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ग्रामीण परिवेश को बढ़ावा देने के लिए सीएम ने की पहल, अब खप्पर के पीएम आवास बनाने पर जोर

मनरेगा और ग्रामीण विकास के इंजीनियरों की टीम 2-3 मकानों का देगी मॉडल. विचार के बाद होगा अंतिम फैसला

Ranchi : विकास की तेज रफ्तार ने आज शहर के साथ ग्रामीण क्षेत्र की सामाजिक संरचना पर प्रभाव डाला है. पहले ग्रामीण क्षेत्रों में जो मकान बनाते थे उससे लोग आत्मीयता से जुड़े रहे. लेकिन रोजगार की चाह ने ग्रामीण इलाके से लोगों को शहर की ओर पलायन को विवश कर दिया है. जैसे-जैसे लोग शहरों की ओर पलायन करने लगे, यह आत्मीयता धीरे-धीरे खत्म होने लगी. शहर जाने वाले लोग कितने सालों बाद वापस लौटेंगे, स्वंय भी वे नहीं जानते थे.

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मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन चाहते है कि पलायन कर चुके लोगों का अपने गांव-घरों से आत्मीयता का रिश्ता फिर से जुड़ जाये. अब इसके लिए उन्होंने प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत बनने वाले मकानों के लिए एक अनोखी पहल की है. उन्होंने योजना अंतर्गत बनने वाले घरों में खप्पर के इस्तेमाल पर जोर दिया है. मुख्यमंत्री के सोच भले ही थोड़ी अटपटी लगे, लेकिन उनकी मंशा यही है कि वर्तमान में योजना के तहत जितनी राशि खर्च होती है, उतनी ही राशि में खप्पर के घर बनाने से आत्मीयता को काफी बढ़ावा मिलेगा.

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ज्यादा बड़े बन सकेंगे खप्पर के मकान

मुख्यमंत्री का मानना है कि शहर की तुलना में ग्रामीण इलाकों में काफी जमीनें खाली पड़ी है. प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत जो भी मकान बनते है, वे काफी छोटे होते हैं. विशेषकर ढलाई वाले घरों में वैसी आत्मीयता नहीं जुड़ पाती है, जो खप्पर के मकानों में होती थी. घरों के बीच आंगन, पीछे की तरफ महिलाओं के लिए बैठने के लिए जगह आदि, पीएम आवास योजना अंतर्गत बनने वाले मकानों में नहीं देखने को मिलती है. लेकिन खप्पर के मकानों के बनने से घऱों की चौड़ाई काफी बढ़ेगी. ग्रामीण इलाकों के बच्चों को अपने पुराने घरों की स्थिति भी पता चल सकेगी. अगर घऱ के पुरूष रोजगार की तलाश के लिए शहर जाते भी है, तो भी वे खप्पर के मकानों को साफ करने के लिए साल में एक बार घर जरूर लौटेंगे.

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आवास निर्माण की लागत में कमी आएगी, कुम्हारों को मिलेगा रोजगार

बता दें कि बीते दिनों ही हेमंत ने ग्रामीण विकास विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिया है कि कि वे प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना के तहत बनने वाले घरों की संरचना में बदलाव लाने की दिशा में कदम उठाया जाये. सूत्रों की मानें, तो मुख्यमंत्री की सोच ग्रामीण क्षेत्र से आत्मीयता ही प्रमुख है. गांवों में बनने वाले मकानों में एकरुपता लाने के लिए इन मकानों में खप्पर का इस्तेमाल किया जाए. इससे आवास निर्माण की लागत में कमी आएगी. साथ ही कुम्हारों को रोजगार के साथ राज्य में बांस की खेती (बैंबू फार्मिंग) को भी बढ़ावा मिलेगा.

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मॉडल बन जाने पर होगा विमर्श

विभागीय अधिकारियों की मानें, तो मुख्यमंत्री की सोच के अनुरूप मनरेगा और ग्रामीण विकास अंतर्गत कार्यरत इंजीनियरों की एक टीम बनाने की पहल शुरू हुई है. टीम प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) अंतर्गत खपड़े के मकानों के लिए 2-3 मॉडल विभाग को बताएगा. मॉडल ऐसा होगा, ताकि योजना के अंतर्गत खर्च की जाने वाली राशि में कोई बदलाव नहीं हो. मॉडल देने के बाद विभाग उस पर विचार विमर्श कर आवश्यक संशोधन करेगा. उसके बाद मॉडल को एप्रूवल के लिए विभागीय सचिव, राज्य व केंद्र को भेजा जाएगा.

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