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खतियान के खटराग पर विराम लगाने में जुटे सीएम हेमंत, अब 1932 के अलावे अन्य सर्वे पर भी सरकार करेगी विचार

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Ranchi: ऑफिस ऑफ प्रॉफिट मामले में भले ही निर्वाचन आयोग से राज्यपाल को मिला लिफाफा लगभग एक महीने होने के बाद भी नहीं खुल रहा है लेकिन मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन के पिटारे से ताबड़तोड़ सौगात निकल रहा है. मुख्यमंत्री ने पिछले एक महीने में कई ऐसे निर्णय लिए हैं जिसके सामने विपक्ष तो विपक्ष उनकी सरकार में शामिल सहयोगी पार्टियों की भी हेकड़ी बंद है. पुरानी पेंशन स्कीम, ओबीसी को 27 फीसदी आरक्षण का फैसला तो सबों को भाया लेकिन 1932 के खतियान के आधार पर स्थानीय और नियोजन नीति कई विधायकों और सांसदों को गले के नीचे नहीं उतर रहा था. यही वजह है कि पार्टी के फैसले से इतर कांग्रेस की कार्यकारी अध्यक्ष और सांसद गीता कोड़ा और उनके पति पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा ने कैबिनेट के निर्णय आते ही इस फैसले की मुखालफत कर दी. झरिया विधायक पूर्णिमा नीरज सिंह ने भी सरकार के इस निर्णय का खुलकर विरोध किया. इसके बाद आज मुख्यमंत्री ने अपने आवास पर यूपीए विधायकों की बैठक बुलाई और विशेष तौर पर सांसद गीता कोड को भी बैठक में बुलाया गया. कहने को तो विधायकों को यह कहा गया था कि उनके साथ मुख्यमंत्री क्षेत्र की समस्याओं पर चर्चा करेंगे. समस्याओं पर चर्चा भी हुई लेकिन मुख्य रूप से 1932 पर भी मुख्यमंत्री ने बात की. उन्होनें सांसद गीता कोड़ा और विधायक पूर्णिमा नीरज सिंह की बातों को सुना भी. कांग्रेस के कई अन्य विधायकों ने भी मुख्यमंत्री के समक्ष स्थानीय नीति से आ रही परेशानी को रखा. कांग्रेस विधायक उमाशंकर अकेला ने भी बैठक में स्थानीय नीति की दबे जुबान से ही मुखालफत की.

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चर्चा – विधायकों की गिनती के लिए बुलाई गई थी बैठक

यूपीए विधायकों की मुख्यमंत्री के साथ हुई बैठक को लेकर राजनीतिक गलियारे में एक बार फिर से चर्चा में है. कहा जा रहा है कि विधायकों से क्षेत्र की समस्या जानने के लिए मुख्यमंत्री ने बैठक बुलाई थी लेकिन बैठक की मुख्य वजह विधायकों की संख्या की गणना करने था. दुर्गा पूजा को लेकर कई विधायक क्षेत्र से नहीं आना चाहते थे. कांग्रेस की सभी पांचों महिला विधायकों और मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन की भाभी सीता सोरेन का पूर्व निर्धारित कार्यक्रम उदयपुर राजस्थान में था. वहां इन विधायकों को लाल बहादुर शास्त्री अकादमी द्वारा आयोजित कार्यक्रम में शामिल होना था. जानकारी के अनुसार कई विधायकों ने टिकट भी कटा लिया था लेकिन अंतिम समय मे उन्हें जाने से रोक दिया गया. दरअसल विधानसभा के विस्तारित सत्र 5 सितंबर को समाप्त हुआ था और उसके बाद मुख्यमंत्री ने सभी विधायकों के साथ बैठक कर सबों को क्षेत्र जाने को कहा था. उसके बाद से पिछले 15 दिनों से यूपीए के सभी विधायक अपने अपने क्षेत्र में ही थे. कहा जा रहा है कि इन्हीं सब बातों को देखते हुए मुख्यमंत्री ने सभी विधायकों की बैठक बुलायी और संख्या बल का भी अंदाजा ले लिया. क्योंकि जब विधायकों ने 1932 खतियान से आ रही परेशानी की बात की तो इसपर यह कहा गया कि बहुत जल्द इस मसले पर फिर से बैठक होगी.

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