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मंत्रीमंडल में 5 सीट को लेकर कांग्रेस का जेएमएम पर प्रेशर पॉलिटिक्स

  • 5 मंत्री पद पर अड़ी कांग्रेस, शपथ ग्रहण का समय निर्धारित करने से शीर्ष नेतृत्व ने जातीय नाराजगी
  • बंधु तिर्की और प्रदीप यादव के कांग्रेस में आने से बदलेगा राजनीतिक समीकरण, यूपीए गठबंधन टकराव के आसार प्रबल

Nitesh Ojha

Ranchi :  झारखंड में बनी यूपीए गठबंधन सरकार एक बार फिर बैकफुट में दिख रही है. 12 सदस्यीय मंत्रिमंडल में कांग्रेस 5 मंत्री पद पर अड़ी है. दूसरी तरफ झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) अपने कोटे से मुख्यमंत्री के अलावा 6 मंत्री पद लेना चाहती है. ऐसे में जेवीएम के मांडर विधायक बंधु तिर्की और पोड़ैयाहाट विधायक प्रदीप यादव को कांग्रेस में शामिल कराकर पार्टी आलाकमान ने जेएमएम के ऊपर अतिरिक्त दबाव बना दिया है.

राजनीतिक गलियारे में यह बात चर्चा का विषय इसलिए भी है, क्योंकि गुरूवार सुबह मुख्यमंत्री ने अपने मंत्रिमंडल विस्तार का समय राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू से लिया. शुक्रवार दोपहर 1 बजे का समय भी मिला. लेकिन कांग्रेस की प्रेशर पॉलिटिक्स की वजह से सीएम ने मंत्रिमंडल विस्तार टालने का अनुरोध राज्यपाल से किया.

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जेएमएम के प्रेशर से दिल्ली सहित प्रदेश मुख्यालय में दिखी नाराजगी  

गुरूवार सुबह मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने राज्यपाल से मंत्रिमंडल विस्तार का समय मांगा था, दरअसल उसके पीछे जेएमएम का कांग्रेस पर एक प्रेशर बनाना था. अपने कोटे से 6 और कांग्रेस कोटे से केवल 2 मंत्रियों को शपथ दिलाकर मुख्यमंत्री तत्काल अपने मंत्रिमंडल का विस्तार करना चाहते थे. बात मीडिया में भी आयी.

कांग्रेस मुख्यालय में हलचल बढ़ गयी. कांग्रेस के कई नेता पार्टी को दो मंत्री पद मिलने से साफ नाराज दिखे. दिल्ली प्रदेश तक ये बात रखी गयी. बताया जा रहा है कि शीर्ष नेतृत्व ने तत्काल ही मुख्यमंत्री से संपर्क साधा और फिलहाल मंत्रिमंडल विस्तार टालने की बात कही.

इस मामले को लेकर कांग्रेस महासचिव के.सी. वेणुगोपाल ने स्वंय ही मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से इस बारे में बात भी की.

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 जेवीएम विधायक के आने से समीकरण का बदलना तय

वहीं देर शाम बंधु तिर्की और प्रदीप यादव का कांग्रेस अध्यक्षा सोनिया गांधी और नेता राहुल गांधी से मिलते हुए फोटो वायरल हुआ. उसके बाद यह बात भी फैली कि सुबह तक जेएमएम के प्रेशर वाली राजनीति का रूख कांग्रेस के पाले में चला गया.

विधानसभा चुनाव 2019 में 16 सीट जीतने के बाद कांग्रेस आलाकमान ने यह बता दिया कि दोनों विधायकों के पार्टी में आने से पार्टी विधायकों की संख्या बढ़कर 18 हो गयी है. ऐसे में पार्टी किसी भी हाल में 5 मंत्रियों के मांग से पीछे नहीं हट सकती. चर्चा तो यह भी है कि इस प्रेशर ने हेमंत सरकार के 1 माह के कार्यकाल में ही यूपीए गठबंधन में सब ठीक है ऐसा नहीं दिख रहा है.

जेवीएम विधायकों को मंत्री पद नहीं देना चाहते कांग्रेसी

दोनों विधायकों के कांग्रेस में आने के बाद (औपचारिक ऐलान) इस बात की भी चर्चा उठी कि बंधु तिर्की को पार्टी मंत्रिमंडल में शामिल कर सकती है. लेकिन ऐसा कदम उठाने से शीर्ष नेतृत्व को अपने ही जीते विधायकों की नाराजगी झेलनी पड़ेगी.

जामताड़ा विधायक इरफान अंसारी ने तो इसकी शुरूआत भी कर दी है. वहीं जातीय समीकरण भी दोनों विधायकों के मंत्री नहीं बनने का साफ संकेत देती है. इस समीकरण का हवाला देकर कुछ नेताओं का कहना है कि आदिवासी और अल्पसंख्यक कोटे से पहले ही दो मंत्री बन चुके हैं.

मुख्यमंत्री के 29 दिसंबर को लिये शपथ के दिन ओबीसी और जेनरल कोटे से किसी को मंत्री पद का शपथ नहीं दिलाकर शीर्ष नेता ने जनता के सामने गलत मैसेज दिया है. वहीं अगर अब बाहर से आयातित विधायकों (इशारा जेवीएम के बागी विधायकों पर) को मंत्री बनाया जाता है, तो यह तो 29 दिसंबर से बड़ा गलत मैसेज होगा.

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