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#CM रघुवर दास ने 86 बस्ती को मालिकाना हक देने को लेकर की वादाखिलाफी : झारखंड जनतांत्रिक महासभा

Jamshedpur : झारखंड जनतांत्रिक महासभा ने सीएम रघुवर दास पर 86 बस्ती को मालिकाना हक देने को लेकर वादाखिलाफी का आरोप लगाया है.

महासभा द्वारा आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए कृष्णा लोहार, सुनील हेंब्रम, दीपक रंजीत ने कहा कि इन 5 वर्षों के दौरान भाजपा-आजसू की सरकार अपने तमाम वादों और घोषणाओं पर हर क्षेत्र में विफल रही है.

रघुवर दास ने अपने विधानसभा क्षेत्र के लोगों से किया गया 86 बस्ती मालिकाना हक देने का वादा भी पूरा नहीं कर सके.

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मालिकाना हक के वादे पर विधायक से सीएम बन गये

प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा गया कि लगभग तीन दशक पहले से जमशेदपुर पूर्वी विधानसभा क्षेत्र के 86 बस्तियों का मालिकाना हक यहां की जनता की प्रमुख मांग रही है.

टाटा लीज के अंदर रहते हुए कंपनी विस्तार का भय और दहशत के माहौल में जी रहे 86 बस्ती की जनता ने हर चुनाव में अपने क्षेत्र के प्रत्याशी से मालिकाना हक की मुख्य मांग रखते हुए पिछले 25 वर्षों से एक ही दल और प्रत्याशी को 5 बार विधायक चुनकर विधानसभा में भेजने का काम किया है.

इसी वादे से रघुवर दास जमशेदपुर पूर्वी क्षेत्र से विधायक बनकर मंत्री, उप मुख्यमंत्री और राज्य के मुखिया बन चुके हैं. लेकिन मुख्यमंत्री साहब ने जनता के इस प्रमुख मांग और वादों को अभी तक पूरा नहीं किया है.

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वर्ष 2014 में बनी पूर्ण बहुमत की झारखंड सरकार के मुख्यमंत्री रघुवर दास यहां की जनता के विश्वास के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं.

अब रघुवर दास का कहना है कि 86 बस्तियों के लोगों को मालिकाना हक नहीं दिया जा सकता है. अब लोगों को लीज देने की बात कर रहे हैं.

पहले जनता टाटा कंपनी की लीज के दहशत में जी रही थी, अब सरकार प्रधानमंत्री आवास के नाम पर इस इलाके में बसे हुए घर-परिवार को उजाड़ रही है और जो लोग अपनी जायज मांग मालिकाना हक की मांग कर रहे हैं उन्हें सरकारी काम में बाधा डालने का झूठा केस बनाकर जेल भेजने की धमकी दी जा रही है.

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कंपनी बंद होने से बेरोजगार युवा आत्महत्या कर रहे हैं

वक्ताओं ने कहा कि ऑटोमोबाइल सेक्टर और स्टील उद्योग में डिमांड की कमी के कारण जमशेदपुर एवं इसके आसपास कई सारी कंपनियां बंद हो रही हैं. यहां लोग बेरोजगार हो रहे हैं. नये रोजगार और रोजी-रोटी का कोई विकल्प नहीं है.

और सबसे दुख की बात तो यह है कि बेरोजगारी से हताश युवाओं की आत्महत्या की घटना में काफी बढ़ोतरी हुई है.

यहां एक ओर बड़ी आबादी कंपनी के ठेकेदारी प्रथा के तहत काम कर रही है, उनका शोषण चरम पर है.

जहां एक तरफ झारखंड के पढ़े-लिखे लाखों-करोड़ों की संख्या में युवा बेरोजगार हैं वहीं दूसरी तरफ बाहर के राज्यों के लोगों को सरकारी नौकरी दी जा रही है.

झारखंड में झारखंडियों की जमीन पर और खासकर रघुवर दास के विधानसभा क्षेत्र पूर्वी जमशेदपुर में ही ब्लूस्कोप, टाटा  रायसन बना लेकिन नौकरी झारखंडियों के बजाय पड़ोसी राज्य  के लोगों को लाकर दी गयी.

सभा ने आरोप लगाया कि पिछले 25 वर्षों के दरम्यान सत्ता में और सत्ताधारी पार्टी के विधायक, मंत्री, उप मुख्यमंत्री और अब मुख्यमंत्री रह कर अपने विधानसभा क्षेत्र से अपने परिवार और पार्टी के  दो-चार कार्यकर्ता के अलावा किसी को भी सरकारी और कंपनियों में गैर-सरकारी नौकरी में नहीं लगाया है.

गरीबों से दूर होती शिक्षा व्यवस्था

प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा गया कि पूरे झारखंड में शिक्षा का जो माहौल है वह किसी से छुपा नहीं है. ग्रामीण क्षेत्र में हजारों  सरकारी स्कूलों का विलय कर स्कूलों की संख्या कम की जा चुकी है.

पूरे विधानसभा क्षेत्र में पिछले 25 वर्षों में जमशेदपुर का एजुकेशन हब बनाने का वादा करने वाले विधायक तथा सरकार एक भी सरकारी विद्यालय तक की व्यवस्था नहीं कर पाये.

इलाके में लोग शिक्षा के व्यवसायीकरण का शिकार हो गये हैं. लोग नहीं चाहते हुए भी अपने पेट काटकर भूखे रहकर बच्चों को प्राइवेट इंग्लिश स्कूल में पढ़ा रहे हैं.

प्रेस कॉन्फ्रेंस में संगठन के लक्ष्मी पूर्ति राजा कालिंदी, लल्लन प्रसाद, शोमाय हांसदा, बलराम कर्मकार, कालू गोराई उपस्थित थे.

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