न्यूज़ विंग
कल का इंतज़ार क्यों, आज की खबर अभी पढ़ें
bharat_electronics

धरती आबा की शहादत दिवस पर सीएम-राज्यपाल ने दी श्रद्धांजलि

852

Ranchi : धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा के शहादत दिवस के मौके पर रविवार को राज्‍यपाल द्रौपदी मूर्मू और मुख्‍यमंत्री रघुवर दास ने उनकी समाधि पर पुष्पांजलि अर्पित की. इससे पहले शहादत दिवस पर बिरसा मुंडा को याद करते हुए बड़ी संख्‍या में युवाओं ने रन फॉर बिरसा में भाग लिया.

eidbanner

बिरसा चौक पर पाहनों ने शहादत दिवस पर भगवान बिरसा मुंडा के प्रतिमा का विधि-विधान से पूजा कर उन्‍हें नमन किया. इस मौके पर संजय सेठ, रांची डीसी व अन्य भी मौजूद थे.

इसे भी पढ़ें- दर्द ए पारा शिक्षक : शिक्षक कहने से सम्मान मिलता है, लेकिन पारा शिक्षक कहते ही लोग मुंह मोड़ लेते हैं…

15 नवंबर 1875 को हुआ था बिरसा मुंडा का जन्म

बिरसा मुंडा का जन्म रांची जिले के उलीहातु इलाके में 15 नवंबर 1875 को हुआ था. सुगना मुंडा के घर बेटे का जन्म हुआ तो गुरुवार का दिने होने की वजह से उसका नाम बिरसा रख दिया गया. भेड़-बकरियां चराते हुए बिरसा का बचपन बीता और उन्होंने ईसाई मिशनरी स्कूल से अपनी पढ़ाई शुरू की.

स्कूल में अक्सर आदिवासी संस्कृति का मजाक उड़ाया जाता जो उन्हें मंजूर न था. उन्होंने आदिवासियों को अपनी संस्कृति पर गर्व करना सिखाया और पुरखा देवताओं को पूजने पर जोर दिया. बिरसा ने आदिवासी समाज में व्याप्त कुरीतियों को दूर करने की कोशिश की.

Related Posts

ट्विंकल शर्मा कांड : धनबाद में कैंडल मार्च निकाला गया, आरोपी को कठोर सजा देने की मांग

बच्ची ट्विंकल शर्मा के साथ हुए आपराधिक यौनाचार के विरोध में रविवार की देर शाम कैंडल मार्च का कार्यक्रम रखा गया.

धीरे-धीरे लोग उनकी बातों से प्रभावित होने लगे. लोगों के मन में ऐसा विश्वास जगा कि बिरसा भगवान के अवतार हैं और वे सारे दुख-दर्द दूर कर सकते हैं. इसी बीच ब्रिटिश सरकार के दौरान गैर आदिवासी यानी दिकु, आदिवासियों की जमीन हड़प रहे थे.

इसे भी पढ़ें- पलामू उपायुक्त के नेतृत्व का विरोध वाली खबर आधारहीन व बेबुनियादः झासा  

जमींदारों के शोषण के खिलाप बिरसा मुंडा ने छेड़ा था आंदोलन

जमींदारों का शोषण भी बढ़ता जा रहा था. इस शोषण के खिलाफ बिरसा मुंडा ने आंदोलन छेड़ दिया. विद्रोह बढ़ता गया और बिरसा जननायक बन गए. बिरसा के विद्रोह को रोकने के लिए ब्रिटिश सरकार ने उनकी गिरफ्तारी पर इनाम घोषित कर दिया.

बिरसा के ही साथियों की गद्दारी की वजह से साल 1900 के जनवरी महीने में पुलिस ने उन्हें चक्रधरपुर से गिरफ्तार कर लिया. 9 जून 1900 को रांची जेल में बिरसा मुंडा की संदिग्ध अवस्था में मृत्यु हो गई. ऐसा कहा जाता है कि ब्रिटिश सरकार ने उन्हें जहर देकर मार डाला, हालांकि आदिवासी समाज और झारखंड के लोकगीतों में बिरसा अमर हो गए.

हमें सपोर्ट करें, ताकि हम करते रहें स्वतंत्र और जनपक्षधर पत्रकारिता...

Get real time updates directly on you device, subscribe now.

dav_add
You might also like
addionm
%d bloggers like this: