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हाल रिम्स का : खराब पड़ी वेंटिलेटर मशीनों को कपड़े से ढंक कर और नयी मशीनों को कमरों में बंद कर रखा जाता है

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Ranchi : राज्य के सबसे बडे हॉस्पिटल रिम्स में प्रतिदिन 300 से 400 मरीज इलाज कराने आते हैं. इनमे कई ऐसे होते हैं जो गंभीर अवस्था में हॉस्पिटल आते हैं, इन्हें तत्काल इलाज की जरूरत पड़ती है. ऐसे मरीजों को कृत्रिम सांस की भी जरूरत पड़ सकती है. इस तरह के मरीजों को वैंटिलेटर पर रखा जाता है. लेकिन राज्य के निवासियों का यह बड़ा दुर्भाग्य है कि 370 करोड़ रुपए के बजट वाले इस हॉस्पिटल की अधिकतर वेंटिलेटर मशीन ही खराब है. वहीं जो अच्छे और चलने योग्य मशीने है उन्हें कमरे में बंद कर के रखा गया है.  न्यूज विंग संवाददाता ने जब इसकी पड़ताल की तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आये. मेडिसीन एवं सर्जरी आईसीयू में एक कमरा सदैव बंद रहता है. जब इसमे लगा ताला खुलवा कर देखा गया तो अंदर बिल्कुल नई वेंटिलेटर मशीन धूल फांकती दिखी. इन मशीनों को कई वर्षों से कमरे में बंद कर रखा गया है. जब वार्ड इचांर्ज से पूछा गया तो उसने इस संबंध में किसी तरह की जानकारी नही होने की बात कही. रिम्स सुपरीटेंडेंट डॉ विवेक कश्यप ने भी इस मामले की जानकारी से इनकार किया.

सभी मरीजों को नहीं मिल पाती वेंटिलेटर मशीनों की सुविधा 

गंभीर मरीजों को डॉक्टर वेंटिलेटर पर रखने की सलाह तो दे देते हैं, लेकिन सभी मरीजों को ये सुविधा नहीं मिल पाती है. आईसीयू में लगे वेंटिलेटर मशीनों के खराब होने के कारण इन्हें कपड़ो से ढक कर रख दिया गया है. रिम्स के मेडिसीन, सर्जरी और न्यूरो के आईसीयू में लगभग 20 वेंटिलेटर हैं. इनमें से अधिकतर हमेशा खराब रहते हैं. वेंटिलेटर मशीन खराब होने के कारण या तो मरीज की मौत हो जाती है या फिर उन्हें यहां से छुट्टी कर दी जाती है. वार्ड इंचार्ज ने इस संबंध में बताया कि बार-बार प्रबंधन से इसकी शिकायत करने पर भी ठीक नहीं किया जाता. कभी-कभार कंपनी के कुछ लोग आते हैं मशीनों को देख कर चले जाते हैं. दरअसल ये मशीने काफी पुरानी हो चुकी हैं और मरम्मती के बाद भी ठीक नहीं होतीं. ऐसे में मरीजों के साथ-साथ हमें भी परेशानी होती है.

वेंटिलेटर खराब होने के कारण कई बार नहीं बच पाती मरीज की जान 

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वेंटिलेटर को जीवन रक्षक मशीन भी कहा जाता है. कई बार वेंटिलेटर मशीन की वजह से गंभीर मरीज की भी जान बच जाती है. करोड़ों रुपए के बजट वाले राज्य के सबसे बडे हॉस्पिटल रिम्स में मशीन खराब होने के कारण मरीजों की मृत्यु भी हो जाती है. हांलाकी वार्ड की इचांर्ज बताती है वेंटिलेटर की मदद से रिम्स से भी गंभीर मरीजों को स्वस्थ्य करके भेजा गया है.

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