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अपने ही बुने जाल में बुरी तरह से फंसी कांग्रेस, न खुदा ही मिला न विसाल-ए-सनम

GYAN RANJAN

Ranchi : झारखंड में चल रहे राजनितिक ड्रामे का भले ही मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के बयान के बाद पटाक्षेप हो गया हो लेकिन कांग्रेस पार्टी अपने ही बुने जाल में बुरी तरह से फंस गयी है.

राज्य में 12 वें मंत्री को लेकर कांग्रेस पार्टी ने जिस तरह का जाल बुना उसमें वह खुद उलझ कर रह गयी है. स्थिति यह है कि कांग्रेस पार्टी को न खुदा ही मिला न विसाल-ए-सनम.

दरअसल मंगलवार को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष और राज्य के वित्त मंत्री रामेश्वर उरांव दिल्ली गये. उनके दिल्ली जाने के कुछ घंटों बाद ही मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन भी दिल्ली पहुंच गये.

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पहले यह कहा जा रहा था कि मुख्यमंत्री दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और कांग्रेस के बड़े नेताओं से मुलाकात करेंगे. लेकिन चार दिन बीत जाने के बाद भी हेमंत सोरेन की दिल्ली में न तो प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से मुलाकात हुई और न ही कांग्रेस के किसी बड़े नेता से.

इस बीच यह चर्चा जोरों पर रही कि कांग्रेस को झारखंड सरकार में खाली 12 वां बर्थ चाहिए. इस तरह की ख़बरें आने के बाद झामुमो के कान खड़े हो गये और दूसरे ही दिन झामुमो की तरफ से यह बयान आया कि 12 वें बर्थ पर कांग्रेस का कोई दावा नहीं बनता है.

झामुमो महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य ने साफ़ कहा कि सरकार गठन के समय जो खाका तैयार हुआ था उसमें कांग्रेस को विधायकों की संख्या के हिसाब से चार मंत्री पद मिलना था जो उसे मिल गया है.

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संख्या के हिसाब से झामुमो को सात बर्थ देने पर बात हुई थी. इसलिए 12 वें बर्थ पर झामुमो का अधिकार है. झामुमो की तरफ से इस तरह का बयान जैसे ही आया कांग्रेस में खलबली मच गयी.

इसी बीच दिल्ली में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने साफ़ कह दिया कि अभी मंत्रिमंडल का विस्तार नहीं होना है. कांग्रेस के जो विधायक मंत्री बनने के लिए मुंह पिजाये बैठे थे उन पर तो मानो गाज ही गिर गयी.

इतना ही नहीं यह भी चर्चा थी कि हेमंत मंत्रिमंडल में विभागों का फेरबदल किया जायेगा और कांग्रेस में यह चर्चा थी कि कांग्रेस कोटे के मंत्रियों में किसी को अपदस्त भी किया जा सकता था.

जाहिर है इसके बाद लॉबिंग भी शुरू हो गयी थी. कहा यह जा रहा था कि कांग्रेस के कई विधायक दिल्ली भी जा सकते हैं. लेकिन अभी तक कोई विधायक दिल्ली नहीं गये हैं.

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जैसे ही 12 वें मंत्री को लेकर बाजार गरम हुआ ठंडे बस्ते में पड़े बोर्ड-निगमों के गठन और 20 सूत्री कार्यान्वयन समिति को लेकर भी लॉबिंग शुरू हो गयी थी. लेकिन किसी भी मामले को लेकर कोई बात अबतक नहीं हुई है.

अब भी यह मामला ठंडे बस्ते में ही है. कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष सहित कई नेता झामुमो के बयान के बाद प्रदेश नेतृत्व से इस बात का खुलासा करने की मांग करने लगे कि सरकार गठन के समय मंत्री पद को लेकर क्या फार्मूला तय हुआ था.

जानकारी के अनुसार प्रदेश नेतृत्व को लेकर कांग्रेस में अंदरूनी कलह शुरू हो गया है. कहा यह जा रहा है कि पार्टी के कुछ विधायक बहुत जल्द दिल्ली दरबार में प्रदेश नेतृत्व के खिलाफ मोर्चा खोलेंगे.

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