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प्रवासियों की चिंता : कोरोना के खौफ ने घर तो पहुंचा दिया, लेकिन कैसे चलेगी जिंदगी की गाड़ी  

Jamshedpur : कोरोना के तेजी से बढ़ते मामलों और सरकारों की तरफ से बढ़ायी जा रही पाबंदियों के बीच दूसरे शहरों से प्रवासी श्रमिक और नौकरीपेशा लोग अपने-अपने घरों की ओर लौटने लगे हैं. इस बीच बाजार की मंदी ने कईयों की नौकरी पर भी ग्रहण लगा दिया है. टानगर स्टेशन पर हर दिन प्रवासी मजदूर महानगरों से लौट रहे हैं. कुछ की नौकरी चली गयी, तो कुछ लोगों को बाद में नौकरी पर बुलाने का आश्वासन देकर घर भेज दिया गया.

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पोटका प्रखंड के हाता के रहने वाले रंजीत मंडल को अपनी पत्नी और बच्चों के साथ दानापुर से लौटना पड़ा. रंजीत आठ साल से एक प्लास्टिक फैक्ट्री में सुपरवाइजर की नौकरी करते थे, लेकिन कंपनी बंद हो जाने के चलते उन्हें परिवार लेकर लौटना पड़ा. अब वे कुछ दिन अपने शहर में रहने के बाद दोबारा काम की तलाश में महानगर का रुख करेंगे. शनिवार शाम को ही उत्कल एक्सप्रेस से राजेश्वर और महेश्वर दास नाम के दो भाई वाराणसी से नौकरी छोड़कर आ गये. दोनों एक कंस्ट्रक्शन कंपनी में काम करते थे. कोरोना काल में कामकाज प्रभावित हुआ, तो ठेकेदार ने यह कहकर घर भेज दिया कि काम मे तेजी आयेगी तो उन्हें बुला लिया जायेगा. वहीं, राउरकेला से लौटने वाले महेंद्र गिलुवा कोरोना के बढ़ते संक्रमण को देखते हुए पत्नी और दुधमुंहे बच्चे को लेकर लौट आये. नीमडीह के रहने वाले महेंद्र का कहना है कि कोरोना की सख्ती ने इतना डरा दिया कि बच्चे की जान बचाने के लिए आना पड़ा. महेंद्र फैक्ट्री में काम करता है. वह दो माह बाद नौकरी पर लौट आने की बात कहकर आया है. घर लौट रहे प्रवासी श्रमिकों को रोजगार देने के मसले पर जुगसलाई नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी जेपी यादव का कहना है कि श्रमिकों का ऑनलाइन निबंधन कराया जा रहा है.  उन्हें निर्माण कार्यों से जोड़ा जा रहा है, जिससे उन्हें रोजगार मिल सके.

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