JharkhandJharkhand PoliticsLead NewsRanchi

अपनी ही सरकार में पानी बिन मछली की तरह छटपटा रही है कांग्रेस

Gyan ranjan

Ranchi : लंब अरसे के बाद झारखंड में कांग्रेस सरकार में है. कांग्रेस के चार विधायक हेमंत सरकार में मंत्री हैं. ग्रामीण विकास, वित्त, खाद्य आपूर्ति, स्वास्थ्य और कृषि जैसे महत्वपूर्ण विभाग कांग्रेस के पास है. इसके बाद भी कांग्रेस अपनी ही सरकार में पानी बिन मछली की तरह छटपटा रही है. चुनाव के समय जनता से किये वादे को पूरा कराने में कांग्रेस को नाकों चने चबाने पड़ रहे हैं. कांग्रेस आलाकमान के हस्तक्षेप के बाद भी मामले पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही है. अब तो स्थिति यह हो गयी है कि कांग्रेस के प्रदेश नेतृत्व को राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव के समक्ष फ़रियाद करना पड़ रहा है. रविवार को दिल्ली में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राजेश ठाकुर और विधायक दल के नेता आलमगीर आलम ने राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव से मिलकर पिछड़ों को 27 प्रतिशत आरक्षण देने पर पहल करने की मांग की है.

इसे भी पढ़ें : संविदा पर बहाल सहायक पुलिसकर्मियों ने मोरहाबादी मैदान में फिर डाला डेरा-डंडा, नाकाम रही राज्य पुलिस की रणनीति

विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा को शिकस्त देने के लिए झारखंड में झामुमो, कांग्रेस और राजद का महागठबंधन बना. महागठबंधन के वादे पर जनता का विश्वास मिला और हेमंत सोरेन के नेतृत्व में महागठबंधन की पूर्ण बहुमत की सरकार बनी. सरकार बनते ही कोविड महामारी के प्रकोप से एक वर्ष तक कोई काम नहीं हो सका. जनता से जिस वादे के साथ झामुमो, कांग्रेस और राजद गठबंधन की सरकार बनी थी उसपर अबतक कोई काम नहीं हुआ. खासकर पिछड़ों को 27 प्रतिशत आरक्षण, रोजगार. कांग्रेस को इस बात का इल्म है कि अभी भी अनुसूचित जनजाति के बीच झामुमो की मजबूत पकड़ है. अनुसूचित जनजाति के साथ पिछड़ों की झारखंड में सर्वाधिक बहुलता है. ऐसे में कांग्रेस पिछड़ों का हितैषी होने का कोई दाव नहीं छोड़ना चाहती. पहले तो कांग्रेस ने अपने विधायकों के माध्यम से पिछड़ों के मामले को उठाया. अब प्रदेश नेतृत्व इस मामले पर खुलकर मुखर है. प्रदेश प्रभारी और प्रदेश अध्यक्ष के लगातार इस मुद्दे पर आवाज उठाने के बाद भी सरकार की तरफ से कोई पहल नहीं हो रही है. झामुमो की तरफ से केंद्रीय महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य का सिर्फ यह बयान आता है कि सरकार इस मामले पर संजीदा है.

नहीं हुआ बोर्ड-निगमों और 20 सूत्री का बंटवारा

पिछले तीन महीने से ज्यादा समय से बोर्ड-निगमों और 20 सूत्री के बंटवारे को लेकर आवाज उठ रही है. इस मामले पर आवाज उठाते-उठाते कांग्रेस के एक प्रदेश अध्यक्ष भी बदल गए. कांग्रेस और झामुमो के द्वारा इस मामले पर कई बैठकों के बाद फार्मूला भी तय हुआ. कहा यह गया कि बोर्ड- निगमों और 20 सूत्री में झामुमो को 13, कांग्रेस को 10 और राजद के हिस्से में एक जिला जायेगा. इस बात के भी एक महीने से ज्यादा समय गुजर गए. अबतक यह मामला नहीं सुलझा. इस मामले को लेकर भी कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी दो-दो बार मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मिल चुके हैं.

19 महीने बीत गए नहीं बना न्यूनतम साझा कार्यक्रम

राज्य में हेमंत सरकार के गठन के 19 महीने बीत गए. जब महागठबंधन सत्ता में आई थी तो यह तय हुआ था कि सरकार चलाने के लिए न्यूनतम साझा कार्यक्रम तय होगा. इसको लेकर भी कांग्रेस के नेताओं ने कई बार आवाज उठायी लेकिन उनकी एक नहीं चली. अबतक महागठबंधन का न्यूनतम साझा कार्यक्रम तय नहीं हुआ है. यही वजह है कि सरकार में रहते हुए भी सरकार में शामिल दलों को अपनी ही सरकार के खिलाफ आवाज बुलंद करना पड़ता है और धरना प्रदर्शन करना पड़ता है. कहा यह भी गया था कि सरकार बनते ही यूपीए की कोआर्डिनेशन कमेटी बनेगी. अबतक ऐसा नहीं हुआ है. देखा जाय तो जिन-जिन मुद्दे को लेकर कांग्रेस के विधायक, नेता आवाज बुलंद कर रहे हैं उसपर किसी तरह का कोई काम नहीं हो रहा है.

Related Articles

Back to top button