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सीएम हेमंत का मास्टरस्ट्रोक : तेल की धार पर फिसल रहा विपक्ष, नहीं सूझ रही कोई काट

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Ranchi: देश की राजनीति में पिछले दो दशक से महंगाई बड़ा मुद्दा रहा है. महंगाई की ऐसी मार पड़ी कि वर्ष 2014 में देश की मनमोहन सरकार चारो खाने चित हो गयी. नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में नयी सरकार बनी. उम्मीद थी कि लोगों को महंगाई से राहत मिलेगी. ऐसा हुआ नहीं और महंगाई सुरसा की तरह लगातार मुंह फाड़ते जा रही है. पेट्रोल-डीजल के दाम में लगातार वृद्धि के कारण सभी सामग्रियों के दाम भी आसमान छू रहे हैं. ऐसे में पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव से कुछ महीने पहले केंद्र सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर वैट को कम कर मास्टर स्ट्रोक चला.

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प्रधानमंत्री के आह्वान पर भाजपा शासित राज्यों में भी वैट को कम किया गया. पंजाब और राजस्थान सरकार ने भी वैट में छूट दी. लेकिन झारखंड में विपक्ष लगातार सरकार पर वैट को कम करने के लिए दवाब बनाता रहा और खूब राजनीति चमकाने का प्रयास किया. किसी को पता नहीं था कि राज्य की हेमंत सरकार में पेट्रोल और डीजल पर वैट को कम करने के लिए क्या कवायद चली रही है.

सच्चाई तो यह भी थी कि हेमंत सरकार में शामिल सहयोगी दल कांग्रेस और राजद को भी इस बात का आभास नहीं था कि मुख्यमंत्री के मन में पेट्रोल और डीजल की कीमत को लेकर क्या चल रहा है. वह कोई निर्णय लेनेवाले हैं. 29 दिसंबर को हेमंत सरकार का दो वर्ष का कार्यकाल पूरा हुआ और मोरहाबादी मैदान में आयोजित राजकीय समारोह में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने पेट्रोल की कीमत को लेकर ऐसा मास्टरस्ट्रोक चला कि विपक्ष के साथ-साथ अपने भी चित हो गए. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने गरीबों को हर महीने अधिकतम 10 लीटर पेट्रोल की खरीद पर 250 रुपये की सब्सिडी की घोषणा कर विपक्ष को तेल की धार पर फिसलने को मजबूर कर दिया.

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हेमंत ने अपने निर्णय से खींचा देशभर का ध्यान

उत्तर प्रदेश और पंजाब समेत पांच चुनावी राज्यों में राजनीतिक दलों द्वारा मतदाताओं को लुभाने के लिए किए जा रहे मुफ्त वादों के बीच झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन द्वारा गरीबों को हर महीने अधिकतम 10 लीटर पेट्रोल की खरीद पर पर 250 रुपये सब्सिडी दिए जाने के निर्णय ने देशभर का ध्यान खींचा है. संभव है कई राज्य हेमंत सरकार की इस योजना को अमलीजामा पहनाने के तौर-तरीकों और उसके परिणामों पर गहरी निगाह जमाए हों. भविष्य में इससे होने वाले नफा-नुकसान का आकलन कर वह भी इस फार्मूले को अपनाने पर विचार कर सकते हैं. अब झारखंड सरकार अपने इस निर्णय को महंगाई के खिलाफ देश के सामने एक नजीर के रूप में पेश कर रही है.

26 जनवरी से प्रदेश के सभी राशन कार्डधारियों के लिए यह सुविधा शुरू हो जाएगी. राज्य में करीब 30 लाख राशन कार्डधारी इसके दायरे में आएंगे. इनमें से जिनके पास मोटरसाइकिल होगी वह इसका लाभ ले सकेंगे. इसके लिए विधिवत मोबाइल एप लांच हो गया है.

जिला स्तर पर लाभार्थियों के निबंधन का काम युद्ध स्तर पर शुरू हो गया है. कुछ तकनीकी दिक्कतें आ रही हैं, जिन्हें तत्परता से दूर किया जा रहा है. 26 जनवरी तक बड़ी संख्या में लाभार्थियों का पंजीकरण हो सके, इसके लिए पीडीएस दुकानदारों की मदद ली जा रही है. राज्य सरकार का आकलन है कि इस योजना पर हर वर्ष करीब 900 करोड़ रुपये का खर्च आएगा. स्वाभाविक है इस राजस्व की भारपाई वह अन्य मदों से करने का प्रयास करेगी, लेकिन फिलहाल इस योजना को लेकर राज्य में काफी उत्साह है. गठबंधन सरकार के सहयोगी झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो), कांग्रेस और राजद इसे ऐतिहासिक फैसला बता रहे हैं.

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विपक्ष उठा रहा है सरकार की मंशा पर सवाल

विपक्षी दलों ने इस मुद्दे पर सरकार की मंशा को लेकर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं. भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष दीपक प्रकाश ने सरकार से ही सवाल पूछा है, ‘पेट्रोल सब्सिडी योजना का एप तो लांच कर दिया, लेकिन यह नहीं बताया कि कितने कार्डधारियों के पास एंड्रायड फोन है और कितने के पास मोटरसाइकिल? पेट्रोल पंपों पर भी अभी कोई व्यवस्था नहीं है.’ उन्होंने आशंका जताई है कि इस योजना का फायदा कुछ खास लोग उठा सकते हैं. बड़ी संख्या में ऐसे लोग हैं जिनके बैंक खाते से आधार नंबर और मोबाइल फोन नंबर लिंक नहीं हुआ है.

एक बड़ी समस्या राशन कार्ड से मोबाइल नंबर का पंजीकरण न होना भी सामने आएगा. राशन के लिए यह अनिवार्य नहीं है, लेकिन पेट्रोल सब्सिडी लेने के लिए इसे जरूरी बनाया गया है. आजसू सुप्रीमो सुदेश महतो ने इस छूट को जनता के साथ छल करार दिया है. बहरहाल विपक्ष भले ही राजनीति करने के लिए कई तरह का तर्क दे रहा हो लेकिन सच्चाई यह है कि हेमंत सोरेन के इस मास्टरस्ट्रोक ने फिलहाल विपक्ष की चूल तो हिला ही दी है.

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