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थानेदारों की मिलीभगत से हो रही है कोयला चोरी

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Dhanbad: पुलिस के आला अधिकारी डाल-डाल तो चतुर धूर्त थानेदार पात पात. कोयला चोरी पर आंशिक वीराम जरूर लगा है. लेकिन धनबाद में पोस्टिंग का कार्यकाल यूं ही नहीं चला जाये इसलिए बाघमारा अनुमंडल के कई थानेदारों ने नया तरीका इजाद कर लिया है. इसके तहत अवैध कोयला ढोने वाले सैकड़ों स्कूटर का रूटीन बदल दिया गया है. कतरास-राजगंज और तेतुलमारी-राजगंज सड़क में यह धंधा अब रात 12 बजे से सुबह 5 बजे तक चल रहा है. प्रत्येक स्कूटर वाले को कोयला ढोने के एवज में ढुलाई क्षेत्र अंतर्गत आनेवाले थाने को पांच हजार रुपये  बतौर अग्रिम देने पड़ते हैं. अधिकांश कोयला बरवाअड्डा थाना अंतर्गत अंकुरा और तिलैया चला जाता है. फिर वहां टाटा मैजिक के सहारे कोयले को अन्यत्र भेजा जाता है.

कई चिमनी ईंट भट्ठावालों को नहीं मिला है लिंकेज

इधर ये भी सवाल उठ रहा है कि जब कई चिमनी ईंट भट्ठावालों को लिंकेज नहीं है, वे डीओ लगाते नहीं तो फिर चिमनियों से धुंआ कैसे निकल रहा है. जानकारी के मुताबिक सभी भट्ठों में नित्य पांच टन चोरी का कोयला साइकिल और स्कूटर से ही गिरता है. सुबह 5-6 बजे कतरास राजगंज सड़क पर ये नजारा सहज देखा जा सकता है. केवल राजगंज थाना क्षेत्र में 20 भट्ठे संचालित हैं. सूचना है कि चोरी का कोयला लेने के एवज में प्रत्येक भट्ठे को थानेदार को 30 से 40 रु माहवारी देना पड़ता है. 18 जनवरी को क्राइम मीटिंग में एसएसपी ने कहा कि जिस थाना क्षेत्र में कोयला या शराब का अवैध धंधा पकड़ा जायेगा, वहां के थानेदार नपेंगे. लेकिन सड़कों पर यह धंधा पूर्ववत देखा जा सकता है.

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निजी उपयोग के लिए मिली है बंगला ईंट भट्ठे की अनुमति

गोविंदपुर, निरसा, कतरास, राजगंज, बाघमारा, पाथलडीह, तोपचांची के विभिन्न ग्रामीण इलाकों में व्यवसायिक बंगला ईंट भट्ठे संचालित हैं. इन भट्ठों में भी काफी मात्रा में चोरी के कोयले की खपत होती है. केवल निजी उपयोग के लिए सरकार ने बंगाल ईंट के निर्माण की इजाजत दी है. लेकिन लोग इसका नाजायज लाभ उठा रहे हैं. यहां यह उल्लेख्य है कि चोरी का कोयला ढाई हजार रु प्रति टन सम्पूर्ण कोयलांचल में सहजता से उपलब्ध हो जाता है. कोयला तस्कर इसे छह हजार रु प्रति टन अन्यत्र बेचते हैं.

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