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कांग्रेस ने तीन तलाक बिल स्टेंडिंग कमेटी के पास भेजने की मांग की  

संसद के शीतकालीन सत्र की कार्यवाही गुरुवार को शुरू होते ही लोकसभा में मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने राफेल डील पर हंगामा शुरू कर दिया.

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NewDelhi : संसद के शीतकालीन सत्र की कार्यवाही गुरुवार को शुरू होते ही लोकसभा में मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने राफेल डील पर हंगामा शुरू कर दिया. बाद में लोकसभा में पेश होने वाले तीन तलाक बिल पर कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि हम चर्चा में भाग लेंगे और अपनी बात रखेंगे. सरकार से अपील करेंगे कि उसे धार्मिक मामलों में दखल नहीं देना चाहिए; इस क्रम में तीन तलाक बिल पर कांग्रेस ने मांग की कि इसे स्टेंडिंग कमेटी के पास भेजा जाये. लोकसभा में राफेल सौदे, कावेरी मामले और आंध्र प्रदेश को विशेष राज्य के दर्जे की मांग को लेकर कांग्रेस, अन्नाद्रमुक और तेलुगू देशम पार्टी (तेदेपा) के सदस्यों के हंगामे के कारण सदन की कार्यवाही एक बार दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गयी. बाद में कार्यवाही शुरू होते ही फिर इन मुद़दों पर हंगामा होना शुरू हो गया. इसके बाद दोबारा लोकसभा दोपहर दो बजे तक स्थगित कर दी गयी.

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उम्मीद है कि दो बजे के बाद तीन तलाक विधयेक को चर्चा के लिए पेश किया जा सकता है. बता दें कि सत्र के पहले दो सप्ताह हंगामे की भेंट चढ़ गये हैं. क्योंकि विपक्ष ने राफेल सौदे समेत विभिन्न मुद्दों पर कार्यवाही में व्यवधान उत्पन्न किया; बता दें कि भाजपा और कांग्रेस ने लोकसभा के अपने सदस्यों को व्हिप जारी कर चर्चा के दौरान सदन में उपस्थित रहने के लिए कहा है.

17 दिसंबर को तीन तलाक बिल कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने पेश किया था

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बता दें कि सरकार और विपक्ष पिछले सप्ताह मुस्लिम महिला (विवाह संरक्षण अधिकार) विधेयक 2018 पर चर्चा पर सहमत हुए थे, जिसे विवाहित मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों और उनके पतियों द्वारा तलाक बोलकर तलाक लेने पर रोक लगाने वाले पहले के जारी अध्यादेश से बदला जायेगा. अध्यादेश सितंबर में लाया गया था, जिसके अंतर्गत त्वरित तीन तलाक को भारतीय दंड संहिता के तहत अपराध माना गया था. सरकार इस विधेयक को पिछले हफ्ते पास कराना चाहती थी, लेकिन कांग्रेस और अन्य विपक्षी पार्टियों द्वारा राफेल सौदे पर संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) से जांच समेत अन्य मांगों की वजह से यह नहीं हो सका. लोकसभा में कांग्रेस के नेता मल्लिकाजुर्न खड़गे ने सलाह देते हुए कहा था कि इस विधेयक को क्रिसमस अवकाश के बाद लाया जाये और चर्चा में अपने पार्टी सदस्यों के भाग लेने का आश्वासन दिया था.

विधेयक को 17 दिसंबर को हंगामे के बीच केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने पेश किया था. सरकार इस विधेयक को पारित करवाना चाहती है क्योंकि यह अप्रैल-मई 2019 में होने वाले लोकसभा चुनावों से पहले अंतिम पूर्णकालिक संसदीय सत्र है.

 

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