National

कोयंबटूर रेप व मर्डर केस: #SupremeCourt ने खारिज की पुनर्विचार याचिका, मौत की सजा बरकरार

विज्ञापन

New Delhi: कोयंबटूर में 2010 में 10 साल की बच्ची से हुए रेप एवं हत्याकांड मामले में उच्चतम न्यायालय ने मौत की सजा बरकरार रखी है. मृत्युदंड की सजा पाने वाले दोषी मनोहरन की वह पुनरीक्षण याचिका खारिज कर दी, जिसमें उसने मौत की सजा को बरकरार रखने के उसके आदेश की समीक्षा का अनुरोध किया था.

सुप्रीम कोर्ट ने एक के मुकाबले दो के बहुमत से फैसला सुनाते हुए कहा कि मृत्युदंड को बरकरार रखने वाले फैसले की समीक्षा करने का कोई आधार नहीं है.

इसे भी पढ़ेंःमहाराष्ट्र में सरकार गठन को लेकर भागवत-उद्धव के बीच कोई बातचीत नहीं: राउत

एक अगस्त 2019 को आया था सुप्रीम कोर्ट का फैसला

गौरतलब है कि इस साल एक अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने नाबालिग बच्ची से गैंगरेप और उसके बाद उसकी और उसके छोटे भाई की हत्या के मामले में मद्रास हाईकोर्ट के फैसले को बरकारार रखते हुए फांसी की सजा सुनायी थी.

adv

हालांकि, सजा के अमल के लिए 20 सितंबर की तारीख मुकर्रर की गयी थी. लेकिन उसके तीन दिन पहले कोर्ट ने सजा पर रोक लगा दी थी. दरअसल दोषी मनोहरन की ओर पुनर्विचार की मांग वाली याचिका पर 16 अक्ब्टूबर को सुनवाई किये जाने का फैसला देते हुए शीर्ष अदालत ने फांसी की सजा रोक दी थी.

अब इस पुर्नविचार याचिका को खारिज करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने मौत की सजा को बरकरार रखा है.

इसे भी पढ़ेंःपलामू: दो हाइवा के बीच टक्कर, एक में लगी आग, जिंदा जला ड्राइवर

2010 में हुई थी रेप और हत्या

उल्लेखनीय है कि मनोहरन और सह-आरोपी मोहनकृष्णन ने 29 अक्टूबर, 2010 को 10 साल की बच्ची और उसके सात साल के भाई को एक मंदिर के सामने से उस समय अगवा कर लिया जब वे स्कूल जा रहे थे.

दोनों आरोपियों ने नाबालिग भाई-बहन के हाथ बांधने के बाद उन्हें जहर देकर मारने का प्रयास किया. और इससे पहले 10 साल की बच्ची के साथ बर्बरतापूर्ण तरीके से सामूहिक दुष्कर्म किया था.

जहर से भाई-बहन की मृत्यु नहीं होने पर दोनों ने उनके हाथ बांधकर उन्हें एक नहर में फेंक दिया, जहां डूबने से उनकी मौत हो गयी थी. मोहनकृष्णन बाद में एक मुठभेड़ में मारा गया.

इसे भी पढ़ेंःछत्तीसगढ़: नक्सलियों के साथ मुठभेड़, एक CRPF का जवान शहीद

advt
Advertisement

Related Articles

Back to top button