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गलत है सीएम का दावा, 2020 नहीं, 2032 तक सभी बेघरों को मिल सकता है आवास : प्रदीप यादव

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Ranchi : विधानसभा के बजट सत्र में ग्रामीण विकास विभाग के बजट पर चर्चा के दौरान जेवीएम के विधायक प्रदीप यादव ने अपना कटौती प्रस्ताव लाया. कटौती प्रस्ताव लाने की वजह पर अपनी बात रखते हुए विधायक प्रदीप यादव ने कहा कि नारियल बंदर के हाथ में हो, तो शोभा नहीं देती. बल्कि नारियल की शोभा बढ़ानी है, तो किसी पुजारी या मनुष्य के हाथों में उसे दें. अपने जोरदार भाषण में उन्होंने ग्रामीण विकास से जुड़े कई मसलों को आंकड़ों के साथ रखा. उन्होंने साफ कहा कि मुख्यमंत्री रघुवर दास कई सभाओं और मीडिया में बोलते रहते हैं कि साल 2020 तक झारखंड के सभी बेघरों को प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत आवास दे दिया जायेगा, जो कि गलत है. उन्होंने आंकड़ों से इस बात को समझाने की कोशिश की.

12 साल और लगेंगे

प्रदीप यादव ने कहा कि सरकार के आंकड़े बताते हैं कि 2016 से लेकर अब तक झारखंड में 5,28,791 लोगों को प्रधानमंत्री आवास योजना से जोड़ना था. लेकिन, तीन साल में 36,940 लोगों को ही आवास दिया जा सका. मतलब 1,69,651 लंबित. उन्होंने सामाजिक-आर्थिक सर्वेक्षण का हवाला देते हुए कहा कि उस सर्वेक्षण के मुताबिक झारखंड में 14.25 लाख बेघर हैं. सर्वेक्षण के अलावा केंद्र सरकार ने छूटे हुए लोगों की गिनती फिर से करायी, जो 11.50 लाख हैं. यानी, झारखंड में कुल बेघर करीब 25 लाख के आस-पास हैं. सरकारी आंकड़े बताते हैं कि सरकार तीन साल से औसतन 1.5 लाख को ही पीएम आवास योजना से जोड़ पा रही है. इस रफ्तार से 2020 नहीं, सभी बेघरों को आवास देने में 12 साल और लगेंगे.

 एक साल भी नहीं टिकी 1000 करोड़ से बनी सड़क

प्रदीप यादव ने ग्रामीण विकास से जुड़े श्यामा प्रसाद मुखर्जी रूरल मिशन की बात की. कहा कि झारखंड में एक भी कलस्टर विभाग की तरफ से नहीं बन पाया है. कहा कि पंचायती राज व्यवस्था का हाल बुरा है. मुखिया को छोड़ वित्तीय शक्तियां किसी को नहीं हैं. ऐसे में लोग पंचायत चुनाव में उम्मीदवार बनने से पीछे हट रहे हैं. उन्होंने कहा कि पिछले पंचायत उपचुनाव में 1128 पंचायत समिति की सीट थी, लेकिन सिर्फ 767 लोगों ने ही नामांकन किया. पथ निर्माण की बात करते हुए उन्होंने कहा कि साहेबगंज में पीएम से अर्धनिर्मित साहेबगंज-गोविंदपुर सड़क का उद्घाटन करा लिया गया. सड़क की गुणवत्ता की बात करते हुए प्रदीप यादव ने कहा कि 1000 करोड़ रुपये से बननेवाली सड़क का जब टेंडर हुआ, तो उसे एल वन कंपनी को नहीं, बल्कि एल-2 और एल-3 कंपनी को दे दिया गया. तर्क में कहा गया कि ज्यादा पैसा खर्च करनेवाली एजेंसी सड़क की गुणवत्ता का ख्याल रखेगी. लेकिन, एक साल ही होने को है, सड़क की मरम्मत के लिए दोबारा टेंडर निकाल दिया गया. उन्होंने सवाल किया कि मुख्यमंत्री के विभाग के इस काम में घोर अनियमितता बरती गयी. आखिर एक साल में ही मरम्मत की जरूरत कैसे पड़ सकती है?

 20,000 की मशीन और सालाना किराया 14,400

आगे अपनी बात रखते हुए प्रदीप यादव ने कहा कि खाद्य आपूर्ति विभाग के डीलरों को जो मशनी दी गयी है, उसकी कुल कीमत 20,000 रुपये है. मशीन डीलर को तीन साल के लिए दी गयी है. मशीन के एवज में हर महीने किराया 1200 रुपये वसूला जा रहा है. यानी, एक साल में मशीन के एवज में 14,400 रुपये वसूल लिये जायेंगे. तीन साल में 43,200 रुपये वसूले जा चुके होंगे. उज्ज्वला योजना पर उन्होंने कहा कि गैस और चूल्हा तो आपने दे दिया, लेकिन दोबारा 75 फीसदी महिलाओं ने गैस नहीं भरवायी. ओडीएफ के बारे उन्होंने कहा कि मैं दावे के साथ कहता हूं कि सरकार का ओडीएफ का दावा झूठा है. उन्होंने कहा, “मैं जहां रहता हूं, वह पंचायत भी ओडीएफ नहीं है और उसे ओडीएफ घोषित कर दिया गया है.”

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