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नियुक्ति वर्ष का हाल (2) : पेच सरकार का, दांव पर युवाओं का भविष्य

Rahul Guru

Ranchi : राज्य में लाखों की संख्या में युवा रोजगार की आस में बैठे हैं. जिस सरकार ने रोजगार देने का वादा किया था उसी ने पेच फंसा रखा है. स्थिति यह है कि एक पेच की वजह से हजारों युवाओं की नौकरी चली गयी, वहीं लाखों यह उम्मीद लगाये हैं कि नियुक्ति का विज्ञापन कब जारी होगा. नियोजन नीति को रद्द करने के बाद से नियुक्ति वर्ष की घोषणा करने वाली सरकार ने बीते पांच माह से यह भी बताना उचित नहीं समझा कि नयी नियोजन नीति कब आने वाली है. पेच सरकार ने फंसा रखा है और युवाओं का भविष्य दांव पर लगा हुआ है.

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क्या है पेच

राज्य में नियुक्ति की एकमात्र पेच नियोजन नीति है. वर्तमान की हेमंत सोरेन सरकार ने पूर्व की रघुवर दास की सरकार में बनी नियोजन नीति को रद्द कर दिया है. इसी साल तीन फरवरी को कैबिनेट की बैठक में रघुवर सरकार काल में बनायी गयी नियोजन नीति को वापस लेने और इसे रद्द कर नयी नीति नियोजन नीति लाने की घोषणा की है. इस निर्णय को लिए पांच महीने हो चुके हैं. नियोजन नीति को लेकर सरकार का रुख अब क्या होगा यह स्पष्ट नहीं है. यही वजह है कि सरकार के विभागों में लाखों पद खाली पड़े हैं और यहां के युवा बेरोजगार बैठे हैं. आंकड़े बताते हैं कि राज्य में आठ लाख से अधिक रजिस्टर्ड बेरोजगार हैं.

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खामियाजा भुगत रहे युवा

हेमंत सोरेन की सरकार ने जिस नियोजन नीति को रद्द किया उसका सीधा खामियाजा उन हजारों युवाओं को भुगतना पड़ा जो चयन प्रक्रिया की पहली कड़ी यानी प्रारंभिक परीक्षा देने के बाद रिजल्ट का इंतजार कर रहे थे. इनकी चयन प्रक्रिया नियोजन नीति के रद्द होते ही स्वतः समाप्त हो गयी. इसके अलावा हाईस्कूल शिक्षक नियुक्ति के उम्मीदवार और पंचायत सचिव पद के उम्मीदवार भी नियोजन नीति रद्द होने के शिकार हुए हैं. दोनों ही परीक्षाओं के सफल उम्मीदवारों की संख्या 10 हजार से ऊपर है.

इनकी नियुक्ति प्रक्रिया हुई रद्द

झारखंड उत्पाद सिपाही प्रतियोगिता परीक्षा 2018

इस परीक्षा के लिए 26 दिसंबर 2018 से 09 फरवरी 2019 तक आवेदन लिये गये थे. यह प्रतियोगिता परीक्षा 518 पदों पर नियुक्ति के लिए ली गयी थी, जिसमें अनारक्षित श्रेणी के लिए 264, अनुसूचित जनजाति के लिए 138, अनुसूचित जाति के लिए 50, अत्यंत पिछड़ा वर्ग के लिए 22 और पिछड़ा वर्ग के लिए 44 पद निर्धारित थे. वहीं महिलाओं के लिए 13 पद अतिरिक्त थे. यह परीक्षा 04 अगस्त 2019 को ली गयी थी. लेकिन परीक्षा लिये 18 महीने बीत जाने के बाद भी अब तक रिजल्ट प्रकाशित नहीं किया गया है.

विशेष सेवा आरक्षी (क्लोज कैडर) प्रतियोगिता परीक्षा 2018

इस पद पर बहाली के लिए 04 जनवरी 2019 से ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया शुरू हुई थी जो 18 फरवरी तक चली थी. 1012 पदों के लिए यह आवेदन जारी किया गया था. इसमें अनारक्षित श्रेणी के लिए 506, अनुसूचित जनजाति के लिए 263, अनुसूचित जाति के लिए 101, अत्यंत पिछड़ा वर्ग के लिए 81 और पिछड़ा वर्ग के लिए 61 पद निर्धारित थे. यह परीक्षा 01 सितंबर 2019 को रांची के 72 केंद्रों में ली गयी थी. इस परीक्षा में लगभग 35 हजार उम्मीदवार शामिल हुए थे. इस प्रतियोगिता परीक्षा का भी अब तक रिजल्ट जारी नहीं किया गया है.

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कारा वाहन चालक प्रतियोगिता परीक्षा 2018

राज्य के विभिन्न जेलों में चालकों की नियुक्ति के लिए 2018 में आवेदन मंगाये गये थे. इस विज्ञापन से लाइट मोटर व्हीकल चालक के 73 और हेवी मोटर व्हीकल चालक के 11 पदों पर नियुक्ति होनी थी. एलएमवी के 73 पदों में से अनारक्षित कोटे के लिए 37, अनुसूचित जनजाति के लिए 19, अनुसूचित जाति के लिए 07, अत्यंत पिछड़ा वर्ग के लिए 06 और पिछड़ा वर्ग के लिए 04 पद निर्धारित थे. वहीं एचएमवी के 11 पदों में से अनारक्षित कोटे के लिए 06, अनुसूचित जनजाति के लिए 03, अनुसूचित जाति के लिए 01 और अत्यंत पिछड़ा वर्ग के लिए 01 पद थे. यह प्रतियोगिता परीक्षा साल 2019 में ही ली गयी लेकिन अब तक स्टूडेंट्स रिजल्ट का ही इंतजार कर रहे हैं.

इंटर स्तरीय संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा-2017

इस प्रतियोगिता परीक्षा के माध्यम से राज्य के पंचायतों में पंचायत सचिव और लिपिक की नियुक्ति होनी है. विज्ञापन जारी होने के बाद परीक्षा ली गयी. सितंबर 2017 में डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन हुआ था. लेकिन, आज तक नतीजे घोषित नहीं किये गये. इस प्रतियोगिता परीक्षा के माध्यम से तीन हज़ार से अधिक उम्मीदवारों की नियुक्ति होनी है.

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क्या थी पुरानी नियोजन नीति

14 जुलाई, 2016 को राज्य सरकार की ओर से एक अधिसूचना जारी कर नियोजन नीति लागू की गयी थी. नियोजन नीति के अंतर्गत 13 जिलों को अनुसूचित और 11 जिलों को गैर अनुसूचित जिला घोषित कर दिया गया था. नियोजन नीति के अंतर्गत अनुसूचित जिलों की ग्रुप सी और डी की नौकरियों में वहीं के निवासियों की नियुक्ति का प्रावधान किया गया था. यानी अनुसूचित जिलों की नौकरियों के लिए वही लोग अप्लाई कर सकते थे और नियुक्ति पा सकते थे जो इन जिलों के निवासी थे. इन जिलों की नौकरियों को यहीं के निवासियों के लिए पूरी तरह से आरक्षित कर दिया गया था, जबकि गैर अनुसूचित जिलों की नौकरियों के लिए हर कोई अप्लाई कर सकता था. राज्य सरकार ने यह नीति दस साल के लिए बनायी थी.

 

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