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बच्ची के साथ #BDO द्वारा मारपीट और पुलिस कस्टडी में गगन नायक की मौत पर #NHRC में की गयी #Complain

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Ranchi : बड़कागांव प्रखंड के बीडीओ और उनकी पत्नी द्वारा नाबालिग नौकरानी की पिटाई का मामला राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग पहुंच गया है.

वहीं होटवार थाना में पुलिस कस्टडी में गगन नायक नामक व्यक्ति के मौत की जानकारी भी मानवाधिकार आयोग को दी गयी है. दो अक्टूबर को मानवाधिकार आयोग में शिकायत दर्ज कर दी गयी है.

मानवाधिकार कार्यकर्ता ओमंकार विश्वकर्मा की ओर से इन दोनों मामलों में शिकायत की गयी. दोनों ही मामलों  में मानवाधिकार आयोग से हस्तक्षेप कर कार्रवाई करने की मांग की गयी है.

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बड़कागांव बीडीओ के मामले में आयोग को यह भी जानकारी दी गयी की उक्त नाबालिग बच्ची को पिछले छह माह से बीडीओ ने बंधुआ मजदूर बनाकर रखा था.

बच्ची को एजेंट विनोद कुमार मेहता ने बीडीओ को दिया था. बीडीओ की पत्नी ने बच्ची के परिजनों को घर जाकर एक लाख रुपया दिये था.

कर्मा पूजा के दिन बच्ची को दो सौ रूपये चोरी करने के आरोप में पिटाई की गयी थी. हालत अधिक खराब होने पर बच्ची को बड़कागांव ब्लॉक मोड़ के पास फेंक दिया गया था.

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पुलिस कस्टडी में मौत होना संदेहास्पद

गगन नायक की पुलिस कस्टडी में हुई मौत की जानकारी देते हुए आयोग को बताया गया है कि गगन नायक ऑटो चालक था जिसे पिछले तीन माह से पुलिस ने सड़क दुर्घटना के मामले में जेल में रखा था.

पुलिस कस्टडी में गगन नायक की हुई पिटाई से उसकी मौत एक अक्टूबर को हो गयी. अपना पल्ला झाड़ने के लिये पुलिस ने गगन को रिम्स में भर्ती कराया, जहां इलाज के दौरान उसे मृत घोषित किया गया.

गगन के परिजनों को इलाज के दौरान गगन की मौत की खबर दी गयी जहां रिम्स से परिजनों को गगन का शव दिया गया. मामला रांची का है. गगन नायक भाड़ा में ऑटो चलाता था.

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दोषियों के खिलाफ हो न्यायिक कार्रवाई

इस संबध में बताते हुए ओमकार ने कहा कि दोनों ही मामले काफी गंभीर हैं. बड़कागांव मामले से पता चलता है कि राज्य में मानव तस्करी और बंधुवा मजदूरी को कुछ पदासीन लोग ही शह दे रहे है.

उन्होंने कहा कि हालांकि डीसी की ओर से उक्त मामले में कार्रवाई की जा रही है. लेकिन राज्य में बच्चों के साथ ऐसा होना मानव अधिकारों का उल्लघंन है.

वहीं पुलिस कस्टडी में इस तरह निर्दोष की मौत होना काफी गंभीर है. पुलिस अपनी जिम्मेवारी नहीं समझ रही.

ऐसे में गगन नायक के साथ मारपीट में शामिल पुलिस कर्मियों पर प्राथमिकी दर्ज करते हुए कार्रवाई की जाये. उन्होंने कहा कि पुलिस ऐसी कार्रवाई करेगी तो लोगों का उन पर से विश्वास उठ जायेगा.

राष्ट्रीय बाल संरक्षण आयोग ने लिया संज्ञान

इस मामले में राष्ट्रीय बालक अधिकार संरक्षण आयोग की ओर से स्वतः संज्ञान लिया गया. आयोग की ओर से इस संबध में डीसी को पत्र लिया गया है. जिसमें किशोर न्याय अधिनियम 2015 के तहत पुलिस को मुकदमा दर्ज करने, बालक श्रम अधिनियम 1986 के तहत कार्रवाई करने, पीड़िता को बालक श्रम अधिनियम के तहत मुआवजे की जानकारी देने और अभियुक्त के खिलाफ की गयी कार्रवाई की प्रतिलिपि आयोग को भेजने का निर्देश दिया गया है.

आयोग की ओर से डीसी को दस दिनों में कार्रवाई कर जानकारी भेजे जाने का निर्देश दिया गया है. पत्र की एक  कॉपी हजारीबाग श्रमायुक्त को भी भेजी गयी है.

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