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धनबाद के झरिया में रघुकुल व सिंह मेंशन की टेंशन के कारण बंद है कोयले का उठाव, खूनी झड़प की आशंका

Kumar Kamesh

Dhanbad : झरिया के कोलियरी क्षेत्रों में वर्चस्व को लेकर खूनी संघर्ष कोई नयी बात नहीं है. झरिया विधानसभा की बागडोर सिंह मेंशन के हाथों से खिसककर रघुकुल के हाथों में जाने से अब इस बात को और बल मिलने लगा है.

रंगदारी वसूली के लिए झरिया में अब तक कई हत्याएं हो चुकी हैं. इन हत्याओं में वे लोग भी शामिल हैं जो प्रत्यक्ष रूप से सिंह मेंशन या रघुकुल का प्रतिनिधित्व करते थे. झरिया में सत्ता पलटने के बाद एक बार फिर से खूनी संघर्ष की आशंका बढ़ गयी है.

हाल के दिनों में गोलीबारी और हाइवा के पहियों से हवा निकालने की घटना के बाद से दोनों ओर आग सुलगने लगी है. यह आग झरिया में कभी भी विकराल रूप ले सकती है.

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एना लोडिंग प्वाइंट पर लगभग साल भर से बंद है कोयले का उठाव

दो राजनीतिक घरानों की लड़ाई में झरिया की कई कोलियरियों से कोयले का उठाव कई दिनों से नहीं हो पा रहा है. अगर हम सिर्फ एना लोडिंग प्वाइंट की बात करें तो यहां लगभग साल भर से कोयले का उठाव नहीं हो पा रहा है. यहां दोनों घराने रंगदारी की वसूली करते हैं. जबकि कारोबारी दोनों घरानों को रंगदारी नहींं देना चाहते. जिस कारण यहां लगभग साल भर से कोयले का उठाव नहीं हो पा रहा है.

कोयला उठाव नहींं होने के कारण राजस्व को भारी नुकसान हो रहा है. झरिया में इस बात की चर्चा काफी दिनों से हो रही है कि झरिया में कांग्रेस विधायक पूर्णिमा सिंह के रिश्तेदार कोयला उत्पादन करने वाली कंपनी के लिए बाधक बन रहे हैं, जिसमें हर्ष सिंह का नाम प्रमुखता से आ रहा है.

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कारोबारियों से दोनों गुट मांग रहे हैं प्रतिटन 650 रुपये की रंगदारी

कोयला व्यवसायियों के अनुसार ट्रकों पर कोयला लोडिंग करने के लिए प्रति टन 650 रुपये दोनो गुटों के लोग मांग रहे हैं.अगर दोनों गुटों को रंगदारी दी जाए तो 1300 रुपये देने पड़ेंगे.

व्यवसायियों का कहना है कि अगर दोनों गुटों को 650 रुपये की दर से रंगदारी दी गयी तो कोयले की लागत बढ़ जायेगी. इसलिए अभी कोयले का उठाव करना घाटे का सौदा है. वहीं रंगदारी के नाम दोनों गुट में से कोई पीछे हटने के लिए तैयार नहीं है.

मारा जाता है मजदूरों का हक

विस्थापित मजदूर नेता मौसम महंती के अनुसार गैर कानूनी तरीके से वसूले जा कोयले की लोडिंग करने वाले मजदूरी का हक भी मारा जाता है. मजदूरी की आड़ में उद्योगपतियों से रंगदारी वसूलने वाले कहते हैं कि लोडिंग के लिए प्रतिटन सवा दो सौ रुपये श्रमिकों को देते हैं. पर कोयले के खरीददारों से 650 रुपये प्रतिटन लिया जाता है.

एक अनुमान के मुताबिक  झरिया में लोडिंग प्वाइंट से प्रति माह एक करोड़ रुपये से अधिक की अवैध उगाही की जाती है. अब इस उगाही के लिए दोनों घरानों के बीच वर्चस्व की लड़ाई शुरू हो चुकी है. पहले से ही झरिया में पूर्व विधायक संजीव सिंह और उनके समर्थकों का लोडिंग प्वाइंट पर कब्जा है. लेकिन हालात बदल गये हैं. झरिया के वर्तमान कांग्रेस विधायक पूर्णिमा नीरज सिंह अब लोडिंग प्वाइंटों पर अपना वर्चस्व कायम करना चाहती हैं और इसके लिए उन्होंने अपने समर्थकों को मैदान में उतार दिया है.

सूत्रों के अनुसार  यह कोलियरी उनके विधानसभा क्षेत्र में है. जाहिर है कि वह चाहती हैं कि उनके समर्थकों को भी कोयला लोडिंग का काम मिले. सबको मालूम है कि विवाद के पीछे आर्थिक हित जुड़ा हुआ है.

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