15 अगस्त का समय दिया था. लेकिन, अब तक इसे हैंडओवर नहीं किया जा सका है. इससे हॉस्टल निर्माण का उद्देश्य भी पूरा नही हो पा रहा. 45वीं जीवी की बैठक में इस भवन की राशि लगभग 79 करोड़ रुपए स्वीकृत की गयी थी.

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सीट बढ़ने के बाद हॉस्टल की बढ़ी थी मांग

रिम्स में मेडिकल की सीट बढ़ने के बाद हॉस्टल की मांग बढ़ी थी. जिसके बाद तत्कालीन स्वास्थ्य सचिव निधि खरे ने जल्द निर्माण कर हॉस्टल 15 अगस्त से पहले देने के लिए कहा था. जिसके बाद रिम्स निदेशक डॉ आरके श्रीवास्तव ने कई बार हॉस्टल का निरीक्षण भी किया, लेकिन अब तक हॉस्टल हैंडओवर नहीं हो सका. अभी एमबीबीएस की 150 सीट है. जिसे बढ़ा कर 250 करने का प्रयास किया जा रहा है. जिसके लिए केंद्र सरकार से मंजूरी मिल चुकी है. मामले पर रिम्स निदेशक से जानकारी लेने का प्रयास किया गया तो फोन स्वीच ऑफ था. जबकि रिम्स अधीक्षक ने इस मामले में कुछ भी कहने से साफ इंकार कर दिया.

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