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बाल अधिकारों के संरक्षण के लिए सक्रिय हुई समितियां, कोरोना काल में रोका 166 बाल विवाह

Ranchi: बच्चों से जुड़े मुद्दे और बाल अधिकारों को सुनिश्चित करने के लिए लगभग पूरे राज्य में बाल संरक्षण समितियों का गठन किया गया था. इन समितियों का गठन 2015 में हुआ था. सरकारी स्तर पर इन समितियों का गठन राज्य स्तर, जिला स्तर और प्रखंड स्तर पर होना था. लेकिन गठन के बाद से ही इन समितियों का अस्तित्व सिर्फ कागजों पर रहा. कभी भी इनके द्वारा कोई काम नहीं हुआ. लेकिन अब गैर सरकारी संस्था एक्शन एड के सहयोग से राज्य के दस जिलों में इन समितियों को सक्रिय किया गया है.

बाल विवाह के प्रति जागरूक करने पर हो रहा है काम

एक्शन एड के स्टेट प्रोग्राम कोआर्डिनेटर पियूष सेन गुप्ता बताते हैं कि बाल संरक्षण समितियों के जरिये बाल विवाह, किशोरियों में गर्भाधारण जैसी समस्याओं पर काम किया जा रहा है. पिछले साल (2020 में) कोविड के समय इन समितियों के प्रयास से 166 बाल विवाह होने से रोके गए. इसके अलावा इन समितियों के माध्यम से कोविड के बारे में लोगों के बीच जागरुकता फैलाने, राशन पहुंचाने के जैसे काम भी किए गये.

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यहां समितियों को किया गया सक्रिय

चतरा, देवघर, दुमका, गोड्डा, गढ़वा, जामताड़ा, कोडरमा, हजारीबाग, पलामू और पाकुड़ में समितियों को सक्रिय करने का प्रयास किया गया है. पियूष बताते हैं इन जिलों में बाल विवाह की काफी समस्या थी. समितियों के माध्यम से बाल विवाह के खिलाफ जागरूकता अभियान चलाये जा रहे हैं. इससे अब पहले की तुलना में लोगों में जागरूकता आयी है. इसके साथ ही इस तरह के मामले भी कम हुए हैं.

ये होते हैं इन समितियों के सदस्य

इन समितियों का संचालन अभी भी प्रखंड स्तर पर ही हो रहा है. एक समिति में नौ से दस सदस्य होते हैं. इसमें प्रखंड स्तर पर प्रमुख, बीडीओ और स्वयंसेवी संस्थाओं के प्रतिनिधि सदस्य और पदधारियों के तौर पर काम करते हैं. ये समितियां गांव से लेकर प्रखंड स्तर तक के मामलों को देख रही हैं.

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