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400 प्लस टू स्कूलों में कॉमर्स, बायोलॉजी और संस्कृत के शिक्षक बहाल हो गये, स्टूडेंट की संख्या जीरो

Ranchi : मैट्रिक रिजल्ट के साथ ही राज्य के प्लस टू हाई स्कूलों में एडमिशन की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है. लेकिन इन स्कूलों में एडमिशन को लेकर स्टूडेंट्स में उत्साह नहीं देखा जा रहा है. ऐसा इसलिए भी है कि इन स्कूलों में विषयवार शिक्षकों की नियुक्ति को लेकर भारी विसंगति है. माध्यमिक शिक्षा निदेशालय की ओर से मिली जानकारी के मुताबिक राज्य में प्लस टू हाई स्कूल की संख्या 510 है. इसमें से आधे अधिक में शिक्षकों की विषयवार असमानता है. कॉमर्स, संस्कृत और बायोलोजी ऐसे प्रमुख विषय हैं जिनमें शिक्षक तो नियुक्त कर दिए गये हैं लेकिन इन विषयों में स्टूडेंट्स नहीं हैं.

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आधे से अधिक में बिना स्टूडेंट्स के शिक्षक नियुक्त

झारखंड में राज्य गठन के समय 59 प्लस टू हाई स्कूल थे. पिछले 20 वर्षों में 451 नये प्लस टू स्कूल खोले गये. राज्य के इन हाई स्कूलों में शिक्षकों की नियुक्ति वर्ष 1976 व प्लस 2 विद्यालयों में वर्ष 1993 में चिन्हित विषयों के आधार पर किया जा रहा है. अब तक तीन बार नियुक्ति क्रमशः वर्ष 2012, 2017 व 2018-19 में हुई है. इसके बाद भी आधे से अधिक प्लस टू हाई स्कूलों में विषयवार शिक्षक नहीं हैं. आंकड़े बताते हैं कि 510 प्लस टू हाई स्कूलों में से 320 ऐसे हैं जहां कॉमर्स के शिक्षक तो हैं पर स्टूडेंट्स नहीं हैं. 100 से अधिक स्कूलों में संस्कृत और बायोलोजी के शिक्षक हैं पर यहां एडमिशन एक भी नहीं हुआ है.

एग्रीकल्चर की पढाई के लिए बिना स्टूडेंट्स के शिक्षक नियुक्त

निदेशालय के मुताबिक राज्य में एग्रीकल्चर की पढ़ाई के लिए शिक्षक तो नियुक्त हो रहे हैं परंतु आज तक स्टूडेंट्स नहीं मिले. वहीं 100 से अधिक विद्यालयों में जीव विज्ञान पढ़ने वाले विद्यार्थी नहीं है. कई जिलों में स्कूलों में इंटर पढ़ने वाले संस्कृत के एक भी विद्यार्थी नहीं है. फिर भी जीव विज्ञान और संस्कृत के शिक्षक हैं. प्लस टू स्तर पर 9 जनजातीय और क्षेत्रीय भाषा की पढाई तो हो रही है लेकिन आज तक पद सृजित नहीं हो पाया है. ऐसे में पांच साल से बिना शिक्षक नियुक्त हुए स्टूडेंट्स जनजातीय और क्षेत्रीय भाषा की पढाई कर रहे हैं.

49 हजार से 28 हजार हुए कॉमर्स स्टूडेंट्स

प्लस टू स्कूलों में कॉमर्स की पढाई की बात करें तो आधे से अधिक स्कूलों में शिक्षक नहीं हैं. ऐसे में बीते पांच साल में कॉमर्स पढने वाले स्टूडेंट्स 49 हजार से 28 हजार हो गये. आंकड़े के मुताबिक साल 2015 में 49072, 2016 में 49286, 2017 में 47622, 2018 में 40244, 2019 में 34686 और 2020 में कॉमर्स पढने वाले स्टूडेंट्स 28548 थे.

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