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कांग्रेस का नया चुनावी नारा- आदिवासी विरोधी है रघुवर सरकार

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Ranchi : लोकसभा चुनाव-2019 आने से पहले अब कांग्रेस पार्टी ने आदिवासी हितों को लेकर अब रघुवर सरकार पर निशाना साधना शुरू कर दिया है. सेंटर फॉर आदिवासी रिसर्च एंड डेवलपमेंट की रिपोर्ट के सहारे पार्टी ने कहा है कि रघुवर सरकार में आदिवासियों की स्थिति क्या है. पार्टी ने कहा कि रिपोर्ट में जिन 32 छात्रावासों की स्थिति का आकलन किया गया है, उससे साबित होता है कि सरकार आदिवासी विरोधी है. दूसरी ओर राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) के बहाने कांग्रेस ने मोदी सरकार को जुमले वाली सरकार बताते हुए कहा कि कांग्रेस की तरुण गोगाई सरकार ने जहां 82 हजार घुसपैठियों को बाहर किया था, वहीं 56 इंच वाली सरकार ने केवल 1800 लोगों को बाहर कर सारा श्रेय लेने का काम किया है.

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भाजपा सांसद की टिप्पणी से पुष्टि, आदिवासी विरोधी है सरकार

कांग्रेस मुख्यालय में शुक्रवार को आयोजित प्रेस वार्ता में कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष डॉ अजय कुमार ने कहा कि रिपोर्ट से यह खुलासा हुआ है कि रघुवर सरकार आदिवासी विरोधी है. रिपोर्ट में 32 छात्रावासों की सर्वे रिपोर्ट एवं अखबारों में जिस तरह की तस्वीरें सामने उभरकर आयी हैं, वह शर्मनाक है, निंदनीय है. इससे आदिवासियों की बदतर स्थिति होने की बात साबित होती है. आज जहां कई छात्रावासों में आदिवासी छात्रों के लिए पानी, बिजली, शौचालय जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं, वहीं 23 प्रतिशत छात्रावास में छात्राओं को खुले में नहाना पड़ता है. दूसरी ओर भाजपा के ही रांची सांसद आदिवासी समाज को शराबी बताकर आपत्तिजनक टिप्पणी करते रहते हैं. ऐसी टिप्पणी देने के बाद न ही सांसद और न ही भाजपा का इस पर कोई बयान आता है.

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आजादी की लड़ाई में अंग्रेजों का साथ देनेवाले आरएसएस के लोगों को क्यों बाहर नहीं करते

एनआरसी के बहाने मोदी सरकार को जुमले वाली सरकार बातते हुए डॉ अजय कुमार ने कहा कि जब मोदी सरकार घुसपैठियों को बाहर करना ही चाहती है, तो क्यों नहीं वैसे भाजपा या आरएसएस वाले लोगों को बाहर करती है, जिन्होंने आजादी की लड़ाई में अंग्रेजों का साथ दिया था. उन्होंने कहा कि कांग्रेस की तरुण गोगोई सरकार ने जहां 82 हजार घुसपैठियों को बाहर किया था, वहीं 56 इंच वाली मोदी सरकार ने अब तक केवल 1800 लोगों को ही देश से बाहर किया है. आज मोदी सरकार ने जिन 3 करोड़ 50 लाख लोगों को एनआरसी में दर्ज होने की बात कही थी, उसमें से कांग्रेस ने ही करीब 2 लाख 80 हजार लोगों पर काम कर दिया था. बाद में जितनी सरकारें सत्ता में आयीं, उन्होंने 70 हजार पर काम किया. ऐसे में मोदी सरकार ने केवल 1800 घुसपैठियों को ही बाहर कर सारा श्रेय लेने का काम किया है.

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मौत का सिलसिला है जारी, खामोश है सरकार

प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि राज्य में अब तक जितने भी लोगों की मौत भूख से हुई, उसमें अधिकतर आदिवासी या दलित समाज से थे. सरकार भी यह बात अच्छी तरह जानती है, उसके बाद भी यह सिलसिला निरंतर जारी है. इसके बावजूद सरकार खामोश है. वहीं, नीति आयोग की अनुशंसा के बाद राज्य में 13 प्राथमिक एवं मध्य वि़द्यालयों को विलय अथवा बंद करने तथा सरकार के फैसले के बाद 4600 स्कूलों को बंद करने के निर्णय से आदिवासी छात्रों के हितों पर विपरीत प्रभाव पड़ेगा, लेकिन सरकार को इसकी चिंता नहीं है.

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बाल आश्रय की स्थिति है बदतर

उन्होंने कहा कि राज्य में बाल आश्रय की जो हालत है, वह काफी बदतर है. हाई कोर्ट ने कल्याण विभाग को जो निर्देश दिया है, उससे मालूम होता है कि सरकार का पूरा सिस्टम फेल है. मालूम हो कि कोर्ट ने अगस्त माह में समाज कल्याण विभाग को निर्देश देते हुए कहा है कि वह अविलंब रिमांड होम एवं बाल आश्रय गृहों में सभी तरह के पदों में नियुक्ति सुनिश्चित करें. ऐसा नहीं करने पर न्यायालय समाज कल्याण विभाग के सचिव का वेतन भुगतान रोक सकता है.

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आदिवासी छात्रावासों पर रिपोर्ट पेश करेगी कांग्रेस

पार्टी अध्यक्ष ने कहा कि आदिवासी कांग्रेस के पदाधिकारियों एवं जिलाध्यक्षों को निर्देश दिया गया है कि वे अपने-अपने जिलों में कल्याण विभाग द्वारा चलाये जा रहे छात्रावासों का भौतिक निरीक्षण कर जिला उपायुक्त को ज्ञापन सौंपें एवं प्रदेश कार्यालय को विस्तृत रिपोर्ट एक सप्ताह के अंदर दें. दूसरी ओर महिला अध्यक्ष गुंजन सिंह के नेतृत्व में महिला कांग्रेस के कार्यकर्ता अपने-अपने जिलों में चलनेवाले बालाश्रय गृहों एवं नारी निकेतन का भौतिक निरीक्षण कर जिला उपायुक्त को ज्ञापन सौंपेंगे. साथ ही, उन्हें प्रदेश कार्यालय को विस्तृत रिपोर्ट देने को कहा गया है, ताकि आंदोलन की रूपरेखा तैयार की जा सके.

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