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ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय में पुरातत्वविद बी बी लाल के निधन पर शोक सभा का आयोजन,

Darbhanga:  सोमवार को ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के प्राचीन भारतीय इतिहास पुरातत्व एवं संस्कृति विभाग में प्रख्यात पुरातत्वविद व पद्म विभूषण से सम्मानित रहे बृज बासी लाल के निधन पर श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया. 10 सितंबर 2022 को प्रो. बी बी लाल का निधन हो गया था. प्रोफेसर लाल को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ अयोध्या नाथ झा ने कहा कि प्रोफेसर लाल 1968 से 1972 ई० तक भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के महानिदेशक रहे, तत्पश्चात इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ एडवांस्ड स्टडी शिमला के डायरेक्टर एवं यूनेस्को के संस्कृति और पुरातत्व से जुड़े अनेक महत्वपूर्ण समितियों के सदस्य रहे. सिंधु घाटी सभ्यता, महाभारत, कालीबंगा और रामायण पर पुरातत्व की दृष्टिकोण से अनेकों उल्लेखनीय कार्य इन्होंने किया. सबसे पहले अयोध्या में राम मंदिर होने का सबूत भी इन्होंने ही प्रस्तुत किया था तथा अयोध्या में बाबरी मस्जिद के नीचे मंदिर मौजूद होने की खोज को लेकर प्रोफेसर लाल सबसे ज्यादा चर्चा में रहे. रामायण से संबंधित अयोध्या, भारद्वाज आश्रम, श्रृंगवेरपुर, नंदीग्राम और चित्रकूट जैसे महत्वपूर्ण पुरास्थलों की खुदाई इनके दिशा-निर्देश में हुआ. हस्तिनापुर, शिशुपाल गढ़, पुराना किला दिल्ली, कालीबंगा सहित कई स्थलों की खुदाई इन्होंने करवाए.

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पुरातत्व विषय के शोधार्थी मुरारी कुमार झा ने उन्हें श्रद्धांजलि ज्ञापित करते हुए कहा कि- “मेरा जीवन इनसे प्रेरित रहा है. प्रो बी बी लाल सर का कहना था, जीवन में निरंतरता, लगन, एकाग्रता और बुद्धिमता सबसे आवश्यक है। वे भारतीय पुरातत्व के भीष्म पितामह थे। जीवन के अंतिम वर्षों तक वे हमलोगों का मार्गदर्शन करते रहे, इसके लिए मैं खुद को सौभाग्यशाली मानता हूं। पुण्यात्मा के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित करते हुए, मैं उन्हें अश्रुपूरित श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं.

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अतिथि शिक्षिका प्रतिभा किरण ने कहा कि भारतीय पुरातत्व के क्षेत्र में इनके द्वारा किए गए उल्लेखनीय कार्यों के कारण वे विश्व पटल पर उदिप्यमान नक्षत्र की तरह चमकते रहेंगे. अपने अविस्मरणीय देनों से पुरातत्व को इन्होंने समृद्ध किया, इसके साथ ही अन्य क्षेत्रों में दिए गए इनके योगदानों को विस्मृत नहीं किया जा सकता है. इनका जाना पुरातत्व के क्षेत्र में अपूरणीय क्षति है. विभागीय शोधार्थी पूर्णिमा कुमारी ने कहा कि- “प्रो लाल सर के द्वारा किए गए कार्यों से हम नवीन आगंतुकों को सीख लेकर आगे सुनियोजित तरीके से शोधकार्य करनी चाहिए। पुरातत्व के क्षेत्र में योगदान के लिए ये सदा सर्वदा याद किए जाएंगे. इसके अलावे शोधार्थी अभय चंद्र यादव, चंद्र प्रकाश, गोविंद नारायण झा, प्रभाकर चौधरी, गौतम प्रकाश, सुभाष कुमार, ज्योत्षना कुमारी, जेवा प्रवीण, सगुफ्ता प्रवीण, रश्मि कुमारी, नीरेंद्र कुमार, विभाष कुमार, मनोज राम आदि विभागीय छात्र-छात्रा, शोधार्थी एवं कर्मचारी मौजूद रहे.

कौन थे बी बी लाल
प्रोफेसर बी बी लाल का जन्म 02 मई 1921 ई. को झांसी में हुआ था. पुरातत्व के क्षेत्र में विशिष्ट योगदान के लिए 2020 ईस्वी में इन्हें पद्मभूषण और 2021 ईस्वी में पद्म विभूषण पुरस्कार से भारत सरकार ने सम्मानित किया गया था. प्रो लाल के 150 से अधिक शोध आलेख एवं दर्जनों किताबें प्रकाशित हैं. इन्होंने 1944 ई० में व्हीलर महोदय के साथ तक्षशिला उत्खनन में भी कार्य किया था, जो उनके व्यक्तित्व निर्माण में मील का पत्थर साबित हुआ

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