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कांग्रेस के लिए सेफ सीट मानी जानी वाली रांची में हार के लिए महागठबंधन और पार्टी कार्यकर्ता भी कम जिम्मेवार नहीं

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अपने प्रभाव वाले क्षेत्रों में महागठबंधन से जुड़े नेताओं ने दिखायी कांग्रेस के प्रति कम रूचि

कांग्रेस कार्यकर्ताओं की भूमिका भी सवालों के घेरे में

चुनाव के दौरान कई बूथों में नहीं पहुंचे पार्टी कार्यकर्ता

Ranchi: लोकसभा चुनाव में मिली करारी हार के बाद कांग्रेस के अंदर ही बगावत शुरू हो गयी है. रांची जिला स्तर के कई कार्यकर्ता अब प्रदेश नेतृत्व पर ही सवाल खड़े कर रहे हैं.

वे लोकसभा में मिली हार का भी ठीकरा भी प्रदेश अध्यक्ष रहे डॉ अजय कुमार पर ही फोड़ रहे हैं. नाराज कार्यकर्ताओ का तर्क है कि रांची सीट को पार्टी पूरी तरह से सेफ मान कर चल रही थी, लेकिन उनके इस सीट पर कम ध्यान देने से पार्टी को हार का सामना करना पड़ा.

सुबोध कांत के साथ कांग्रेस और महागठबंधन के नेता (फाइल फोटो)

इस सीट से कांग्रेस नेता और महागठंबधन उम्मीदवार सुबोधकांत सहाय को बीजेपी उम्मीदवार संजय सेठ ने करीब पौने तीन लाख वोटों के अंतर से करारी शिकस्त दी है. हालांकि अब डॉ. अजय ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है.

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लेकिन पार्टी के कुछ नेताओं की मानें, तो सुबोधकांत सहाय के इस करारी हार के पीछे बीजेपी की चुनावी रणनीति के साथ ही महागठबंधन (जेएमएम और जेवीएम) और पार्टी के कुछ कार्यकर्ता भी कम जिम्मेवार नहीं रहे हैं.

चुनाव प्रचार के दौरान सिल्ली से जेएमएम के पूर्व विधायक अमित महतो सुबोधकांत के साथ

उनका कहना है कि अपने कब्जे वाले पांच विधानसभा सीटों (रांची, खिजरी, ईचागढ़, कांके, हटिया) पर तो बीजेपी विधायकों ने काफी मेहनत की. लेकिन जेएमएम के सिल्ली विधानसभा और रांची से जेवीएम के एक कार्यकर्ता की गतिविधियां भी सुबोधकांत के विरोध में देखी गयी.

इसी तरह रांची जिला से जुड़े दो कार्यकर्ता की भूमिका भी सवालों की घेरे में रही. बूथ मैनेजमेंट में हुई गड़बड़ियां और कांके विधानसभा में दोनों उम्मीदवारों को मिले वोट का अंतर भी पार्टी की हार का एक बड़ा कारण बनी.

चुनाव प्रचार के दौरान सुबोधकांत के साथ जेएमएम नेता महुआ माजी और अंतू तिर्की

बीजेपी के चुनावी रणनीति से पार पाना हुआ मुश्किल

संजय सेठ की जीत सुनिश्चित करने के लिए मुख्यमंत्री रघुवर दास ने रांची सीट से पार्टी के सभी विधायकों को स्पष्ट निर्देश था कि वे अपने क्षेत्र में पूरी सक्रियता से काम करें. सभी विधायकों ने भी सीएम के निर्देशों को मानते हुए पार्टी उम्मीदवार की जीत के लिए कड़ी मेहनत की.

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बीजेपी कब्जे वाले पांच विधानसभा में मिले वोटों का अंतर इसका साफ संकेत देता है. वही रांची नगर निगम क्षेत्र अंतर्गत मेयर, डिप्टी मेयर सहित पार्टी समर्थक कई पार्षदों ने भी संजय सेठ की जीत में अहम भूमिका निभायी.

सिल्ली में वोटों का अंतर बता रहा महागठबंधऩ का सच

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जेएमएम कब्जे वाले सिल्ली विधानसभा में जिस तरह से पूर्व विधायक अमित महतो ने सुबोधकांत के पक्ष में चुनावी प्रचार किया. उससे तो यही लग रहा था कि कांग्रेस को यहां महागठबंधन का ज्यादा लाभ मिलेगा.

हरमू मैदान में आयोजित सुबोधकांत के चुनावी सम्मेलन में कांग्रेस, जेवीएम और जेएमएम के नेता

दोनों नेताओं ने मंच साझा कर महागठबंधन के पक्ष में वोट देने की भी अपील की. हालांकि चुनावी नतीजों में सुबोधकांत को संजय सेठ की तुलना करीब 50,591 वोट कम मिले. इससे इस सीट पर महागठबंधऩ द्वारा कांग्रेस को खुला समर्थन देने का सच सामने आया.

वोटों के अंतर से यह साफ हो गया कि सुबोधकांत की हार में सिल्ली विधानसभा ने अहम भूमिका निभायी. सूत्रों का कहना है कि सुबोधकांत के साथ मंच साझा करने वाले जेएमएम के दो नेता नेता अंतु तिर्की और महुआ माजी ने भी केवल चेहरा दिखाने का ही काम किया. जमीनी हकीकत यही रही कि कांग्रेस को वोट दिलाने में ये कभी भी सक्रिय नहीं दिखे.

जेवीएम कार्यकर्ता ने बीजेपी उम्मीदवार के पक्ष में किया प्रचार

जेवीएम के केंद्रीय सचिव राजीव रंजन मिश्रा बीजेपी उम्मीदवार संजय सेठ के पक्ष में चुनाव प्रचार करते दिखे

महागठबंधन के एक घटक जेवीएम ने भी कांग्रेस को समर्थन देने की घोषणा की थी. पिछले लोकसभा चुनाव में करीब 67,000 वोट लाने वाले बंधु तिर्की ने तो अपने पकड़ वाले ग्रामीण इलाकों में सुबोधकांत के पक्ष में कड़ी मेहनत की.

लेकिन जेवीएम के केंद्रीय सचिव राजीव रंजन मिश्रा बीजेपी के पक्ष में प्रचार करते नजर आये. हालांकि उन्होंने बाद में इस बात का खंडन भी किया. लेकिन वायरल हुआ वीडियो और फोटो, रांची संसदीय सीट पर महागठबंधन के सच को बयां करने के लिए काफी है.

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बूथ मैनेजमेंट में दिखी गड़बड़ियां, तो कांके में वोटों का अंतर रहा ज्यादा

पार्टी के एक नेता ने कहा कि सुबोधकांत की हार के पीछे केवल महागठबंधन को ही दोषी मानना सही नहीं है. कांग्रेस कार्यकर्ता भी इसके लिए काफी जिम्मेदार है.

उस नेता का कहना है कि रांची सीट के कांके और रांची विधानसभा में पार्टी के कुछ कार्यकर्ताओ की भूमिका काफी हद तक सवालों के घेरे में है. रांची महानगर के महत्वपूर्ण पद पर जुड़े एक नेता को बूथ मैनेजमेंट का जिम्मा मिला था.

उनके मुताबिक रांची शहर में करीब 900 बूथ उस नेता के जिम्मे था. लेकिन उसमें भी लगभग 600 बूथों पर तो पार्टी कार्यकर्ता उपस्थित ही नहीं थे.

इसी तरह कांके सीट पर सुबोधकांत को संजय सेठ की तुलना में करीब 62,300 वोट कम वोट मिले. जबकि इसी क्षेत्र से वर्तमान में पार्टी के एक जिला स्तरीय अध्यक्ष भी आते है.

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