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विस चुनाव से पहले महागठबंधन को लेकर विपक्षी पार्टी में असमंजस की स्थिति बरकरार

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हेमंत सोरेन की बदलाव रैली में व्यस्तता देख पार्टी नेता महागठबंधन पर नहीं दिखा रहे विशेष रूचि

कांग्रेस प्रदेश अध्य़क्ष के बयान से जेएमएम कर सकता है ‘एकला चलो’ की नीति पर विचार

Ranchi: आनेवाले चंद महीनों में ही झारखंड में विधानसभा चुनाव होना है. इसे लेकर जहां सत्तारूढ़ बीजेपी पूरी तरह से चुनावी मोड में आ गयी है.

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और केंद्रीय कार्यकारी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने मुख्यमंत्री रघुवर दास को पार्टी का चेहरा घोषित कर दिया है. वही विपक्षी दलों में महागठबंधऩ को लेकर असमंजस अभी तक बरकरार है.

हालांकि, कांग्रेस ने अपने आंतरिक कलह को नये प्रदेश अध्य़क्ष की नियुक्ति कर सुलझा लिया है. लेकिन महागठबंधन बनाने को लेकर घटक दलों की तरफ से कोशिश नहीं के बराबर है. महागठबंधन बनने की उम्मीद तो उस समय खत्म हो चुकी थी.

जब लोकसभा चुनाव के परिणाम के बाद जेएमएम, कांग्रेस सहित अन्य घटक दलों के कार्यकर्ताओं ने एक-दूसरे पर सहयोग नहीं करने का आरोप लगाया था.

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अब जेएमएम कार्यकारी अध्यक्ष हेमंत सोरेन की 19 अक्टूबर तक बदलाव रैली में व्यस्तता और महागठबंधन नेता को लेकर कांग्रेस प्रदेश अध्य़क्ष रामेश्वर उरांव का ताजा बयान बची हुई उम्मीद पर भी पानी फेर रहा है.

कांग्रेस के नये प्रदेश अध्य़क्ष आलाप रहे अलग राग

लोकसभा चुनाव से पहले झारखंड में बने महागठबंधन में सीट बंटवारे को लेकर हुई बैठक में सभी घटक दलों ने एकमत से यह माना था कि लोकसभा चुनाव में कांग्रेस जहां अधिक सीटों पर चुनाव लड़ेगी. वहीं विधानसभा चुनाव में हेमंत सोरेन महागठबंधन का चेहरा होंगे.

कांग्रेस विधानसभा के बड़े भाई की भूमिका निभाएगी. इसके लिए कांग्रेस सहित सभी दलों ने लिखित समझौता किया था. इसको ध्यान में रख हेमंत सोरेन ने कहा था कि उनकी पार्टी 41 सीटों पर चुनाव लड़ेगी.

लेकिन अब कांग्रेस के नये प्रदेश अध्यक्ष रामेश्वर उरांव ने हेमंत सोरेन को अभी से ही महागठबंधन का नेता मानने से इनकार कर दिया है. उन्होंने कहा है कि यूपीए महागठबंधन के सभी दलों की बैठक में यह फैसला लिया जायेगा.

बदलाव रैली में हेमंत तो अन्य घटक दल अपने कार्यक्रमों में व्यस्त

जेएमएम के एक विश्वस्त सूत्रों का मानना है कि हेमंत सोरेन आगामी 19 अक्टूबर तक अपने बदलाव रैली सह आम सभा में काफी व्यस्त है.

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यह रैली 24 जिलों में पांच चरणों में पूरी की जायेगी. रैली को लेकर पार्टी के सभी केंद्रीय पदाधिकारी, सदस्यों सहित स्वयं हेमंत सोरेन काफी व्यस्त हैं.

इनका कहना है कि हेमंत महागठबंधऩ बनाने से ज्यादा पार्टी की मजबूती पर ध्यान देख रहे हैं. महागठबंधन के अऩ्य सभी घटक दलों की स्थिति से वे पूरी तरह वाकिफ है.

महागंठबधन बनने पर कांग्रेस की आंतरिक कलह और जेवीएम नेताओं की उदासीनता का नुकसान कहीं जेएमएम को नहीं हो, इसके लिए हेमंत पूरे एक माह से अधिक समय तक बदलाव रैली में व्यस्त हैं.

वही कांग्रेसी नेता भी अपने स्तर पर काम कर रहे हैं. नये प्रदेश अध्य़क्ष रामेश्वर उरांव जहां गिरिडीह सहित अन्य जिला मुख्यालय का दौरा कर रहे हैं, तो नये पांच कार्यकारी अध्य़क्ष अपने-अपने क्षेत्र में (इरफान अंसारी जामताड़ा में, राजेश ठाकूर बोकरो में) व्यस्त हैं.

वहीं जेवीएम और आरजेडी की भी महागठंबधन बनाने पर कोई रूचि नहीं दिख रही है. गौरतलब है कि आरजेडी ने तो रविवार को पार्टी का संकल्प पत्र जारी कर दिया है.

कांग्रेसी नेता कर रहे किनारा, तो JMM नेता जता रहे नाराजगी

रामेश्वर उरांव के बयान और महागठबंधन बनने को लेकर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कुछ भी कहने से परहेज कर रहे हैं. पार्टी विधायक दल के नेता आलमगीर आलम से जब न्यूज विंग ने बात की, तो उन्होंने कहा कि इसपर अभी वे कुछ बोलने की स्थिति में नहीं हैं. प्रदेश अध्य़क्ष से बातचीत करने के बाद ही वे कुछ बोल पाएंगे.

वहीं जेएमएम प्रवक्ता सुप्रियो भट्टाचार्य ने रामेश्वर उरांव को नसीहत देते हुए कहा कि उन्हें ऐसा कहने से पहले पार्टी आलाकमान से जानकारी लेनी चाहिए.

पहले ही एक लिखित प्रस्ताव में कांग्रेस ने हस्ताक्षर कर विधानसभा चुनाव में हेमंत सोरेन को नेता मान लिया गया है. ऐसे में अपरिपक्व बयानबाजी करने से पहले प्रदेश अध्यक्ष को शीर्ष नेतृत्व से बातचीत कर लेते, तो बेहतर होता.

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