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किसी के बाप की पार्टी नहीं है कांग्रेस : डॉ अजय कुमार

Ranchi :  झारखंड प्रदेश कांग्रेस के इतिहास में गुरुवार को ऐसी स्थिति बनी, जिसकी शायद किसी को भी उम्मीद नहीं थी. पहली बार सीधे नाम लेकर प्रदेश अध्य़क्ष डॉ अजय कुमार और उनके समर्थकों ने पूर्व केंद्रीय मंत्री सुबोधकांत सहाय पर गंदी राजनीति करने का आरोप लगाया. डॉ अजय ने तो यहां तक कह दिया कि सुबोधकांत सहाय जितना नीचे गिर चुके हैं, उसकी किसी को कोई उम्मीद नहीं थी. इस दौरान उन्होंने सुबोधकांत सहित तीन अन्य वरिष्ठ नेताओं पर केवल टिकट की राजनीति करने का आरोप लगा दिया. वहीं अपने भाषण में बिना नाम लिये उन्होंने यहां तक कह दिया कि कांग्रेस पार्टी किसी के बाप की नहीं है. उन्होंने अपने सैकड़ों समर्थकों के साथ शक्ति प्रदर्शन भी किया. उन्होंने कहा कि सुबोधकांत ने पिछले 20-25 सालों से कांग्रेस को कैप्चर कर रखा है, जिसके पीछे का मकसद केवल अपने संबंधियों को टिकट दिलाना है. उनकी स्थिति इतनी नीचे गिर गयी है कि टिकट लेने के लिए वे आगे मेयर सहित वार्ड पार्षद का चुनाव भी लड़ सकते हैं. बता दें कि सुबोधकांत समर्थक दो नेताओं राकेश सिन्हा और सुरेंद्र सिंह को पार्टी से निष्कासित करने के बाद गुरुवार को दोनों गुटों के समर्थकों के बीच काफी धक्का-मुक्की हुई. नौबत यहां तक पहुंच गयी कि पुलिस प्रशासन को लाठी चार्ज करना पड़ा.

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विरोधियों की तरह ओछी राजनीति नहीं की : डॉ अजय

कांग्रेस मुख्यालय स्थित मंच पर चढ़ अपने समर्थकों के समक्ष डॉ अजय कुमार ने पहली बार सुबोधकांत सहाय का नाम अपने विरोधियों में लिया. कहा कि वे भाड़े के 20 आदमी खड़ा कर राजनीतिक करने पर उतर गये हैं. उन्होंने कहा कि यदि कोई नेता कोल्हान जाते हैं तो वे भी उनका विरोध इसी तरह करा सकते हैं. साथ ही उन्होंने कहा कि वे इस तरह की ओछी राजनीति नहीं कर सकते हैं. पिछले कई दिनों से पार्टी मुख्यालय परिसर में जो स्थिति बनी है, इसका कारण केवल सुबोधकांत ही हैं. ऐसा कर उन्होंने आज दिखा दिया कि उनके नीचे गिरने का कोई स्तर ही नहीं है. लोकसभा चुनाव में पार्टी की जो स्थिति बनी, उससे उन्हें भी काफी दुख है, लेकिन सुबोधकांत और वरिष्ठ नेताओं के लिए यह लड़ाई अपने संबंधियों को टिकट देने के साथ ही पार्टी पर कब्जा करने की है. जिस तरह से सुबोधकांत उनके खिलाफ अशोभनीय भाषा का उपयोग करते रहे हैं, यह साबित करता है कि वे कितना नीचे तक गिर चुके हैं.

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वरिष्ठ कांग्रेसियों पर साधा निशाना

मंच पर खड़े होकर डॉ अजय कुमार ने पार्टी के कई वरिष्ठ कांग्रेसी नेताओं ददई दुबे, फुरकान अंसारी सहित प्रदीप बलमुचु पर भी निशाना साधा. उन्होंने कहा कि एक बोकारो से चुनाव लड़ना चाहते हैं, तो उनके बेटे मेदिनीनगर से. इसी तरह एक गोड्डा से लेकर मधुपुर तक, तो तीसरे नेता खूंटी और घाटशिला में चुनाव लड़ना चाहते हैं. अपनी हार के लिए तो इन्होंने कभी जिम्मेवारी तो नहीं ली, लेकिन कांग्रेस को कमजोर करने के लिए वे हमेशा तैयार रहे.

दो गुटों के संघर्ष से आम लोग हुए परेशान

दोनों गुटों के बीच हुए संघर्ष का परिणाम राजधानी की जनता को झेलना पड़ा. जब सुबोधकांत समर्थकों को पुलिस गिरफ्तार कर ले जा रही थी, तो उन्होंने विश्वविद्यालय के सामने बीच रोड में बयानबाजी की. वहीं उनके पीछे डॉ अजय के समर्थक ‘अजय कुमार जिंदाबाद’ के नारे लगाते पहुंचे. इससे बीच सड़क में जाम की ऐसी स्थिति बनी, जिससे लोगों को काफी परेशानी झेलनी पड़ी. स्थिति बिगड़ती देख कोतवाली डीएसपी अजीत कुमार विमल और थाना इंचार्ज श्यामनंद मंडल ने ट्रैफिक व्यवस्था को सुधारने में तत्परता दिखायी.

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गुंडों के सहारे रोक रहे डॉ अजय

जब सुबोधकांत समर्थक कांग्रेस मुख्यालय की तरफ बढ़ रहे थे, तो उनका डॉ अजय कुमार के समर्थकों (जिसका नेतृत्व रांची महानगर अध्य़क्ष संजय पांडेय कर रहे थे) के साथ जम कर धक्का-मुक्की हुई. दरअसल सुबोधकांत समर्थक नेता पार्टी मुख्यालय में एक प्रेस कांफ्रेस करने जा रहे थे. काफी देर चली धक्का-मुक्की को देख कोतवाली पुलिस लाठी चार्ज को विवश हुई. स्थिति बिगड़ते देख सुबोधकांत समर्थक गुट बीच सड़क पर ही धऱने पर बैठ गया. मीडिया को बताया कि अजय कुमार अब अपने गुंडों की मदद से उन्हें मुख्यालय में नहीं जाने दे रहे हैं. दरअसल वो बीजेपी के एजेंट के रूप में काम कर रहे हैं.

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