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फसल बीमा के नाम पर कंपनियों ने झारखंड में ‘डाका’ डाला

बीमा का प्रीमियम लिया 477 करोड़, इसके एवज में किसानों को दिया सिर्फ 77 करोड़

Ranchi :  कृषि बीमा करनेवाली कंपनियों ने झारखंड के किसानों के हक पर डाका डाला है. बीमा कंपनियों ने फसलों के बीमा के नाम पर जितने की प्रीमियम ली, उसका चौथाई भी किसानों को भुगतान नहीं किया. कंपनियों ने फसल क्षति के एवज में भुगतान के लिए अपने हिसाब से नियम बनाये और किसानों को उचित फसल बीमा क्षतिपूर्ति देने के बजाय ठेंगा दिखा दिया.

गत तीन वर्षों में  बीमा कंपनियों ने फसलों की बीमा के नाम पर झारखंड की सरकार से 477 करोड़ रुपये प्रीमियम के तौर पर लिये, लेकिन इसके एवज में किसानों के फसलों की क्षति की भरपाई के नाम पर मात्र 77 करोड़ रुपये का भुगतान किया. ये कंपनियां लूट का यह सिलसिला बरकार रखना चाहती हैं, लेकिन इस बार राज्य की सरकार ने फसल बीमा के उनके प्रस्तावों को ठुकरा दिया है.

कृषि मंत्री बादल बताते हैं कि ये कंपनियां तीन वर्षों में मात्र 77 करोड़ रुपए किसानों को दे सकी हैं, जबकि सरकार के खजाने से प्रीमियम के तौर पर उन्हें मोटी रकम का भुगतान किया गया है. सरकार अब फसल नुकसान की स्थिति में राहत कोष से किसानों की मदद करेगी. इसके लिए 100 करोड़ के बजट की घोषणा पूर्व में ही की जा चुकी है।

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सरकार ने रोक दिया था फसल बीमा का प्रीमियम

पिछले वर्ष बीमा कंपनियों ने 15 लाख किसानों की फसल बीमा योजना के तहत कवर करने का प्रस्ताव दिया था, लेकिन इस बीच सरकार ने पहली बार कंपनियों के सामने नई शर्त रख दी थी, जिसे बीमा कंपनियों ने पूरा नहीं किया. सरकार ने कंपनियों को कहा है कि वे लिखित तौर पर शपथ पत्र दें कि वे फसल क्षति के एवज में किसानों के बीच बीमा की कितनी राशि का भुगतान कर रहे हैं. शपथ पत्र मिलने के बाद ही सरकार प्रीमियम की पूरी राशि कंपनियों को देगी. इस शर्त के बाद कंपनियों ने हाथ खड़े कर दिए और कहा कि वे पहले इसकी लिखित घोषणा नहीं कर सकते.

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शपथ पत्र देने से पीछे हटीं कंपनियां

हालांकि कंपनियों ने अपने आकलन में कहा था कि वे किसानों के बीच 625 करोड़ की बीमा राशि का भुगतान करेंगे, लेकिन जब सरकार ने इन कंपनियों के सामने शपथ पत्र के माध्यम से यह बात रखने की शर्त रखी तो उन्होंने कदम पीछे खींच लिये. सरकार का कहना है कि अगर कंपनियां शपथ पत्र में लिखकर दें कि वे फसल क्षति के एवज में 625 करोड़ की राशि देंगी, तो सरकार प्रीमियम का भुगतान करने को तैयार है. लेकिन बीमा कंपनियों का कहना है कि वे इस तरह शपथ पत्र नहीं दे सकतीं. यह नियम के प्रतिकूल है. कंपनियों का मानना है कि जितनी देनदारी होगी उतनी बीमा की राशि दी जायेगी,  लेकिन पहले ही शपथ पत्र देना मुश्किल है.

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