BusinessNational

#Congress का तंज, भारत का कर्ज 88 लाख करोड़ हुआ, #PMModi कहते हैं, भारत में सब अच्छा है

NewDelhi : मौजूदा वित्त वर्ष की पहली तिमाही यानी जून के अंत तक देश का कर्ज बढ़कर 88.18 लाख करोड़ हो गया है. पिछले साल इसी तिमाही के दौरान देश पर कुल 84.6 लाख करोड़ का कर्ज था. इसका मतलब एक साल में 3.58 लाख करोड़ का कर्ज भारत पर बढ़ा है. यह पिछले साल की इसी तिमाही से 4 फीसदी ज्यादा है. वित्त मंत्रालय ने 27 सितंबर को यह आंकड़े जारी किये है.

बिजनेस टुडे  के अनुसार आर्थिक मामलों के पब्लिक डेब्ट मैनेजमेंट सेल के आंकड़ों में कहा गया है कि जून 2019 के अंत तक सरकार की कुल बकाया देनदारी में लोक ऋण की हिस्सेदारी 89.4 प्रतिशत रही है.    अखबार के अनुसार केंद्र ने दिनांकित प्रतिभूतियां (डेटेड सिक्योरिटिज़) जारी की है,  जिसमें कहा गया है कि वित्त वर्ष 2020 की पहली तिमाही में (डेटेड सिक्योरिटिज़) 2.2 लाख करोड़ की है.

जबकि वित्त वर्ष 2019 की पहले तिमाही में यह 1.4 लाख करोड़ थी. प्रतिभूतियों के यील्ड में हालांकि पहली तिमाही में गिरावट दर्ज की गयी, अप्रैल-जून 2019 तिमाही में औसत भारित यील्ड 7.21 फीसदी रहा, जो जनवरी-मार्च 2019 तिमाही में 7.47 फीसदी था.

इसे भी पढ़ें : राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद का गुमला और देवघर का दौरा रद्द, खराब मौसम बनी वजह

सरकार आम जनता को राहत देने की बजाय कारपोरेट जगत को राहत दे रही है

इन आंकड़ों के सामने आते ही कांग्रेस न केंद्र सरकार पर करारा हमला किया है.   कांग्रेस  प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत शनिवार को मीडिया में आयी खबरों का हवाला देते हुए कहा कि  देश का कुल कर्ज बढ़कर 88.18 लाख करोड़ रुपये हो गया है, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कह रहे हैं कि भारत में सब अच्छा है.  इस क्रम में सुप्रिया श्रीनेत ने यह आरोप भी लगाया कि सरकार आम जनता को राहत देने की बजाय कारपोरेट जगत को राहत दे रही है.

इसे भी पढ़ें : प्रियंका गांधी का योगी सरकार पर निशाना – पूरा प्रशासन #Chinmayananda को गले लगा रहा, बचा रहा

फ्रांस की एक महारानी ने कहा था कि रोटी के बदले केक खाओ 

सुप्रिया ने पत्रकारों से कहा, सिर्फ यह बोल देने से सब अच्छा नहीं हो जाता कि भारत में सब अच्छा है.  सुप्रिया ने अपनी बात दोहराते हुए कहा,  इस वित्त वर्ष की पहली तिमाही में भारत का कर्ज 88.18 लाख करोड़ रुपये हो गया है.  यह इससे पहली की तिमाही के मुकाबले करीब चार फीसदी अधिक है.  यह चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि फ्रांस की एक महारानी ने कहा था कि रोटी के बदले केक खाओ.

ऐसा लगता है कि यह सरकार भी इसी रास्ते पर जा रही है.  उसे जमीनी हकीकत का अंदाजा नहीं है. आम लोगों के पास पैसे नहीं है और कारपोरेट के कर में कमी कर रही है. दावा किया कि कारपोरेट इससे अपना बहीखाता ठीक करेंगे और निवेश नहीं करेंगे. सरकार जो कदम उठा रही है उससे कर्ज की दर बढ़ेगी.

इसे भी पढ़ें :   विधानसभा चुनावः आदिवासी मुद्दों की अनदेखी राजनीतिक दलों को महंगी पड़ सकती है

Advertisement

Related Articles

Back to top button
%d bloggers like this: