Ranchi

जमीन के फेर में उलझने लगी सामुदायिक शौचालय योजना, भूमि दान में लोगों की नहीं है रुचि

Ranchi: राज्य के सभी गांवों में सामुदायिक शौचालय बनाये जाने हैं. सालभर के भीतर 6000 शौचालय बनाने का टारगेट पेयजल एवं स्वच्छता विभाग का है. अगले पांच सालों में सभी पंचायतों के हर गांव को इसमें कवर किया जायेगा. शौचालय बनाने में तकरीबन दो कट्ठा जमीन की जरुरत है. इसके लिये या तो दान में मिली जमीन पर काम होना है या गैर मजरुआ जमीन पर.

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लेकिन समस्या यह सामने आने लगी है कि गांव के बीचों-बीच सार्वजनिक उपयोग के लिये जमीन दान करने के लिए लोग सामने नहीं आ रहे हैं. जबकि गांव से बाहर गैर मजरुआ जमीन पर सार्वजनिक शौचालय बनाये जाने से स्कीम का उद्देश्य फेल होने का डर है.

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3 लाख में बनेगा शौचालय

स्वच्छ भारत मिशन (SBM-G) के दूसरे चरण की शुरुआत राज्य में हो चुकी है. इसके तहत गांवों में भी कचरा प्रबंधन, रेन वाटर हार्वेस्टिंग और सार्वजनिक शौचालय बनाने का प्रोग्राम शुरू हो गया है. राज्य में अभी तीन जिलों में 200-200 सार्वजनिक शौचालय बनाये जाने पर विशेष जोर है. जिसमें हजारीबाग, गोड्डा औऱ गिरिडीह में बन रहे शौचालयों के काम में प्रवासी श्रमिकों को काम भी दिया जा रहा है. इसके अलावे अन्य जिलों को भी सार्वजनिक शौचालय बनाने के लिये टास्क दिया गया है.

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एक पंचायत में निर्माणाधीन सामुदायिक शौचालय

जिला प्रशासन को स्थानीय जनप्रतिनिधियों की भागीदारी के साथ काम करने के लिये कहा जा चुका है. गैर मजरूआ जमीन हो या दान की हुई जमीन, शौचालय बनाने के लिए 3 लाख रुपये दिये जायेंगे. इसमें चयनित जमीन पर पुरुषों और महिलाओं के लिये एक-एक शौचालय, एक-एक यूरिनल और बाथरुम भी बनाये जाने हैं. एसबीएम के प्रावधानों के मुताबिक, योजना में 2 लाख 10 हजार रुपये सरकार देगी, जबकि 90 हजार रुपये 15वें वित्त के पैसे से पंचायतों को देने हैं.

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गांवों में जमीन विवाद के मामले

हजारीबाग के मेरु पंचायत की मुखिया सोनी कुमारी के अनुसार, उनकी पंचायत के मुख्य चौक पर शौचालय बनाया जाना तय हुआ. लेकिन गांव वालों ने इस जमीन पर आपत्ति जता दी. सीओ भी इसमें सफल नहीं हुए. चार जगहों पर बुनियादी खुदाई के बाद भी काम शुरू नहीं किया जा सका. इसी तरह अमनारी पंचायत में गैर मजरुआ या रैयती जमीन गांव के नजदीक में नहीं मिल पायी है. जो जमीन फाइनल होती है, अंत-अंत में उस पर विवाद खड़ा हो जा रहा है. अभी जिस जगह को तय किया गया है, वह गांव से काफी दूर है. ऐसे में सार्वजनिक शौचालय की उपयोगिता पर संदेह है.

डीसी को करना है फैसला

एसबीएम (ग्रामीण) के निर्देशों के अनुसार, जमीन चयन करने और विवाद के निपटारे के लिये डीसी को पावर दिया गया है. इसके लिये जिले स्तर पर एक कमिटी भी बनायी गयी है. मुख्यत: स्थानीय जनप्रतिनिधियों को शौचालय निर्माण के लिये स्थल का चयन करने को कहा गया है. जहां शौचालय बनेगा, वहां आसपास में पानी का समुचित स्रोत भी देखा जाना है. पंचायत के प्रतिनिधियों की मानें तो कई जगहों पर अब भी ऐसे लोग हैं जिनके पास खुद की जमीन नहीं होने से व्यक्तिगत शौचालय तक का इंतजाम नहीं हो सका. सार्वजनिक शौचालय के लिये आबादी के बीच गैर मजरुआ जमीन खोजना या दान की जमीन का इंतजाम करना आगे और बड़ी चुनौती बनने वाली है.

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