LITERATURE

देश विभाजन के बाद सांप्रदायिक दंगों में गीतकार गुलशन बावरा के सामने ही हुई थी माता-पिता की हत्या

गुलशन बावरा के जन्मदिन पर विशेष

Naveen Sharma

Ranchi : देश के विभाजन के समय हुए सांप्रदायिक दंगों में गुलशन के माता-पिता की हत्या उनकी नजरों के सामने की गई थी.इतने कटु जीवन अनुभवों के बाद भी गुलशन बावरा ने दोस्ती, रोमांस, मस्ती, ग़म- जीवन के हर रंग के गीतों को अल्फाज़ दिए. यह उनकी जीवन को सकारात्मक रूप से लेने की दृष्टि का कमाल था.

इस त्रासदी के बाद वह अपनी बड़ी बहन के पास दिल्ली आ गये. उन्होंने स्नातक की शिक्षा दिल्ली विश्वविद्यालय में ली. 1955 में अपने कैरियर की शुरुआत मुंबई में रेलवे में लिपिक की नौकरी से की लेकिन यह नौकरी उनके स्वभाव के अनुकूल नहीं थी. बाद में नौकरी छोड़ दी और नजरें फिल्म इंडस्ट्री की ओर मोड़ दीं.

जीवन यात्रा

गुलशन बावरा का जन्म 12 अप्रैल 1938 – अविभाजित भारत शैखुपुरा (अब पाकिस्तान) में हुआ था. गुलशन बावरा की मां विद्यावती धार्मिक कार्यकलापों के साथ साथ संगीत में भी काफी रूचि रखती थी. गुलशन बावरा अक्सर मां के साथ धार्मिक कार्यक्रमों में जाया करते थे.

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फिल्म इंडस्ट्री में इंट्री

शुरू के दौर में फिल्म इंडस्ट्री में गुलशन बावरा को तरह-तरह की कठिनाइयों का सामना करना पड़ा. उन्होंने अपना संघर्ष जारी रखा और कई छोटे बजट की फिल्में भी कीं, जिनसे उन्हें कुछ खास फायदा नहीं हुआ.फिल्म उद्योग में उन्हें पहला गीत लिखने का अवसर 1959 में फिल्म चंद्रसेना में मिला था.उनका हिट गीत फिल्म ‘सट्टा बाजार’ के लिए ‘चांदी के चंद टुकडे के लिए’ था.

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मेरे देश की धरती सोना उगले, उगले हीरे-मोती

आपको मनोज कुमार की फिल्म उपकार का सुप्रसिद्ध गीत मेरे देश की धरती सोना उगले.. जरूर याद होगा. यह लाजवाब देश भक्ति गीत जिस गीतकार की कलम से निकला है उसका नाम है गुलशन बावरा.

देशभक्ति गीतों के सबसे लोकप्रिय गायक महेंद्र कपूर की ओज भरी आवाज वाले इस गीत ने पूरे भारत में उनके नाम का सिक्का जमा दिया था. इस गीत की रचना में उनकी गुड्स क्लर्क की नौकरी का अनुभव काम आया था.

दरअसल रेलवे के मालवाहक विभाग में गुलशन बावरा अक्सर पंजाब से आई गेहूँ से लदी बोरियाँ देखा करते थे और वहीं उनके मन कभी न भुलाई जा सकने वाली वे पंक्तियाँ बन पड़ीं जो हिन्दी सिनेमा के इतिहास में अमर हो गईं.

जिस देश में गंगा बहती है के लिए लिखा था गीत उपकार में लिया गया

कहते हैं कि गुलशन बावरा ने यह गीत राज कपूर की फिल्म ‘जिस देश में गंगा बहती है’ के लिए लिखा था. यह गीत राज कपूर को पसंद भी आया था, लेकिन तब तक वे शैलेंद्र के गीत “होंठों पे सच्चाई रहती है, जहां दिल में सफाई रहती है” को फाइनल कर चुके थे.

इसके बाद गुलशन ने अपने मित्र मनोज कुमार को ये पंक्तियाँ सुनाईं तो उन्होंने उसे ‘उपकार’ के लिए चुन लिया. इस गीत ने ही उन्हें 1967 में सर्वश्रेष्ठ गीत का पहला ‘फ़िल्मफेयर पुरस्कार’ दिला.

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गुलशन मेहता ऐसे हो गए गुलशन बावरा

उसी दौर में गुलशन की मुलाकात संगीतकार जोड़ी कल्याण जी, आनंद जी से हुई, जिनके संगीत निर्देशन में उन्होंने फिल्म सट्टा बाजार के लिये- ‘तुम्हें याद होगा कभी हम मिले थे’, गीत लिखा लेकिन इस फिल्म के जरिये वह कुछ खास पहचान नहीं बना पाये.

लेकिन यही वो फ़िल्म थी जिसके ज़रिए गुलशन कुमार मेहता का नाम गुलशन बावरा हो गया. सट्टा बाज़ार’ के वितरक शांतिभाई पटेल, गुलशन के काम से ख़ासे खुश थे. रंग-बिरंगी शर्ट पहनने वाले लगभग 20 साल के युवक को देख उन्होंने कहा कि मैं इसका नाम गुलशन बावरा रखूँगा. यह बावरे (पागल व्यक्ति) जैसा दिखता है.’’

उनकी फिल्म प्रदर्शित होने पर उसके पोस्टर्स में सिर्फ तीन लोगों के नाम प्रमुखता से प्रदर्शित किए गए. एक फिल्म के निर्देशक रविंद्र दवे, संगीतकार कल्याणजी-आनंदजी और बतौर गीतकार गुलशन बावरा.’ इसके बाद के आगामी कुछ साल गुलशन के लिए मशक्कत वाले रहे और इन सालों में वे कई फ़िल्मों में अभिनय कर अपना गुजारा चलाते रहे.

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रोमांटिक गीतों का गुलदस्ता खेल खेल में

ऋषि कपूर और नीतू सिंह की शानदार रोमांटिक जोड़ी को लेकर बनाई गई फिल्म खेल खेल में गुलशन ने बेहद प्यारे गीत लिखे. बिंदास प्यार करने वालों के लिए ‘खुल्लम खुल्ला प्यार करेंगे’, एक मैं और एक तू दोनों मिले इस तरह.. और शैलेंद्र सिंह का गाया गीत हमने तुमको देखा तुमने हमको देखा यादगार तोहफा हैं.

अमिताभ बच्चन की फिल्म कसमे वादे में उन्होंने कसमे वादे निभाएँगे हम’ जैसा बहुत ही खूबसूरत गीत लिखा था. सत्तर की शुरुआत में सबसे पहले 1974 में फ़िल्म ‘हाथ की सफाई’ में लता मंगेशकर द्वारा गाए उनके गीत “तू क्या जाने बेवफ़ा..” और “वादा कर ले साजना…” बेहद लोकप्रिय रहे.

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जंजीर से अमिताभ के साथ – साथ गुलशन बावरा की किस्मत चमकी

1975 में आई निर्देशक प्रकाश मेहरा फ़िल्म ‘जंजीर’ ने अभिनेता अमिताभ बच्चन के साथ- साथ गीतकार गुलशन बावरा की किस्मत भी बदल दी. फिल्म में प्राण पर फिल्माए गए गीत “यारी है ईमान मेरा यार मेरी ज़िदगी.. ने तहलका मचा दिया.

मन्ना डे की जोशीली आवाज में गाया यह गीत दोस्ती पर लिखे गए सबसे लोकप्रिय गीतों में शुमार हो गया. यह गीत उस साल अमीन सायनी द्वारा पेश किए जानेवाले बिनाका गीत माला का सरताज गीत बना था.

इस फिल्म के अन्य गीत भी हिट रहे थे उनमें दीवाने हैं दीवानों को ना घर चाहिए.. तथा लता मंगेशकर का गाया गीत बना के क्यों बिगाड़ा रे भी बेहद खूबसूरत था.

यारी है ईमान मेरा

ग़र ख़ुदा मुझसे कहे…
ग़र ख़ुदा मुझसे कहे कुछ माँग ऐ बंदे मेरे
मैं ये माँगूँ…
मैं ये माँगूँ महफ़िलों के दौर यूँ चलते रहें
हमप्याला हो, हमनवाला हो, हमसफ़र हमराज़ हों
ता-क़यामत…
ता-क़यामत जो चिराग़ों की तरह जलते रहें
यारी है ईमान मेरा यार मेरी ज़िंदगी
अरे! यारी है ईमान मेरा यार मेरी ज़िंदगी
प्यार हो बंदों से ये, ओ ओ
प्यार हो बंदों से ये सब से बड़ी है बंदगी
यारी है! यारी है ईमान मेरा यार मेरी ज़िंदगी
साज़-ए-दिल छेड़ो जहाँ में, ए ए ए
साज़-ए-दिल छेड़ो जहाँ में प्यार की गूँजे सदा
एइ, साज़-ए-दिल छेड़ो जहाँ में प्यार की गूँजे सदा
जिन दिलों में प्यार है उनपे बहारें हों फ़िदा
प्यार लेके नूर आया…
प्यार लेके नूर आया प्यार लेके सादगी
यारी है! यारी है ईमान मेरा यार मेरी ज़िंदगी
यारी है ईमान के लिए उन्हें दूसरी बार फ़िल्मफ़ेयर पुरस्कार दिया गया था

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कल्याणजी-आनंदजी के साथ हिट जुगलबंदी

कल्याणजी-आनंदजी के संगीत निर्देशन में गुलशन बावरा ने 69 गीत लिखे. इनमें से अधिकतर गीत काफी लोकप्रिय हुए थे. इनमें से एक शुरुआती दौर की फिल्म सट्टा बाजार (1959) का गीत है तुम्हें याद होगा कभी हम मिले थे.

इस मधुर गीत को हेमंत कुमार और लता मंगेशकर ने गाया था. इनके लिखे कई गीतों को मुकेश की दर्द भरी आवाज ने अमर कर दिया है. उनमें 1969 में आई फिल्म विश्वास का गीत चांदी की दिवार ना तोड़ी प्यार भरा दिल तोड़ दिया तो वाकई कमाल का है.

इसके अलावा याद रहेगा प्यार का ये रंगीन जमाना याद रहेगा गीत मुकेश और लता मंगेशकर के सदाबहार युगल गीतों में शामिल है. विश्वास फिल्म में मनहर उदास और सुमन कल्याणपुर का गाया एक बेहतरीन गीत भी था आप से हमको बिछड़े हुए एक जमाना बीत गया.

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सबसे लंबी पारी आरडी बर्मन के साथ

गुलशन बावरा और संगीत निर्देशक राहुल देव बर्मन की जोड़ी बहुत लंबे समय तक चली थी. |आर.डी. बर्मन के साथ इन्होंने 150 गीत लिखे थे. उन्होंने फिल्म ‘सनम तेरी कसम’, ‘अगर तुम न होते’, ‘सत्ते पे सत्ता’, ‘यह वादा रहा’, ‘हाथ की सफाई’ और ‘रफू चक्कर’ को अपने गीतों से सजाया था.

कमल हासन की फिल्म सनम तेरी कसम’ (1982) वैसे तो खास नहीं चली थी लेकिन उसके गाने बहुत लोकप्रिय हुए थे. इसके टाइटल सांग के अलावा आरडी की नशीली और अलहदा आवाज में गाया हुआ गीत जाना ओ मेरी जाना मैं हूं तेरे ख्वाबों का राजा और किशोर कुमार की आवाज में सजा गाना शीशे के घरों में देखो तो पत्थर दिल वाले बसते हैं हिट रहे थे. राजेश खन्ना की अगर तुम न होते’ का टाइटल सांग ने तो धूम मचा दी थी. इस गीत के दो वर्जन हैं एक किशोर कुमार का है.

आती रहेंगी बहारे
आती रहेंगी बहारें
जाती रहेंगी बहारें
दिल की नज़र से दुनियाँ को देखो
दुनियाँ सदा ही हसीं है
मैं ने तो बस यही माँगी है दुआएं
फूलों की तरह हम सदा मुस्कुराये
गाते रहें हम खुशियों के गीत यूँ ही जाये बीत
ज़िंदगी
हो आती रहेंगी बहारें …
तुम जो मिले हो तो दिल को यक़ीं है
धरती पे स्वर्ग जो है तो यहीं है
गाते रहे हम खुशियों के गीत
यूँ ही जाये बीत
ज़िंदगी
हो आती रहेंगी बहारें …
तुम से हैं जब जीवन में सहारे
जहाँ जाये नज़रें वहीं हैं नज़ारे
लेके आयेगी हर नयी बहार
रंग भरा प्यार
और खुशी
हो आती रहेंगी बहारें.

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अन्य हिट गीत

  • वादा करले साजना तेरे बिन मैं ना रहूं : हाथ की सफाई, लता रफी, कल्याणजी-आनंदजी
  • एक बात दिल में आई है कहूं या ना कहूं : राही बदल गए :लता किशोर, आरडी बर्मन
  • तू तू है वही दिल ने जिसे अपना कहा : यह वादा रहा, किशोर आशा, आरडी बर्मन
  • जीवन के हर मोड़ पर मिल जाएंगे हमसफर : झूठा कहीं का (1979) , आशा किशोर आरडी बर्मन
  • मिल गई आज दो लहरें जिस तरह : यह वादा रहा, आशा भोसले, आरडी बर्मन
  • बहना ओ बहना तेरी डोली में सजाऊंगा : अदालत, मुकेश, कल्याणजी – आनंदजी
  • आज का दिन है 2 अक्टूबर: परिवार, लता मंगेशकर कल्याण जी
  • जब आती होगी याद तेरी: फांसी, रफी, सुलक्षणा पंडित, लक्ष्मीकांत प्यारेलाल
  • बचके रहना रे बाबा बचके रहना रे : पुकार,(1983)किशोर -आशा
  • प्यार हमें किस मोड़ पर ले आया : सत्ते पे सत्ता 1922) किशोर – सपना चक्रवर्ती
  • मिले जो कड़ी – कड़ी एक जंजीर बने : कसमे वादे (रफ़ी आशा किशोर, आरडी बर्मन
  • कल क्या होगा किसको पता अभी जिंदगी का ले लो मजा : कसमे वादे, आरडी बर्मन, संगीत आर डी बर्मन तू * तू मायके मत
  • जइयो मत जइयो मेरी जान : पुकार अमिताभ बच्चन, आरडी बर्मन
  • लहरों की तरह यादें दिल से टकराती हैं : निशान (1983) किशोर कुमार, राजेश रोशन.

निधन

7 अगस्त को गुलशन बावरा का निधन मुंबई के पालीहिल स्थित निवास में लंबी बीमारी के बाद दिल का दौरा पड़ने के बाद निधन हो गया. उनके इच्छानुसार उनके मृतदेह को जेजे अस्पताल को दान दिया जाएगा.

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