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Jharkhand News : नयी शराब पॉलिसी में नहीं पूरी की गयी एक्साइज एक्ट की शर्तें, बगैर रेवन्यू बोर्ड की अनुमति के कैबिनेट से हुआ पास

Akshay Kumar Jha

 

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Ranchi: सरकार ने राज्य में थोक शराब बिक्री के लिए नयी शराब पॉलिसी बनायी. पॉलिसी बनाकर इसे कैबिनेट से पारित भी करा लिया गया. नयी शराब पॉलिसी बनते ही झारखंड राज्य बेवरेज कॉरपोरेशन भंग हो गया. शराब का सारा व्यापार प्राइवेट प्लयर्स को सौंप दिया गया. खुदरा शराब के अलावा अब थोक शराब व्यापार भी निजी हाथों में चला गया.

एक तरह से पूरे शराब व्यापार पर सिंडीकेट राज्य कायम होना तय माना जा रहा है. इतना ही नहीं इस नयी शराब पॉलिसी को बनाने में झारखंड एक्साइज एक्ट 2015 का भी उल्लंघन किया गया. झारखंड एक्साइज एक्ट 2015 के तहत ही राज्य में शराब नीति तैयार होती है. इसी एक्ट के नियमों के मुताबिक उत्पाद विभाग काम करता है. नयी शराब पॉलिसी बनाने में भी इसी एक्ट की भूमिका है. लेकिन शराब की नयी पॉलिसी बनाने में झारखंड एक्साइज एक्ट 2015 का उल्लंघन विभाग और सरकार की तरफ से किया गया.

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रेवेन्यू बोर्ड से नहीं ली अनुमति और कैबिनेट से हुआ पास

झारखंड एक्साइज एक्ट 2015 के नियम और कायदों की बात करें तो सरकार या विभाग किसी भी तरह का टैक्स लगाने के लिए स्वतंत्र है. लेकिन जब बात फीस की आती है, तो रेवन्यू बोर्ड से अनुमति लेना अनिवार्य होता है. दरअसल फीस लेने के एवज में सरकार या विभाग को सर्विस मुहैया कराना पड़ता है. शराब पॉलिसी बनाने में भी कई तरह के फीस विभाग की तरफ से निर्धारित किए गए. खास कर आवेदन शुल्क जो 25 लाख का था और साथ ही ननरिफनडेबल.

 

यानी जो भी थोक शराब व्यापार के लिए आवेदन करना चाह रहा था, उसे 25 लाख रुपए सिर्फ आवेदन शुल्क के देने पड़े. काम नहीं मिलने की सूरत में यह पैसा आवेदनकर्ताओं का डूब गया. झारखंड एक्साइज एक्ट 2015 के नियम 90 के मुताबिक अगर विभाग टैक्स के अलावा किसी तरह की फीस निर्धारण में बदलाव करता है, तो उसे रेवन्यू बोर्ड की अनुमति लेने अनिवार्य होता है. लेकिन शराब की नयी पॉलिसी बनाने में ऐसा नहीं किया गया. बगैर रेवन्यू बोर्ड के सदस्य की अनुमति के ही इस पॉलिसी को कैबिनेट में रखा गया और पास भी करा लिया गया.

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मेरे कार्यकाल में फाइल नहीं आयीः एपी सिंह (सदस्य, राजस्व पर्षद)

 

इस मामले पर न्यूज विंग ने राजस्व पर्षद के सदस्य एपी सिंह से बात की. उन्होंने बताया कि उनके कार्यकाल में शराब नीति से जुड़ी फाइल उनके कार्यालय नहीं आयी. ना ही उनकी तरफ से अनुमति दी गयी है. कहा कि अगर मैं यहां फरवरी महीने से हूं. फरवरी से लेकर अबतक फाइल उनके पास नहीं आयी है. उनके यहां आने से पहले अगर फाइल आयी होगी तो उन्हें इस बात की जानकारी नहीं है.

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