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आप तक पाइपलाइन से रसोई गैस पहुंचानेवाले थे सीएम साहब, थपथपायी थी अपनी पीठ, अब उन्हीं के विभाग ने योजना की ‘पाइपलाइन’ में अटकाया रोड़ा

GAIL को सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन बहाल करने में हो रही है परेशानी, सरकार से नहीं मिल रहा फॉरेस्ट क्लियरेंस, कंपनी ने कहा मदद करें

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Akshay Kumar Jha
Ranchi : याद है क्या आपको? वो प्रधानमंत्री मोदी द्वारा लॉन्च किया गया ‘ऊर्जा गंगा गैस पाइपलाइन प्रोजेक्ट’? अरे, वही… आपके घर के किचन तक पाइपलाइन से रसोई गैस पहुंचाने वाला प्रोजेक्ट? याद आया न. भई, खुद पीएम मोदी अपनी इस महत्वाकांक्षी योजना को लॉन्च करने के लिए कई मौकों पर अपनी पीठ थपथपा चुके हैं. उन्हीं से इंस्पायर्ड होकर हमारे सीएम साहब रघुवर दास भी अलग-अलग मौकों पर इस योजना को भाजपा सरकार की बड़ी उपलब्धि बता चुके हैं, बस किचन में लगा स्पेशल टैप खोलिये और रसोई गैस आपके चूल्हे को रौशन कर देगी वाला सपना दिखा चुके हैं. जी हां, वही ऊर्जा गंगा गैस पाइपलाइन प्रोजेक्ट. अब उसी योजना की पाइपलाइन में हमारी रघुवर सरकार ने ही रोड़ा अटका दिया है, जिससे आपके किचन तक आनेवाली रसोई गैस झारखंड पहुंचने से पहले ही कहीं रास्ते में अटक गयी है. झारखंड सरकार के वन विभाग और अन्य अधिकारियों ने ही अभी तक इस योजना को एनओसी नहीं दिया है. इम्पॉर्टेंट बात तो यह है कि इस योजना के रास्ते में चट्टान बना वन एवं पर्यावरण विभाग खुद सीएम रघुवर दास के पास ही है. एक तरफ रघुवर दास झारखंडवासियों को उनके घर के किचन तक पाइपलाइन से रसोई गैस पहुंचाने का सपना दिखाते हैं और दूसरी तरफ उन्हीं का विभाग इस सपने को पूरा नहीं होने दे रहा है.

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क्या है मामला

विदेशों की तरह आपके घर में गैस पहुंचने में कोई दिक्कत नहीं हो, पानी की ही तरह गैस की भी सप्लाई हो, गैस लाने के लिए नंबर न लगाना पड़े, सारे काम छोड़कर गैस गोदाम से घर न लाना पड़े, इसके लिए केंद्र सरकार की तरफ से GAIL (Gas Authority of India Limited) हर राज्य में काम कर रहा है. साल 2016 के अक्टूबर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी संसदीय क्षेत्र वाराणसी में इस योजना को लॉन्च किया था. झारखंड में भी GAIL इस दिशा में काफी तेजी से काम करना चाह रही है, लेकिन राज्य के वन एवं पर्यावरण विभाग की लचर कार्यप्रणाली GAIL के काम को आगे नहीं बढ़ने दे रही है. इसके लिए GAIL ने झारखंड सरकार से मदद करने की अपील की है. GAIL को जिस तरह की मदद चाहिए, उसके लिए कंपनी ने सरकार को लिखकर दे दिया है. अगर सरकार GAIL की बातों पर अमल करती है, तो राज्य के 12 जिलों में सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन शुरू हो सकता है. फिर घर बैठे ही आप पानी की तरह टैप खोलें और गैस मिलना शुरू हो जायेगा.

झारखंड में इन जिलों से होकर गुजरेगी पाइपलाइन

GAIL भारत के छह राज्यों से होते हुए गैस पाइपलाइन गुजारेगी. इनमें उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, प. बंगाल, ओड़िशा और असम शामिल हैं. इस योजना का नाम प्रधानमंत्री ऊर्जा गंगा पाइपलाइन प्रोजेक्ट है. पूरे भारत में पाइपलाइन की लंबाई 3365 किमी होगी. योजना का बजट 12,940 करोड़ रुपये है. इस प्रोजेक्ट के तहत झारखंड में कुल 12 जिलों से सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन सेवा बहाल होनी है. GAIL की गैस पाइपलाइन 12 जिलों से करीब 551.23 किमी की दूरी राज्य भर में तय करेगी, जिनमें चतरा (49.34 किमी), गिरिडीह (53.18 किमी), हजारीबाग (21.28 किमी), बोकारो (101.95), रामगढ़ (37.98), धनबाद (3.14 किमी), सरायकेला (42.98 किमी), रांची (90.84 किमी), खूंटी (69.43 किमी), गुमला (7.69 किमी), सिमडेगा (43.27 किमी), पूर्वी सिंहभूम (0.15 किमी) शामिल हैं. झारखंड में पूरे प्रोजेक्ट का बजट 4,366 करोड़ रुपये है.

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झारखंड के किन शहरों को होगा फायदा

GAIL ने आनेवाले पांच सालों में रांची और जमशेदपुर के अलावा बोकारो, हजारीबाग, धनबाद, रामगढ़ और गिरिडीह के लिए पाइपलाइन बिछाने का प्लान बनाया है. GAIL के मुताबिक, रांची में 30,000 घरों को पाइपलाइन से जोड़ा जायेगा, जबकि 75,000 वाहनों के लिए सीएनजी गैस मुहैया कराने की योजना है. वहीं, जमशेदपुर में 25,000 घरों तक पाइपलाइन बिछाने का प्लान है. 50,000 सीएनजी वाहनों के लिए गैस आपूर्ति करने की योजना है. इसके अलावा बोकारो, हजारीबाग, धनबाद, रामगढ़ और गिरिडीह में घरों तक पाइपलाइन बिछाने की योजना.

किन कंपनियों को झारखंड में होगा फायदा

GAIL का दावा है कि पाइपलाइन बिछ जाने से झारखंड की कई कंपनियों के साथ-साथ वहां काम करनेवाले लोगों को इसका फायदा मिलेगा. इनमें एफसीआई सिंदरी, सेल बोकारो, जिंदल स्टील एंड पावर, हिण्डाल्को मुरी, एचईसी धुर्वा, ऊषा मार्टिन लिमिटेड, रामकृष्ण फोर्जिंग लिमिटेड, टाटा मोटर्स, टाटा स्टील, दि इंडियन स्टील एंड वायर जैसी कंपनियों को फायदा होगा.

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चार जिलों से नहीं मिला है लैंड पजेशन सर्टिफिकेट

GAIL को झारखंड के चार जिलों में लैंड पजेशन सर्टिफिकेट लेने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. कंपनी को हजारीबाग, गिरिडीह, बोकारो और सरायकेला से कुल 4,198 भूखंडों के कागजात चाहिए, जबकि 2,232 जमीन मालिकों से ही कंपनी को जमीन के कागजात मिले हैं. कंपनी का कहना है कि हजारीबाग जिले में अभी सर्वे का काम चल रहा है. गिरिडीह में 1,738 जमीन मालिकों से कागजात लेने हैं. बोकारो में 1,961 और सिमडेगा में 499 जमीन मालिकों से कागजात लेने बाकी हैं.

10 जिलों के फॉरेस्ट पेपर नहीं हुए हैं क्लियर

GAIL को 10 जिलों में फॉरेस्ट विभाग से जंगल-झाड़ी के लिए एनओसी और एफआरए सर्टिफिकेट नहीं मिला है. इनमें चतरा, हजारीबाग, गिरिडीह, रामगढ़, रांची, खूंटी, गुमला, सिमडेगा, सरायकेला और एक अन्य जिला शामिल हैं. एनओसी की बात करें, तो सिर्फ बोकारो और सिमडेगा ही ऐसे जिले हैं, जहां से एनओसी पेपर मिल गया है. वहीं, एफआरए भी बोकारो और सिडेगा से मिल चुका है. बताया जा रहा है कि सिमडेगा के चार ब्लॉक से एनओसी और एफआरए दोनों कंपनी को उपलब्ध करा दिए गये हैं.

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GAIL ने कहा हाई लेवल कमिटी बनाकर मदद करे सरकार

GAIL ने झारखंड सरकार से मदद के लिए कई बिंदुओं पर सरकार के साथ पत्राचार किया है. काम को जल्द से जल्द खत्म करने के लिए GAIL ने एक हाई लेवल कमिटी का गठन करने की बात कही है. कहा है कि इस कमिटी को मुख्य सचिव हेड करें. जिलों में डीसी जमीन संबंधी मामलों का निपटारा करने के लिए ठोस कदम उठायें. अगर 15 दिनों के अंदर डीसी लेवल पर जमीन संबंधी काम पूरा नहीं होता है, तो उसे सचिव को ट्रांसफर कर दिया जाये.

सीएनजी स्टेशन के लिए चाहिए जमीन

GAIL को सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन के लिए कुछ जगहों पर हमेशा के लिए जमीन चाहिए. GAIL इस जमीन का इस्तेमाल सीएनजी स्टेशन बनाने में केरगी. GAIL को नगड़ी, नामकुम, तुपुदाना, मोरहाबादी, कांके और धुर्वा में जमीन की दरकार है. जमीन की लंबाई और चौड़ाई 50 मीटर की होनी चाहिए.

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