Main SliderNational

BJP के चीन की कम्यूनिस्ट पार्टी से संबंध, कांग्रेस ने पूछा- 2014 में चीन की ‘द पार्टी स्कूल’ में क्या करने गए थे भाजपा के MP-MLA

विज्ञापन

New Delhi: गलवान घाटी में चीन के साथ सीमा विवाद जारी है. इसको लेकर देश के अंदर सियासत जारी है. बीजेपी और कांग्रेस के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है. इन सब के बीच कांग्रेस ने ट्वीट कर बीजेपी पर सीधा हमला बोला है और पूछा है कि भाजपा के सांसद और विधायक 2014 में चीन क्यों गए थे.

ये भी पढ़ें- ‘पीएम केयर्स फंड में चीनी कंपनियों से मिला 9678 करोड़, चीन के साथ संघर्ष कैसे करेंगे मोदी’

दरअसल, चीन मुद्दे पर राहुल गांधी लगातार सरकार और बीजेपी पर हमला बोल रहे हैं और सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठा रहे हैं. बीजेपी के नेता भी राहुल गांधी और उनकी पार्टी पर हमला कर रहे हैं. बीजेपी के नेता राहुल गांधी को चीन के एजेंट तक बता रहे हैं.

advt

बीजेपी का आरोप

दरअसल, बीजेपी ने आरोप लगाया था कि राहुल गांधी चीन के समर्थन में अपरोक्ष रूप कैंपने चला रहे हैं. राहुल गांधी का चीन से मधुर संबंध है. इसके पीछे तर्क दिया था कि जब 2017 में डोकलाम विवाद चल रहा था तब राहुल गांधी रात के अंधेरे में चीनी राजदूत से मुलाकात की थी. बीजेपी का आरोप था कि कांग्रेस इस बारे में जानकारी छुपाने की कोशिश भी की लेकिन चीनी दूतावास ने उनकी पोल खोल दी. हालांकि दूतावास की वेबसाइट से बाद उसे हटा दिया गया था.

कांग्रेस का पलटवार

बीजेपी के आरोपों पर कांग्रेस ने पलटवार किया है. कांग्रेस ने कहा है कि बीजेपी के चीन की कम्यूनिस्ट पार्टी से संबंध है. कांग्रेस का कहना है कि देश जानना चाहता है कि नवंबर 2014 में BJP के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष के द्वारा चीन की पार्टी सीसीपी के ‘द पार्टी स्कूल’ में एक सप्ताह के अध्ययन के लिए अपने सांसदों/विधायकों का प्रतिनिधिमंडल क्यों भेजा था.

यही नहीं. कांग्रेस ने कहा कि चीन के प्रति प्रधानमंत्री का नर्म रवैया किसी से छिपा हुआ नहीं है. प्रधानमंत्री चीनी राष्ट्रपति की 3 बार मेजबानी करने के बावजूद भी भारत-चीन संबंधों में मित्रता क्यों नहीं ला पाये? प्रधानमंत्री की अधिक यात्राओं ने देश को कूटनीतिक तौर पर मजबूत करने की जगह कमजोर किया है.

कांग्रेस ने पूछा कि चीन की सीसीपी पार्टी के निमंत्रण पर 19 जनवरी 2011 को भाजपा के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन गडकरी चीन के 5 दिवसीय दौरे पर किस उद्देश्य से गये थे? भाजपा को चीन के साथ अपने मित्रतापूर्ण संबंध देश के सामने लाने चाहिए. शायद देश को इन संबंधों का फायदा ही हो जाए.

भाजपा को देश के सामने रखना चाहिए कि 2009 में आरएसएस गैर-राजनीतिक संस्था होने के बावजूद भी चीन की राजनीतिक पार्टी सीसीपी के निमंत्रण पर चीन क्यों गया था?

उस दौरान अरूणाचल प्रदेश और तिब्बत के संवेदनशील मुद्दों पर हुई चर्चा को भी देश के सामने रखना चाहिए.

भाजपा और आरएसएस को मिलने वाले विदेशी चंदे का ब्यौरा देश के सामने रखा जाना चाहिए. भाजपा को स्पष्ट करना चाहिए कि विदेशों से मिलने वाले चंदे का उपयोग कहां-कहां पर किस उद्देश्य के साथ किया गया है?

भाजपा को उसके सहयोगी तथाकथित गैर-राजनीतिक संगठन आरएसएस को मिलने वाले दान की सूची सार्वजनिक करनी चाहिए. इसके साथ भाजपा को सभी दानदाताओं की सूची के साथ दानराशि की सूची भी सार्वजनिक कर देश के सामने आरएसएस को मिलने वाले विदेशी चंदे की पारदर्शिता लानी चाहिए.

advt
Advertisement

5 Comments

Leave a Reply

Your email address will not be published.

Related Articles

Back to top button