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महागठबंधन नहीं बनने पर कांग्रेस का प्लान बी, विधानसभा क्षेत्रवार शुरू की तैयारी

Ranchi : थकी-हारी दिखनेवाली कांग्रेस में तीन राज्यों में मिली जीत के बाद एकाएक स्फूर्ति आ गयी है. देश के राजनीतिक क्षितिज पर कांग्रेस ने भाजपा के राष्ट्रीय विकल्प के रूप में उभरने की रणनीति पर कार्य शुरू कर दिया है. देश की जनता के मन में उठ रहे सवाल कि मोदी के मुकाबले कौन जवाब देगा, इसके जवाब के लिए कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी खुद को साबित करने में लगे हैं. एक ओर भाजपा अपनी सत्ता को बचाने में जुटी है, वहीं कांग्रेस भी माहागठबंधन के सहारे अपनी नैया पार करने की कोशिश में है. लेकिन, कांग्रेस तीन राज्यों में विधानसभा चुनाव और कोलेबिरा उपचुनाव जीतने के बाद झारखंड में भी सत्ता शीर्ष तक पहुंचने के लिए प्लान बी पर काम करने लगी है. इसके तहत कांग्रेस अब अपने दम पर चुनावी समर में कूदने की तैयारी कर रही है.

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झारखंड में कांग्रेस का मनोबल बढ़ता दिख रहा है

2014 के लोकसभा चुनाव में मिली भारी शिकस्त और इसके बाद एक के बाद एक राज्यों में विधानसभा चुनाव में धुनाई के बाद कांग्रेस का मनोबल टूट चुका था. आलम यह था कि झारखंड में कांग्रेस ने क्षेत्रीय दलों के समक्ष घुटने टेक दिये थे. वहीं, झारखंड में क्षेत्रीय दलों को लग रहा था कि कांग्रेस को वह अपनी शर्तों पर महागठबंधन करने को मजबूर कर देंगे. कांग्रेस पार्टी ने झारखंड में झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) के समक्ष लगभग आत्मसमर्पण कर भी दिया था. राज्य में भाजपाविरोधी दलों का महागठबंधन बनाने की कवायद करनेवाली कांग्रेस लोकसभा चुनाव में ज्यादा सीटों के बदले विधानसभा चुनाव में जेएमएम को ज्यादा सीटें देने पर औपचरिक सहमति भी बना ली थी. इसके तहत राज्य की सात लोकसभा सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी पार्टी के संभावित उम्मीदवार करने लगे थे. लेकिन, तीन राज्यों के विधानसभा चुनाव और झारखंड में कोलेबिरा उपचुनाव में जीत हासिल करने के बाद कांग्रेस में गजब की स्फूर्ति आ गयी है. कभी धड़ाम हो चुके पार्टी के मनोबल को अब संजीवनी मिल गयी है. कांग्रेस में अब इतना कॉन्फिडेंस आ गया है कि अब वह अपने प्लान बी पर काम करने की तैयारी कर रही है. यानी, वह राज्य में जेएमएम का साथ छूटने की स्थिति में भी अपनी चुनावी नैया पार लगाने की राह पकड़ चुकी है.

तीन राज्यों और कोलेबिरा उपचुनाव के परिणाम के बाद कांग्रेस का प्लान बी

राजस्थान, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनाव के साथ-साथ झारखंड में कोलेबिरा उपचुनाव के नतीजे के बाद कांग्रेस पार्टी के रणनीतिकार प्लान बी पर काम करने लगे हैं. पार्टी की ओर से प्रयास किया जा रहा है कि वैसे चेहरों को भी पार्टी में स्थान दिया जाये, जिन्होंने स्वतंत्र रूप से कार्य करते हुए समाज में अपनी अलग पहचान बनायी है. इस दिशा में पार्टी राज्य के पांचों प्रमंडलों में काम कर रही है. कांग्रेस के प्लान बी के तहत सभी विधानसभा क्षेत्रवार अपने उम्मीदवारों की संभावित सूची लोकसभा चुनाव के पूर्व तैयार करने की तैयारी है. अगर महागठबंधन में जेएमएम शामिल नहीं होता है, जिसकी संभावना कांग्रेस के रणनीतिकार को भी लग रही है, तो ऐसे में कांग्रेस पार्टी की ओर से जेएमएम को छोड़ अन्य दूसरे विपक्षी दलों को अपने पाले में करने कि कोशिश है. इसमें झारखंड विकास मोर्चा, आजसू, वाम दल के साथ-साथ आरजेडी पर भी कांग्रेस की नजर है.

सांगठनिक मजबूती पर भी काम कर रही कांग्रेस

झारखंड में सांगठनिक रूप से कमजोर रही कांग्रेस अब अपने संगठन को ताकतवर बनाने की ओर भी ध्यान दे रही है. जिला, प्रखंड, बूथ, सभी स्तरों पर संगठन की मजबूती को लेकर कांग्रेस ने जिम्मेदारी तय कर दी है. कार्यकर्ताओं और प्रभारियों को कांग्रेस की ओर से निर्देश दिया गया है कि प्रखंड कमिटी और बूथ कमिटी बनाकर पार्टी की सांगठनिक मजबूती पर काम किया जाये. पार्टी किसी भी हाल में देश और राज्यों में उभरती अपनी छवि को भुनाने से चूकना नहीं चाहती है.

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2014 के विधानसभा चुनाव में ऐसा था कांग्रेस का हाल

2014 में हुए झारखंड विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने 62 सीटों पर अपने उम्मीदवार खड़े किये थे. इसमें पार्टी को छह सीटों पर जीत हासिल हुई थी. वहीं, 42 सीटों पर पार्टी उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गयी थी. इसका आकलन भी पार्टी द्वारा किया जा रहा है. कांग्रेस के रणनीतिकार उम्मीद कर रहे हैं कि विधानसभा चुनाव में कम से कम 25 से 30 सीटें कांग्रेस आसानी से झारखंड विकास मोर्चा और वाम दलों के साथ गठबंधन करके जीत सकती है. कांग्रेस को 2014 में हुए विधानसभा चुनाव में 13.98 प्रतिशत मत मिले थे. वहीं, सीपीआई को 2.89% , सीपीएम को 3.26% , झाविमो को 11.06 प्रतिशत, सीपीआई एमएल को 3.05% वोट मिले थे. इसका भी पार्टी आकलन कर रही है.

2014 के लोकसभा चुनाव में ऐसा था कांग्रेस का हाल

2014 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने झारखंड की 14 सीटों में से आठ सीटों पर अपने उम्मीदवार खड़े किये थे. इस चुनाव में कांग्रेस को कुल मतदान का 13.48 प्रतिशत वोट मिले थे. पार्टी ने गोड्डा लोकसभा सीट से फुरकान अंसारी को उम्मीदवार बनाया था. फुरकान अंसारी को 319 8 18 वोट मिले और पार्टी दूसरे स्थान पर रही. चतरा लोकसभा सीट से धीरज प्रसाद साहू कांग्रेसी उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़े, जिसमें उनको 117836 मत मिले थे. कोडरमा लोकसभा सीट से तिलकधारी सिंह को कांग्रेस ने अपना उम्मीदवार बनाया था, जहां पार्टी को 60330 वोट मिले. धनबाद लोकसभा सीट पर अजय कुमार दुबे पार्टी उम्मीदवार थे, जिन्हें 250537 मिले. रांची लोकसभा सीट से सुबोधकांत सहाय कांग्रेस प्रत्याशी थे और उन्हें 249426 वोट मिले. सिंहभूम लोकसभा सीट से चित्रसेन सिंह को पार्टी ने उम्मीदवार बनाया था. चित्रसेन चिंकू को 111796 वोट मिले थे. खूंटी लोकसभा सीट से कालीचरण मुंडा को कांग्रेस ने प्रत्याशी बनाया था. कालीचरण मुंडा को 147017 वोट मिले. लोहरदगा से रामेश्वर कांग्रेस प्रत्याशी थे, जो काफी कम अंतर से चुनाव हारे. रामेश्वर उरांव को 220177 वोट मिले थे. हजारीबाग सीट से कांग्रेस प्रत्याशी सौरभ नारयाण सिंह को 247803 वोट मिले थे.

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