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मोदी के खिलाफ तीसरे मोर्चे में अहम रोल चाहिए कांग्रेस को, कवायद शुरू

थर्ड फ्रंट के लिए ताकत झोंकने के बजाय चंद्रबाबू नायडू और जेडीएस के एचडी कुमारस्वामी जैसे विपक्षी दलों के सीएम अपने राज्यों में कांग्रेस के साथ संबंध मजबूत बनाने की जुगत में हैं.

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NewDelhi : बिना कांग्रेस को शामिल किये तीसरा मोर्चा बनाने की कवायद में कोई दम नहीं है,  इसलिए कांग्रेस समान सोच वाली ताकतों को एकजुट करने में रणनीतिक भूमिका निभायेगी. साथ ही कांग्रेस हाइकमान 2019 में होने जा रहे लोकसभा चुनाव से पूर्व केंद्र की मोदी सरकार के खिलाफ भाजपा और आरएसएस विरोधी मोर्चे में विपक्षी दलों को एकजुट करने की कवायद में अपना रोल मजबूती से निभायेगा. यह फैसला कांग्रेस की कोर कमेटी की मीटिंग में लिया गया है. इस संबंध में कांग्रेस सूत्रों ने कहा कि शनिवार को ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी के जनरल सेक्रेटरी अशोक गहलोत ने टीडीपी चीफ एन चंद्रबाबू नायडू से अमरावती में मुलाकात की. बताया कि दोनों की तरफ से 22 नवंबर को विपक्षी दलों का सम्मेलन कराने की योजना का ऐलान विपक्षी मोर्चे में लीड रोल निभाने की कांग्रेस लीडरशिप के फैसले का हिस्सा था. पार्टी सूत्रों के अनुसार कांग्रेस के कई सीनियर लीडर्स ने दूसरे विपक्षी दलों के नेताओं से बातचीत की है. कांग्रेस आलाकमान का मानना है कि समान सोच वाली पार्टियों के लिए चुनाव से पहले भाजपा और आरएसएस विरोधी बड़ा गठबंधन बनाने पर फोकस करना और चुनाव के बाद मोर्चे के नेता जैसे चुनौतीपूर्ण मुद्दों पर बात करना सही रहेगा.

इसे भी पढ़ें: मोदी बड़े नेता, पर 2019 में 2014 जैसी लहर मुमकिन नहीं, डिजिटल प्लेटफॉर्म का रोल अहम : प्रशांत

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पांच राज्यों के चुनावों के नतीजे तय करेंगे कि कांग्रेस का अगला कदम क्या होगा

जान लें कि थर्ड फ्रंट के लिए ताकत झोंकने के बजाय चंद्रबाबू नायडू और जेडीएस के एचडी कुमारस्वामी जैसे विपक्षी दलों के सीएम अपने राज्यों में कांग्रेस के साथ संबंध मजबूत बनाने की जुगत में हैं.  कांग्रेस की अगुवाई में विपक्षी दलों के संयुक्त मोर्चे का समर्थन करने वाले चंद्रबाबू नायडू  हाल ही में राहुल गांधी से मिलने के बाद  डीएमके लीडर एमके स्टालिन और जेडीएस लीडर कुमारस्वामी के साथ मिले.
कांग्रेस का मानना है कि थर्ड फ्रंट में शामिल दल आखिरकार उसके साथ जुड़ेंगे.  जाहिर है कि नायडू आंध्र प्रदेश में कांग्रेस के साथ इसलिए हाथ मिला रहे हैं ताकि वाईएसआर कांग्रेस से मुकाबला किया जा सके.  कुमारस्वामी कर्नाटक में कांग्रेस के जूनियर पार्टनर के तौर पर सरकार चला रहे हैं.  लालू प्रसाद का राजद और शरद यादव कांग्रेस के साथ गठबंधन बनाने को लेकर आगे बढ़ रहे हैं. उधर एनसीपी-कांग्रेस गठबंधन ने पवार के चुनाव पूर्व गठबंधन के ऑप्शन बंद कर दिये हैं.  हालांकि बंगाल में ममता की टीएमसी और सीपीएम में से कांग्रेस किसके साथ होगी. यह भविष़्य में तय हेागा. यूपी में बसपा चीफ मायावती और अखिलेश की सपा के मामले में कांग्रेस अभी सेाच विचार कर रही है. पांच राज़्यों के चुनावों के नतीजे तय करेंगे कि कांग्रेस का आगामी कदम क़्या होगा.

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