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कोयला कंपनियां बतायें वो कानून के मुताबिक जमीन का मुआवाजा दे रही हैं या नहीः मंत्रालय

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  • झारखंड से नये भूमि अधिग्रहण कानून को लेकर मांगी रिपोर्ट
  • झारखंड, मध्यप्रदेश, पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र और ओड़िशा के मुख्य सचिवों को लिखा गया पत्र

Ranchi: केंद्रीय कोयला मंत्रालय ने नये भूमि अधिग्रहण कानून को लेकर झारखंड समेत मध्यप्रदेश, पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र और ओड़िशा के मुख्य सचिवों से रिपोर्ट मांगी है. केंद्र ने यह जानना चाहा है कि राइट टू फेयर कंपेंसेसन एंड ट्रांसपरेंसी इन लैंड एक्विजिशन एंड रीसेटेलमेंट एक्ट-2103 के तहत कोयला कंपनियां अधिगृहित की जानेवाली भूमि का उचित मुआवजा दे रही हैं अथवा नहीं. कोयला मंत्रालय का कहना है कि कई कोयला कंपनियों द्वारा नये कानून के तहत मुआवजे की राशि वितरित करने में गड़बड़ी की शिकायतें मिली हैं. क्या यह शिकायतें कोल बियरिंग एरिया (एक्विजिशन एंड डेवलपमेंट) एक्ट 1957 के प्रावधानों की वजह से हो रही हैं. और इसकी वजह से नया भूमि अधिग्रहण कानून भी प्रभावित हो रहा है. कोल मंत्रालय ने नये कानून की पहली,  दूसरी और तीसरी सूची के तहत जानकारी उपलब्ध कराने को कहा है.

31.12.2014 को प्रभावी हुआ था नया कानून

नया भूमि अधिग्रहण कानून 31.12.2014 को प्रभाव में आया था. इसकी पहली, दूसरी और तीसरी अनुसूची के प्रावधानों को 1.1.2015 से तथा संशोधित एक्ट 31.8.2015 से देश भर में लागू हुआ था. केंद्र के अनुसार 1.9.2015 के पहले भूमि अधिग्रहण के मामलों में क्या-क्या कार्रवाई की गयी, इसका ब्योरा भी सरकारों की तरफ से मांगा गया है. केंद्र ने कहा है कि नये कानून की धारा 108 में राज्य सरकारों को नीति का निर्धारण करना था. इसमें जमीन मालिकों को ऊच्चतर मुआवजे का प्रावधान किया गया है. इतना ही नहीं कोल बियरिंग एक्ट में सरकार और सरकारी कंपनियों के बीच मुआवजे के वितरण को लेकर एक समझौता करने की बातें भी कही गयी हैं. यदि समझौते के अनुरूप मुआवजे का वितरण अथवा पुनर्वास पैकेज नहीं मिलता है, तो उसका निबटारा सक्षम न्यायाधीकरण में करने की बातें भी कही गयी हैं. प्रभावित परिवारों को समझौते के दायरे के तहत पुनर्वासित करने और जिला के कलेक्टर के शक्तियों का उपयोग के अनुपालन को सुनिश्चित करना था. इस पर भी राज्यों से रिपोर्ट मांगी गयी है.

किस राज्य में कौन सी कोल कंपनी कार्यरत है

केंद्र सरकार का कहना है कि झारखंड में सीसीएल, बीसीसीएल, इस्टर्न कोल फील्ड्स लिमिटेड, सीएमपीडीआइ सरीखी कंपनियां कार्यरत हैं. वहीं दूसरे राज्यों में महानदी कोल फील्ड्स लिमिटेड, नार्दन कोलफील्ड्स लिमिटेड, साउथ इस्टर्न कोल फील्ड्स लिमिटेड, वेस्टर्न कोल फील्ड्स लिमिटेड, सिंगरैली कोलयरिज कंपनी लिमिटेड, नैवेली लिग्नाइट कारपोरेशन लिमिटेड समेत अन्य कोल कंपनियां कार्यरत हैं.

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