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एक दशक बाद भी नहीं मिला बिजली विभाग से मुआवजा

सात मई 2010 को बिजली के चपेट में आकर हुई थी राजेश नायक की मौत

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Bokaro:  बिजली विभाग की लापरवाही से कसमार ब्लॉक के कमलापुर निवासी राजेश नायक की मौत एक दशक पूर्व हुई थी. लेकिन, अभी तक उसके परिजनों को मुआवजा की राशि नहीं मिल सकी है. बिजली विभाग के अधिकारी व कर्मचारी परिजनों को दौड़ा रहे हैं. अब बुढ़े माता-पिता लाचार हो गये हैं. पत्नी यमुना देवी के सामने जीवन पहाड़ बन चुकी है. उनकी बेटी लक्ष्मी कुमारी कस्तुरबा गांधी में पढ़ रही है, तो बेटा आशीष गांव के सरकारी स्कूल में पढ़ रहा है. राजेश घर का कमाने वाला बेटा था, उसकी मौत के बाद पूरा घर बिखर गया. छोटा भाई अभी दिहाड़ी मजदूरी कर घर चला रहा है, तो उसके पिता पटन नायक घर में एक छोटी सी दुकान चला कर पूरे परिवार को खींच रहें हैं. बड़े बेटे की मौत के सदमे से अभी तक पूरा परिवार उबर नहीं सका है. उनका कहना है कि अब दस साल बीतने को है, लेकिन बिजली विभाग मुआवजा देने को राजी नहीं हुआ है. अगर यह राशि मिल जाती तो राजेश के बच्चों की हालत सुधर जाती. इन दस सालों में गिरिडीह, धनबाद, चास और रांची तक बिजली विभाग के कार्यालय का दरवाजा खटखटा चुके हैं. हर जगह से सिर्फ आश्वासन ही मिला है. अब हार कर कहीं नहीं जाते. अब तक सिर्फ दौड़ने में ही पचास हजार रुपये खर्च हो गये हैं.

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11 हजार वोल्ट के तार टूटने से हुआ था हादसा

7 मई 2010 को राजेश अपने घर के मेन स्वीच को ऑफ कर रहा था. इसी बीच गांव से गुजर रहे 11 हजार वोल्ट का तार, एलटी तार पर गिर गया और पूरे गांव में 11 हजार वोल्ट का करंट दौड़ गया, जिसमें राजेश की मौत मौके पर ही हो गयी. इस हादसे में गांव के दो बैल भी मर गये थे. हादसा इतना भयावह था कि पूरा गांव सहम उठा था, हादसे के वक्त पूरे गांव में बिजली स्पॉर्क कर रहा था. लोग अपनी जान बचाने को घरों में घूस गये थे और राजेश घर के पास तड़पता ही रह गया था. हादसे के काफी देर बाद बिजली विभाग की ओर से बिजली काट दी गयी थी. घटना के बाद लोगों ने सड़क को जाम किया था, जिसमें बिजली विभाग से मुआवजा की राशि देने की बात हुई थी, लेकिन अब उस बात को 10 साल बीत चुके हैं.

गांव के सामाजिक कार्यकर्ता विशेश्वर नायक ने बताया कि अभी हाल में हजारीबाग गये थे. वहां पर तेनुघाट, जैनमोड़ विद्युत अवर प्रमंडल और रांची बिजली विभाग के कार्यालय से संयुक्त प्रतिवेदन की मांग की जा रही है. अब पता नहीं चल रहा है यह प्रोसेस कैसे होगा. विभाग के अधिकारी सही जानकारी नहीं देते हैं. जिस कारण मामला इतने दिनों से विभाग के लापरवाही से लटका हुआ है.

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बदल गये बिजली विभाग के सभी अधिकारी

हादसे के दौरान जिन अधिकारियों ने मुआवजा की राशि देने की बात की थी, वे सभी अधिकारी बदल गये हैं. हादसे के समय यह इलाका गिरिडीह विद्युत अंचल में आता था, अब बोकारो विद्युत अंचल हो गया है. उसके बाद जो भी नये अधिकारी आये, सिर्फ इस पर खानापूर्ति करते रहे. अभी जो भी अधिकारी यहां पर पदस्थापित हैं. उनके द्वारा इस पर कुछ भी नहीं कहा जाता है. जिस कारण यह मामला ठंडे बस्ते में चला गया.

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