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बंद के दौरान विपक्ष में एकता, मगर कांग्रेस में दिखी ‘अनेकता’

जुलूस के दौरान प्रदेश अध्यक्ष डॉ अजय, सुबोधकांत और केएन त्रिपाठी में नहीं दिखी एकता

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Nitesh Ojha
Ranchi : अनेकता में एकता इस देश की खूबसूरती मानी जाती है, मगर झारखंड प्रदेश कांग्रेस ‘अनेकता में एकता’ की बजाय ‘एकता में अनेकता’ के कॉन्सेप्ट को फॉलो करती दिख रही है. इससे विपक्षी एकता की ‘खूबसूरती’ पर असर पड़ने के आसार भी दिख रहे हैं. इसकी एक झलक गुरुवार को संपूर्ण विपक्ष द्वारा बुलाये गये झारखंड बंद के दौरान दिखी. दरअसल, झारखंड प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष डॉ अजय कुमार और पार्टी के अन्य शीर्ष नेताओं के बीच हाल के दिनों में बढ़ी खटास गुरुवार को झारखंड बंद के दौरान साफ देखी गयी. बंद को लेकर दिन के करीब 11 बजे से श्रद्धानंद रोड स्थित पार्टी के प्रदेश मुख्यालय में कांग्रेसी कार्यकर्ताओं ने भूमि अधिग्रहण संशोधन बिल को लेकर रघुवर सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की, लेकिन इस दौरान प्रदेश अध्यक्ष और पार्टी के शीर्ष नेताओं जैसे सुबोधकांत सहाय, केएन त्रिपाठी के बीच दूरी भी चर्चा में रही. पार्टी के कार्यकर्ताओं भी दबी आवाज में यह कहते दिखे कि आंदोलन के दौरान भी पार्टी नेताओं के बीच ऐसी स्थिति पार्टी हित में नहीं है.

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तीन फाड़ में बंटी दिखी प्रदेश कांग्रेस

कांग्रेस सहित संपूर्ण विपक्ष द्वारा आज बुलाये गये झारखंड बंद के दौरान कांग्रेस पार्टी तीन गुटों में बंटी रही. पूर्व केंद्रीय मंत्री सुबोधकांत सहाय ने तो राज्य में अपनी पार्टी के मुखिया डॉ अजय कुमार से दूरी बनाते हुए झाविमो सुप्रीमो बाबूलाल मरांडी द्वारा डिबडीह स्थित कार्यालय से निकले जुलूस के साथ बंद के नेतृत्व की शुरुआत की. हालांकि, बाद में वह प्रदेश मुख्यालय आये जरूर, लेकिन इस दौरान उनकी प्रदेश अध्यक्ष डॉ अजय कुमार के साथ किसी तरह की कोई बातचीत होती नहीं दिखी. जुलूस के दौरान भी दोनों नेता अपने कार्यकर्ताओं के साथ अलग-अलग दिखे. इन गुटों के बीच झारखंड बंद को लेकर बनी किसी रणनीति पर कोई बातचीत नहीं हुई. कांग्रेस के वरिष्ठ नेता केएन त्रिपाठी भी अपने समर्थकों के साथ अलग-थलग ही दिखे. कई गुटों में बंटे कांग्रेस नेताओं ने वैसे तो अपनी यात्रा एक ही मार्ग से की, साथ ही उन्होंने अपनी गिरफ्तारी भी अल्बर्ट एक्का चौक पर ही दी, लेकिन जुलूस के दौरान सभी बड़े नेता अपने-अपने कार्यकर्ताओं के साथ अलग-अलग निकले और भूमि अधिग्रहण संशोधन बिल के विरोध में ‘अपनी-अपनी’ आवाज बुलंद की.

बंद के दौरान विपक्ष में एकता, मगर कांग्रेस में दिखी ‘अनेकता’
रांची बंद कराने निकले सुबोधकांत सहाय.
बंद के दौरान विपक्ष में एकता, मगर कांग्रेस में दिखी ‘अनेकता’
डॉ अजय और सुबोधकांत से अलग रांची में बंद कराने निकले प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ नेता केएन त्रिपाठी.

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कांग्रेस गुटों में बंटी दिख रही है, तो यह देखनेवाले की बीमारी है : प्रदेश अध्यक्ष

प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस के अलग-अलग गुटों को लेकर जब न्यूज विंग संवाददाता ने प्रदेश अध्यक्ष डॉ अजय कुमार से सवाल किया, तो उनका कहना था कि ऐसा कुछ नहीं है. अलग-अलग जगहों पर बंद को सफल बनाने के लिए ही पार्टी के शीर्ष नेता अलग-अलग चल रहे हैं. प्रदेश कांग्रेस में गुटबाजी के सवाल पर उन्होंने मीडिया पर ही आरोप लगाते हुए कहा कि आपलोग जो ‘भाजपा वाले सवाल’ करते हैं, उसका हम जवाब दें, तो आपको पसंद नहीं आयेगा. यही तो दिक्कत है. इस पर जब डॉ अजय से कहा गया कि पार्टी साफ तौर पर गुटों में बंटी हुई दिख रही है, तो इसके जवाब में उन्होंने कहा कि यह देखनेवाले की बीमारी है, यही तो दिक्कत है.

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जिला कमिटी को किया गया था भंग

मालूम हो कि कुछ ही दिनों पहले सुबोधकांत सहाय और प्रदेश अध्यक्ष डॉ अजय कुमार के बीच का विवाद खुलकर सामने आया था. जहां प्रदेश अध्यक्ष ने सुबोधकांत सहाय को पत्र लिखकर उनकी कार्यशैली पर सवाल उठाया था, वहीं इस पत्र के जवाब में सहाय ने कहा था कि पार्टी के अंदर कुछ कार्यकर्ता भी आपकी कार्यशैली से नाराज चल रहे हैं. उसी तरह सुबोधकांत और केएन त्रिपाठी द्वारा विभिन्न जिलों में बनायी कैम्पेन कमिटी को भी निरस्त करने का निर्देश केंद्रीय नेतृत्व ने प्रदेश अध्यक्ष की जानकारी के बाद ही दिया था.

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