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देवघर के तत्कालीन सिविल सर्जन व सारवां सीएचसी के तत्कालीन प्रभारी के खिलाफ परिवाद दायर

Deoghar: शहर के गोविन्द खवाड़े लेन निवासी मनोज कुमार मिश्र ने तत्कालीन सिविल सर्जन डॉ विजय कुमार व तत्कालीन प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सारवां डॉ सुनील कुमार सिंह के खिलाफ मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी के न्यायालय में एक वाद दाखिल कर कार्रवाई की मांग की है.

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अपने परिवाद में उन्होंने लिखा है कि वह स्वास्थ्य विभाग देवघर में लैब टेक्निशियन के पद पर कार्यरत हैं और वर्तमान में ब्लड बैंक देवघर में प्रतिनियुक्त हैं. अभियुक्त गण लोक सेवक हैं तथा परिवादी के वरीय पदाधिकारी हैं. विधिक रुप से परिवादी के हित के संरक्षक हैं. परिवाद को कार्य के दौरान संवैधानिक रूप से हानि पहुंचाने के लिए काफी लंबे समय से शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित करते रहे हैं.

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डॉ सुनील कुमार सिंह ने पत्रांक 186 दिनांक 23 फरवरी 19 के द्वारा स्पष्टीकरण पूछा. पुनः पत्रांक 190 दिनांक 23 फरवरी 19 के द्वारा सारवां थाना में परिवादी के खिलाफ सनहा दर्ज कर अनुसूचित जाति के कर्मचारियों को भड़काने व आदेशों की अवहेलना, गुंडागर्दी तथा वादी के खिलाफ राजनीति करने के संबंध में सनहा दर्ज किया. पुनः पत्रांक 208 दिनांक 26 फरवरी 19 के द्वारा परिवादी के खिलाफ विभाग में शिकायत पत्र भेजा.

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पत्रांक 190 और 208 के आलोक में स्वास्थ सचिव के पत्रांक 185 दिनांक 7 मार्च 19 को सारवां से अन्यत्र स्थानांतरित करने का निर्देश दिया. जिसके आलोक में सिविल सर्जन डॉ विजय कुमार ने पत्रांक 413 दिनांक 9 मार्च 19 के द्वारा परिवादी का स्थानांतरण सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सारठ किया. परिवादी ने इसके खिलाफ उच्च न्यायालय में जब डबल्यूपीएस नंबर 1306/2019 दायर किया. जिसमें दिनांक 29 अगस्त 19 को पारित आदेश में परिवादी द्वारा लगाए गए आरोपों की जांच कर परिवादी को परेशान करने वाले पदाधिकारी पर कार्यवाही करने का आदेश सिविल सर्जन देवघर को दिया गया.

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सिविल सर्जन देवघर के पत्रांक 1904 दिनांक 12 अक्टूबर 19 के द्वारा 3 सदस्य समिति गठित कर जांच कराई गई. जांच समिति द्वारा दिनांक 3 दिसंबर 19 को समर्पित जांच प्रतिवेदन में क्रमांक एक से पांच तक परिवार में परिवादी के ऊपर लगाए गए आरोपों को गलत पाया गया.

क्रमांक सात में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सारठ में पद स्वीकृत नहीं होने की बाद बताई गई. जांच प्रतिवेदन के आलोक में सिविल सर्जन देवघर के पत्रांक 7 दिनांक 6 जनवरी 20 के द्वारा एक सफाई कर्मी को सेवा मुक्त किया गया. तत्कालीन सिविल सर्जन विजय कुमार ने पत्रांक 137 दिनांक 27 जनवरी 20 के द्वारा 3 सदस्य समिति के रिपोर्ट को खारिज कर पुनः दिनांक 30 जनवरी 20 को स्वयं जांच किया. पत्रांक 179 दिनांक 3 फरवरी 20 के द्वारा भेजे गए प्रतिवेदन में 3 सदस्य समिति के प्रतिवेदन को पलटते हुए परिवादी के खिलाफ प्रतिवेदन विभाग को भेजा गया. जिसमें परिवादी के खिलाफ वहां के कर्मचारियों द्वारा संयुक्त हस्ताक्षरित आवेदन को आधार बनाया गया.

सरकार के संयुक्त सचिव के पत्रांक 47 (15) दिनांक 20 फरवरी 20 के द्वारा निदेशक प्रमुख को पत्र भेजकर मनोज कुमार मिश्रा से स्पष्टीकरण पूछते हुए कार्रवाई करने का निर्देश दिया. निदेशक प्रमुख के पत्रांक 703 दिनांक 19 मई 20 के द्वारा स्पष्टीकरण की मांग की गई. जिसका जवाब परिवादी द्वारा भेजा, गया. पुनः स्वास्थ्य निदेशालय के पत्रांक 1255 दिनांक 14 जुलाई 21 के द्वारा 2 सदस्यी समिति का गठन किया गया. जांच समिति द्वारा समर्पित जांच प्रतिवेदन में परिवादी को आरोप मुक्त करने की अनुशंसा की गई. जिसके आलोक में स्वास्थ्य निदेशालय के पत्रांक 1358 दिनांक 30 जुलाई 21 के द्वारा परिवादी को आरोप मुक्त करते हुए इसकी प्रति विभाग को कार्रवाई हेतु भेजी गई.

परिवादी द्वारा 9 सितंबर 21 को आउटसोर्सिंग कंपनियों को आवेदन देकर परिवादी के खिलाफ झूठा हस्ताक्षर करने वाले कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई. जिसकी प्रतिलिपि सिविल सर्जन को भी दी गई. आवेदन के आलोक में सिविल सर्जन के पत्रांक 1399 दिनांक 14 सितंबर 21 के द्वारा 3 सदस्य समिति का गठन किया गया. समिति द्वारा दिनांक 26 सितंबर 21 को समर्पित प्रतिवेदन में पंकज  कुमार मिश्रा के ऊपर लगाए गए सभी आरोप बेबुनियाद और मनगढ़ंत पाए गए. जांच समिति द्वारा जांच की रिकॉर्डिंग भी कराई गई थी.

पंकज कुमार मिश्रा ने दोनों पदाधिकारियों के खिलाफ धारा 119, 166, 166 ए, 196, 200, 211 500, 504, 506, 120 बी 34 भा.द.वि. के तहत मामला दर्ज कर कार्रवाई करने की मांग की है. इस बात से स्वास्थ्य महकमे में हड़कंप मचा है.

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